विशेष

महान शिक्षाशास्त्री थे डॉ. राधाकृष्णन
भारत के दूसरे राष्ट्रपति सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन का जन्म दिवस पूरे देश में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसके पीछे मुख्य कारण उनका शिक्षा के प्रति समर्पण और शिक्षा के वास्तविक गुणों को आत्मसात करना रहा। वह राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत ,दर्शनशास्त्र, कुशल प्रशासक और महान तत्ववेत्ता विचारक थे। सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर सन् 1888 को तमिलनाडु के तिरुतणी नामक कस्बे में हुआ। उनका परिवार प्रांगानाडु नियोगी ब्राह्मण जाति का था।
 
गुड फ्रायडे : त्याग और बलिदान का दिन
पुण्य शुक्रवार यानी गुड फ्र ायडे ईसाई धर्म का पालन करने वालों के लिए एक पवित्र एवं त्याग का दिन होता हैं। इस दिन ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था। इस दिन ईसाई समाज के लोग ईसा मसीह की कुर्बानी, त्याग, बलिदान को याद करते हैं। इसके लिए ईसाई समाज के लोग 40 दिन के उपवास परहेज एवं प्रार्थना के साथ तैयारी करते हैं।
 
चैत्र नवरात्र अष्टमी पर विशेष शक्ति से भरपूर हैं शक्तिपीठ
जिस प्रकार शिव के द्वादश ज्योर्तिलिंग विशेष महत्व रखते हैं, ठीक उसी प्रकार देवी के शक्ति पीठ भी धार्मिक सद्भाव का आधार हैं। ये शक्तिपीठ आध्यात्मिक के साथ ही बौद्धिक और दार्शनिक महत्व भी रखते हैं। इन शक्तिपीठों का निर्माण बुद्घ के स्तूपों की तर्ज पर किया गया। जिस प्रकार स्तूपों में बुद्घ के अवशेष रखे गए हैं, उसी प्रकार शक्तिपीठों में माता सती के काल्पनिक अवशेष रखे हैं।
 
चैत्र नवरात्र का सातवां दिन जीवन को मंगलमय बनातीं माता कालरात्रि
चैत्र नवरात्र के सातवें दिन माता दुर्गा के कालरात्रि रूप की पूजा की जाती है। धर्म शास्‍त्रों के अनुसार बुरी शक्तियों से पृथ्‍वी को बचाने और पाप को रोकने के लिए माता ने अपने तेज से इस रूप को उत्‍पन्‍न किया था। मॉं दुर्गा के सातवें स्वरूप माता कालरात्रि का रंग काला होने के कारण ही इन्हें कालरात्रि कहा गया।
 
चैत्र नवरात्र का छठां दिन भक्तों को वरदान देने वाली कात्यायनी
चैत्र नवरात्र में माता दुर्गा के षष्ठी रूप माता कात्यायनी की पूजा की जाती है। धार्मिक शास्त्र अनुसार महर्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर उनकी इच्छा के अनुसार ही उन्हें पुत्री के रूप मे देवी प्राप्त हुईं थी। महर्षि कात्यायन ने इनका पालन-पोषण किया इसीलये इस देवी को कात्यायनी कहा गया। माता कात्यायनी की उपासना का मंत्र, चंद्र हासोज्ज वलकरा शार्दू लवर वाहना।
 
स्कंदमाता की पूजा से मिलेगा संतान सुख
चैत्र नवरात्र के पांचवे दिन स्कंदमाता की पूजा का विधान है। स्कंदमाता की चार भुजाएँ हैं। इनके दाहिनी तरफ की नीचे वाली भुजा, जो ऊपर की ओर उठी हुई है, उसमें कमल पुष्प है। बाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा में वरमुद्रा में तथा नीचे वाली भुजा जो ऊपर की ओर उठी है उसमें भी कमल पुष्प लिए हुए हैं। माता का वर्ण पूर्णत: शुभ्र है। माता कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं।
 
नवरात्रि पर्व के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा
कूष्माण्डेति चतुर्थकम् -सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराह्रश्वलुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे।। कहा जाता है कि बह्मांड की उत्पत्ति कुष्मांडा देवी द्वारा की गयी है। अष्टभुजी मॉ कुष्मांडा नवरात्रि के चौथे दिन पूजी जाती है। इनकी पूजा से मनुष्य यश कीर्ति पाकर दीर्घायु होता है और इस लोक के सुख भोगकर मोक्ष को प्राप्त करता है। इस भव की यातनाओं से मुक्ति पाने के लिए इनका पूजन-पाठ श्रद्धा-युक्त होकर करना चाहिए। माँ दुर्गा जी के चौथे स्वरूप का नाम कुष्माण्डा है।
 
आस्था और विश्वास का संगम-खाटू श्याम
ईश्वरीय आस्था के कई केंद्र हैं। लेकिन इनमें कुछ केंद्र ऐसे हैं। जिन पर करोड़ों भक्तों की भीड़ उमड़ती है। श्रद्धा का ज्वार जहां हिलोरे लेता है और भक्ति जहां कण-कण में नजर आती है। ऐसा ही विश्व प्रसिद्ध जन -जन की आस्था का केंद्र है खाटू में शीश के दानी खाटू श्याम बाबा। लोगों का विश्वास है कि बाबा के दर से कोई खाली हाथ नहीं जाता । जिसके फलस्वरूप हर वर्ष श्याम भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ती ही जा रही है।
 
जनता ईमानदार राज-नीति चाहती है
जींद उपचुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत से साफ हो गया है कि जनता ईमानदारी से काम करने वाली सरकार ही चाहिए। ऐसी सरकार, जो नौजवानों को रोजगार मुहैया करा सके और प्रदेश को विकास का रास्ता दिखाए। लोक-लुभावने नारे और जातिवाद की राजनीति से जनता अब वोट नहीं देगी।
 
बोर्ड परिक्षाओं में बेहतर अंकों के लिए ऐसे करें तैयारी
सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाएं शुरु होने में कुछ ही समय बाकी है। इस बार की बोर्ड परीक्षाएं जल्दी शुरु हो रही है। इसलिए छात्रों के पास अब तैयारियों के काफी कम समय बचा है। वहीं जैसे जैसे परिक्षाएं नजदीक आते है तो कुछ छात्र पढ़ाई को लेकर इतना दबाव ले लेते है कि सब कुछ आने के बाद भी वह परीक्षा में उतना अच्छा प्रर्दशन नहीं कर पाते। ऐसे में जरुरी है कि जो आपने पूरे साल में पढ़ा है उसको बेहतर समय प्रबंधन और सही तरीकों के साथ दोहराया जाये। विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा से ठीक पहले सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि आपका शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहना भी बेहद जरूरी है। इन तरीकों को अपना कर छात्र परीक्षा के समय में आपके स्वास्थ्य को ठीक रखने के साथ ही बेहतर अंक भी हासिल कर सकेंगे। अपने मन को संतुलन में रखें। बोर्ड परीक्षा को अपने दिलोदिमाग में हावी न होने दें। इसे पहले की कक्षाओं में दी गई सामान्य परीक्षा जैसा ही समझें। दिन में समय निकालकर आधे घंटे जरूर टहलें। पढ़ाई पर केंद्रित रहने के लिए पांच मिनट का ध्यान करें। एक साथ कई घंटे तक एक ही विषय पढऩे से बचें। रात में खाना खाने के आधे घंटे बाद पढ़ाई शुरू करें कई घंटों तक एक ही मुद्रा में बैठकर न पढ़ें। अपने मनोरंजन और लोगों से बातचीत का समय भी निकालें। परीक्षा की तैयारी के दौरान अपने खान-पान का खास ख्याल रखें।
 
एक ऐसे वैज्ञानिक जिनके कार्य को भारतवासियों ने कम और दुनियाभर ने ज्यादा सराहा
हरगोविंद खुराना जिनकी खोज को भारत से ज्यादा दुनिया ने सराहा. जीवों के रंग-रूप और संरचना को निर्धारित करने में जेनेटिक कोड की भूमिका अहम होती है. इसकी जानकारी मिल जाए तो बीमारियों से लडऩा आसान हो जाता है.
 
रामायण कालीन स्थान अब भी हैं मौजूद
हिदं ू धर्म म ें रामायण सबस े लोकपिय्र और महत्वपणर््ू ा महाकाव्यों में से एक है। जगत कल्याण के लिए त्रेता युग में भगवान विष्णु, राम और मां लक्ष्मी, सीता के रूप में धरती पर अवतरित हुए थे। आज भी रामायण कालीन ऐसे स्थान हैं, जहां भगवान राम ने अपने दिन गुजारे थे।
 
संतान की मंगल कामना के लिए ‘अहोई अष्टमी व्रत
भारत में हिन्दू समुदाय में करवा चौथ के चार दिन पश्चात् और दीवाली से ठीक एक सप्ताह पहले एक प्रमुख त्यौहार ‘अहोई अष्टमी’ मनाया जाता है, जो प्राय: वही स्त्रियां करती हैं, जिनके संतान होती है
 
भारतीय एकता के शिल्पी-सरदार पटेल
स रदार पटेल का जन्म भगवान कृष्ण की कर्मभूमि स्वामी दयानन्द सरस्वती और महात्मा गांधी की जन्मभूमि गुजरात मे 31 अक्टूबर 1875 को बोरसद के करमसद गांव मे हुआ था। उनके पिता झेंबरभाई सच्चे ईश्वर-भक्त, साहसी, दूरदर्शी, संयमी और देशभक्त थे।सरदार पटेल के पिता झेंबरभाई ने1857 के स्वाधीनता सेनानियों की मदद करते हुए महारानी लक्ष्मीबाई की सेना मे शामिल होकर अग्रजों के साथ युद्ध किया था। इस तरह से सरदार पटेल जिनका वास्तविक नाम वल्लभभाई पटेल था।
 
अखंड सौभाग्य प्राप्ती का व्रत है करवा चौथ
आज के नये जमाने में भी हमारे देश में महिलायें हर वर्ष करवा चौथ का व्रत पहले की तरह पूरी निष्ठा व भावना से मनाती है। आधुनिक होते हमारे समाज में आज भी महिलायें अपने पति की दीर्घायु को लेकर सचेत रहती है। इसीलिये वो पति की लम्बी उम्र की कामना के साथ करवा चौथ का व्रत रखना नहीं भूलती है।
 
करवा चौथ पूजन विधि और मूहूर्त
सनातन धर्म के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करवा चौथ पड़ता है। करवा शब्द का अर्थ मिट्टी का बर्तन होता है। वहीं चौथ का शाब्दिक अर्थ चतुर्थी है। इस दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र और सफलता की मनोकामना पूरी होने के लिए कठिन व्रत रखती हैं।
 
अन्य सभी से महत्वपूर्ण है यह शरद पूर्णिमा
शरद पूर्णिमा को पर्व के रुप में मनाया जरुर जाता है, लेकिन इस दिन यदि पूरे विधि-विधान से देवी लक्ष्मी की पूजा अर्चना के साथ व्रत रखा जाए तो न सिर्फ लंबी आयु मिलती है बल्कि परिवार धनधान्य भी होता है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं।
 
आठवां स्वरूप हैं देवी गौरी का
कालरात्रि सातवीं मूरत आठवी गौरा रूप। नवरूप धरा देवी ने करने जगत को अभिभूत।।
 
सातवां रुप कालरात्रि का
कालरात्रिमर्हारात्रिर्मोहरात्रिर्श्च दारूणा। त्वं श्रीस्त्वमीर्श्वरी त्वं ह्रीस्त्वं बुद्धिर्बोधलक्षणा।। मधु कैटभ नामक महापरामी असुर से जीवन की रक्षा हेतु भगवान विष्णु को निद्रा से जगाने के लिए ब्रह्मा जी ने इसी मंत्र से मां की स्तुति की थी।
 
भगवती की शक्ति माता स्कन्ध नवरात्रि का पांचवां दिन आज
सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि। गुणाश्रये गुणमये स्कन्दमाता नमोस्तु ते।। छान्दोग्य श्रुति के अनुसार भगवती की शक्ति से उत्पन्न सनतकुमार का एक अन्य नाम स्कन्द भी है।भगवान स्कन्द की माता होने के कारण देवी स्कन्द माता के नाम से जानी जाती हैं दुर्गा पूजा के पांचवे दिन देवताओं के सेनापति कुमार कार्तिकेय की माता की पूजा होती है।
 
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