कोरोना फैलने से रोकने के लिए कितने लोगों का टीकाकरण जरूरी है?

यूनाइटेड किंगडम कोविड-19 वैक्सीन को मंजूरी देने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है और इसी के साथ ये होड़ और भी तेज हो गई है. लेकिन महत्वपूर्ण सवाल ये है कि महामारी को नियंत्रित करने के लिए कितने लोगों का टीकाकरण किया जाना चाहिए?


कोविड-19 वैक्सीन की होड़ मानव जाति के इतिहास में अभूतपूर्व है. यूनाइटेड किंगडम कोविड-19 वैक्सीन को मंजूरी देने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है और इसी के साथ ये होड़ और भी तेज हो गई है. लेकिन महत्वपूर्ण सवाल ये है कि महामारी को नियंत्रित करने के लिए कितने लोगों का टीकाकरण (vaccination) किया जाना चाहिए?

बाकी देशों की तरह भारत भी वैक्सीन वितरण के लिए अपनी रणनीति बना रहा है. भारत के स्वास्थ्य निकाय इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने हाल ही में कहा कि कोरोना वैक्सीन के जरिये पूरी आबादी का टीकाकरण जरूरी नहीं है क्योंकि वायरल ट्रांसमिशन की चेन को तोड़ने के लिए एक निश्चित संख्या में लोगों का टीकाकरण पर्याप्त हो सकता है.

लेकिन रुकिए. जंगल की आग के बारे में कल्पना कीजिए. आग की चपेट में आने वाले हर एक पेड़ को बचाना असंभव हो सकता है, लेकिन ये संभव है कि आग को और ज्यादा फैलने से रोक दिया जाए. हमें आग को फैलने से रोकने के लिए हर एक पेड़ को बुझाने की जरूरत नहीं होती. इसी तरह, किसी टीकाकरण अभियान में कई व्यक्ति छूट सकते हैं, लेकिन एक निश्चित संख्या का टीकाकरण करने से बड़े समुदाय में वायरस के प्रसार में कमी आएगी. टीका लगवाने वाले हर व्यक्ति को निजी तौर पर सुरक्षा मिलती है, लेकिन टीका लगवा चुके सभी लोग मिलकर बड़े स्तर पर पूरी आबादी को सुरक्षा देते हैं, जिसे हर्ड इम्युनिटी (herd immunity) कहा जाता है.

जब किसी आबादी में एक बड़े हिस्से का टीकाकरण कर दिया जाता है और वे संक्रमण के प्रति प्रतिरोधक क्षमता हासिल कर लेते हैं तो उनकी सामूहिक प्रतिरोधक क्षमता समाज के उन सदस्यों की भी रक्षा करती है जिनमें प्रतिरोधक क्षमता नहीं है. इसे हर्ड इम्युनिटी या पॉपुलेशन इम्युनिटी कहा जाता है. 

इस मुद्दे को समझने के लिए एक छोटी सी कहानी देखें:

सोचिए कि मशहूर बॉलीवुड फिल्म 3 इडियट्स की तिकड़ी कोरोना के समय में है. रैंचो बाहर निकलता है और कोरोना संक्रमित हो जाता है. वह बिना मास्क पहने राजू से मिलता है और वह भी संक्रमित हो जाता है. फरहान राजू से दूरी नहीं बनाता और संक्रमण के चेन की तीसरी कड़ी बन जाता है. उन तीनों में से कोई एक इंपीरियल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में संक्रमण फैलने की वजह बन सकता है. ज्यादातर छात्र ठीक हो जाते हैं लेकिन कॉलेज डायरेक्टर, फिल्म में जिसका नाम 'वायरस' है, वह रिकवर नहीं कर पाता.

अब अगर हमारे पास सिर्फ एक व्यक्ति के लिए पर्याप्त टीका होता तो रैंचो को टीका लगाने से उसे तो सुरक्षा मिलती ही, पूरे कॉलेज में हुए ट्रांसमिशनप को रोका जा सकता था. अगर हम कई छात्रों और शिक्षकों का टीकाकरण कर देते हैं, तो कुछ छात्रों को टीका नहीं लगने पर भी पूरे वायरस कॉलेज में नहीं फैलेगा. जिन्हें टीका लगा है, अगर ऐसे लोगों की संख्या पर्याप्त है तो प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग संक्रमण की चेन को तोड़ देंगे और वायरस का फैलना रुक जाएगा.

कोरोना वायरस का फैलाव
R0 (आर नॉट) यानी प्रसार दर संक्रमण की उस संख्या का प्रतिनिधित्व करती है जो एक संक्रमित व्यक्ति से शुरू होकर पूरी आबादी में फैलती है. R0 अगर 1 से ज्यादा है तो संक्रमण बढ़ता रहेगा. इसके उलट, R0 अगर 1 से कम है तो संक्रमण का फैलाव कम होता जाएगा. समय के साथ तमाम लोग या तो संक्रमण की वजह से या टीकाकरण के बाद प्रतिरोधक क्षमता हासिल कर सकते हैं. इसके अलावा, अगर लोग सावधानियां बरतें तो एक व्यक्ति से तमाम लोगों में फैलने वाले संक्रमण की संख्या को कम किया जा सकता है.

जिस सीमा पर जाकर वायरस का फैलाव बाधित होता है उसे हर्ड इम्युनिटी सीमा (herd immunity threshold-HIT) कहा जाता है. कोरोना के लिए ये सीमा 60 फीसदी मानी जा रही है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि वायरस 60 फीसदी तक जनसंख्या में फैलना बंद कर देगा. जैसे आप कार चला रहे हैं और अचानक ब्रेक लगाते हैं तो कार धीमी हो जाती है, लेकिन तुरंत नहीं रुकती. इसी तरह, वायरस बहुत तेजी से फैलता है तो हर्ड इम्युनिटी सीमा पर इसका फैलाव धीमा हो जाता है लेकिन ये 70 या 80 फीसदी तक जा सकता है. 

हर्ड इम्युनिटी की सीमा तक पहुंचने का मतलब यह नहीं है कि महामारी खत्म हो जाएगी, बल्कि खास परिस्थितियों में ये धीमी हो सकती है लेकिन संक्रमण अब भी कुछ लोगों में फैलता रहेगा. अगर संक्रमण या टीकाकरण से 60 फीसदी जनसंख्या इम्यून हो जाती है और प्रसार दर 1 से नीचे आ जाती है तब भी कुछ संवेदनशील लोग वायरस से संक्रमित होते रहेंगे. लॉकडाउन के दौरान 1 से नीचे आई प्रसार दर लॉकडाउन के खुलते ही बढ़ सकती है. इससे ये अंदाजा लगाने में मुश्किल आती है कि महामारी को रोकने के लिए वैक्सीन कवरेज कितना होना चाहिए.