संपादक

चीन: मामला कुछ और ही है
डोकलाम-विवाद में भारत के अत्यंत संयत रुख के बावजूद चीन का बार-बार इतना बौखलाना आश्चर्यजनक है। अब तो उसने हद ही कर दी है। भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और सेनापति बिपिन रावत एक सैन्य समारोह के लिए लद्दाख जा रहे हैं। उसके पश्चात जनरल रावत सीमांत की कुछ चैकियों पर जाएंगे। चीन इसी बात से खफा है। वह कह रहा है कि इससे दोनों के बीच तनाव बढ़ेगा।
 
बच्चों पर अनावश्यक दबाव न बनाएं
सो शल मीडिया पर एक नन्ही-मुन्ही बच्ची का वीडियो वायरल हो रहा है। मां बच्ची को पढ़ा रही है। पिटाई कर रही है और बच्ची रो रोकर हाथ जोडक़र कह रही है ह्रश्वयार से पढ़ाओ। मेरा हेडएक हो रहा है। उसे गुस्सा भी आता है। पूरा वीडियो देखकर एक बात स्वाभाविक तौर पर मन में आती है। क्या आज की पढ़ाई हमारे बच्चों के व्यवहार में परिवर्तन ला रही है।
 
बिहार : कब ‘पटरी’ पर लौटेगी बाढ़ पीडि़तों की जिंदगी?
बिहार के कटिहार जिले में महानंदा नदी के रौद्र रूप और बीच में गंगा नदी के तांडव ने सैकड़ों लोगों के आशियाने छीन लिए हैं। अपने स्थायी आशियाने के छिन जाने और शिविर में जगह न मिलने के कारण इन बाढ़ पीडि़तों का नया ठिकाना या तो रेलवे स्टेशन या फिर रेल पटरियों के आसपास बन गया है। गंगा के रौद्र रूप और बौराई महांनदा ने इनका तो सबकुछ छीन लिया, अब ये दाने-दाने को मोहताज हैं।
 
अमेरिकी पूंजीपतियों का दम
अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी कॉरपोरेट जगत का पसंदीदा दल है। डोनल्ड ट्रंप के प्रति पूंजीपतियों का आकर्षण और भी ज्यादा रहा। ट्रंप का खुद पूंजीपति होना इसका एक कारण ता।
 
पर बच्चे तो मरे हैं
गोरखपुर के जिलाधिकारी की जांच इस निष्कर्ष पर पहुंची कि बाबा राघव दास अस्पताल में बच्चों की मौत का कारण ऑक्सीजन की सह्रश्वलाई रुकना नहीं था। इस बात को बिना किसी अगर-मगर के मान लिया जाए, तो फिर यह सवाल उठेगा कि आखिर बच्चे क्यों मरे? इस सवाल को अधिक गहरे संदर्भ में इस तरह पूछा जा सकता है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में हर साल दिमागी बुखार से सैकड़ों बच्चे क्यों मरते हैं? आखिर इसके लिए किसी की जवाबदेही तो तय होनी चाहिए।
 
जवाबदेही का दायरा बड़ा है
गोरखपुर के अस्पताल में ऑक्सीजन की सह्रश्वलाई रुकने से 30 से ज्यादा बच्चों की मौत पर उचित ही देश में हाय-तौबा मची है। ऐसी घटना किसी भी समाज के लिए सिर्फ कलंक ही कही जा सकती है। गोरखपुर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृह शहर है। वे वहां से पांच बार लगातार सांसद रहे। इसलिए विपक्षी दल इस घटना को लेकर उन्हें घेरने की कोशिश करें, यह लाजिमी ही है। इस पर अपना बचाव करने के बजाय अपेक्षित यह है कि योगी आदित्यनाथ अपनी जवाबदेही मंजूर करें। उनका उत्तरदायित्व सिर्फ बतौर मुख्यमंत्री नहीं है।
 
बदलते परिवेश में अब रश्म अदायगी है कजरी गायन!
लोक कला और लोक संस्कृति के रूप में गाए जाने वाली कजरी बदलते परिवेश में पिछले दो दशकों से रश्म अदायगी के रूप से गाई जाने लगी है। कजरी गीतों ने कभी स्वतंत्रता आंदोलन को आगे बढ़ाने में मदद की थी।
 
साइबर खतरे की चेतावनी
भारत सरकार देश को डिजिटल तकनीक की तरफ बढ़ाने में खासा उत्साह दिखा रही है। लेकिन इस रास्ते में मौजूद खतरों के निवारण पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। भारतीय तकनीकी संस्थान (आईआईटी)- कानपुर के एक अध्ययन का यही निष्कर्ष है।
 
नेपाल की तटस्थता
नेपाल के उप-प्रधानमंत्री कृष्ण बहादुर माहरा ने कहा है कि भारत-चीन के दोकलम सीमा विवाद में नेपाल किसी का पक्ष नहीं लेगा। उन्होंने कहा- ‘कुछ मीडिया रिपोर्टें हमें इस तरफ या उस तरफ खींचने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन मैं साफ करना चाहता हूं कि इस मुद्दे पर हमने किसी का पक्ष नहीं लिया है।’
 
यही है उचित समाधान
शिया समुदाय ने राम जन्मभूमि- बाबरी मस्जिद विवाद के हल का उचित रास्ता दिखाया है। यह सहमति और सद्भाव का रास्ता है। सुन्नी समुदाय भी ऐसी ही उदारता दिखाए तो टकराव के मौजूदा वातावरण को टाला जा सकता है। शिया वक्फ बोर्ड ने इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया। उसमें कहा कि विवादित जमीन पर राम मंदिर बनना चाहिए।
 
भूख हड़ताल का तरीका
बारह दिन से अनशन पर बैठीं सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को पुलिस जबरन उनके स्थान से ले गई। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मेधा पाटकर की जान बचाने के लिए पुलिस ने ये कदम उठाया। जबकि मेधा ने कहा- ‘यह कोई अहिंसक आंदोलन का जवाब नहीं है। मोदीजी के राज में, शिवराजजी के राज में एक सार्थक संवाद तक नहीं हुआ।
 
वर्णिका कुंडु के सवाल
चंडीगढ़ की सडक़ों पर आधी रात अपनी गाड़ी से जा रही वर्णिका कुंडु को अगवा करने की कोशिश हुई। लेकिन दो रईसजादों से डरने के बजाय वर्णिका ने उनको चुनौती दी। फिर पुलिस के पास गईं। केस दर्ज कराया। ये घटना और इसमें पुलिस तथा राजनेताओं का आचरण को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहुचर्चित हो चुका है।
 
पैसों के लिए बच्ची को बेचा!
ओडिसा के केंद्रपाड़ा जिले में एक मर्मांतक घटना की खबर मिली है। एक युवा पति-पत्नी को अपने नवजात शिशु को 1500 रु. में बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा है। वे मजबूर इसलिए हुए कि उनके पास अस्पताल वालों को देने के लिए पैसे नहीं थे। उड़ीसा के छोटे-से गांव से निराकार और गीतांजलि चल कर आए केंद्रपाड़ा ! गीतांजलि प्रसव-पीड़ा से तड़प रही थी। उन दोनों को यह पता नहीं था कि सरकारी अस्पताल में भर्ती होकर प्रसव कैसे करवाया जाए।
 
चीन अपने मुंह मियां मि_ू
हमारे सीमांत पर चीन क्या खेल खेल रहा है, कुछ समझ में नहीं आता। अब वह कह रहा है कि देखिए, भारतीय कितने समझदार हैं कि उन्होंने डोकलाम से अपनी फौजें लगभग हटा ली हैं। 400 जवानों की जगह अब सिर्फ 40 जवान ही वहां बचे हैं। यानी भारत डर गया है और वह अपने आप अपना कदम पीछे हटा रहा है। उसने चीनी सीमा में घुस आने की जो गलती की थी, उसे वह अपने आप सुधार रहा है। ऐसा कह कर चीन अपने मुंह मियां-मि_ू बन रहा है।
 
विवेकहीनता के दौर में!
किसी घटना के बारे में बिना पूरे तथ्य इक_ा किए, बिना संदर्भ में गए और बिना सबं ंि धत पक्षो ं के परु ान े रिकार्डॅ पर गौर किए जो प्िर तक्रि या जतार्इ जाती ह,ै उस े विवेकहीनता का उदाहरण ही कहा जाना चाहिए। सोशल मीडिया के इस दौर में कोई खबर आते ही उस पर टिह्रश्वपणी करने की होड़ में शामिल हो जाना आम प्रवृत्ति है।
 
चीन से निपटने के लिए तैयारी जरूरी
डो कलाम में चीन के साथ भारत का विवाद जटिल होता नजर आ रहा है। चीन के साथ कूटनीतिक स्तर पर बातचीत के जरिये समाधान की कई कोशिशें विफल साबित हुई हैं। सबसे ताजा कोशिश अभी हाल में की गई। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने चीनी समकक्ष से एनएसए ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान चीन जाकर बातचीत की। उनकी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात हुई।
 
अब पूरा ताना-बाना तोड
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने कश्मीर स्थित अलगाववादी नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज करने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इन नेताओं पर कश्मीर में निरंतर अशांति फैलाए रखने की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। जाहिर है, यह आरोप कोई नया खुलासा नहीं है।
 
आंतरिक सुरक्षा का आईना
नक्सलवाद को इस्लामी आतंकवाद के साथ जोडक़र देखना तार्किक नजरिया ह ै या नही,ं इस पर बहस हो सकती ह।ै लेि कन यह निविर्व ाद ह ै कि इन दोनो ं स े देश की आंतरिक सुरक्षा को गहरा खतरा है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपनी सालाना रिपोर्ट में भारत के संदर्भ में इन दोनों को एक साथ रखा।
 
बिजली पर खोखले दावे!
ग्रामीण इलाकों में बिजली पहुंचाने के एनडीए सरकार के दावों पर गंभीर सवाल उठा है। नीति आयोग ने अपनी एक ताजा रिपोर्ट में कहा है कि मौजूदा ग्रामीण विद्युतीकरण अभियान से जमीनी हालात में खास सुधार नहीं हुआ है। इस रिपोर्ट के मुताबिक देश में अब भी तीस करोड़ से ज्यादा लोगों को बिजली मुहैया नहीं हुई है।
 
बस्तों के बोझ तले न दबे बालमन
कें द्र सरकार ने एक बार फिर कहा है कि स्कूलों में बच्चों के बस्ते का बोझ कम होगा। दूसरी कक्षा तक केवल दो किताबें और पांचवीं तक तीन किताबें पढ़ाने की सिफारिश एनसीईआरटी ने की है। सरकार का कहना है कि वो इन प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार कर रही है।