संपादक

तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा... सुभाषचंद्र बोस
अंग्रेजों की जड़ों को उखाड़ फेंकने में जिन अमर शहीदों का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया सुभाषचंद्र बोस उन्हीं में से एक हैं। अपने साहस और बुद्धिमानी से सुभाष ने अपने साथियों और भारतीयों में नया जोश भरा। अपने नेतृत्व से उन्होंने भारत के युवाओं को आजादी की तरफ उत्प्रेरित किया।
 
क्या केवल गरीब ही है सबसे बड़ा ‘मुजरिम’?
गत् 70 वर्षों से देश में लोकतंत्र के होने के बावजूद खासतौर पर सत्ता विरोधी दलों द्वारा यही बताने व जताने की कोशिश की जाती है कि सत्ता में बैठी सरकार पूंजीवादियों, उद्योगपतियों तथा कारपोरेट के हितों का ध्यान रखने वाली सरकार है। कई उत्साही नेता तो यह तक कह देते हैं
 
आर्थिक मोर्चे पर नसीहत करता अमेरिकी शटडाउन
सीनेट में फंडिंग बिल खारिज होने के साथ ही अमेरिका से खबरें आने लगीं हैं कि दिवालिया होने की कगार पर अमेरिका पहुंच चुका है। शटडाउन के चलते लाखों लोग बेरोजगारी की कगार पर पहुंच चुके हैं। लाखों कर्मचारियों को अबैतनिक अवकाश पर भेज दिया जाएगा। इस मार से व्हाइट हाउस के कर्मचारी भी अछूते नहीं रहेंगे, आदि आदि। हकीकत भी यही है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तमाम कोशिशें फेल साबित हुईं हैं और सीनेट में बिल पास नहीं होने की वजह से शटडाउन की स्थिति निर्मित हुई है।
 
वे प्रधानमंत्री हैं, प्रचारमंत्री नही
विदेशी राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों को हमारे प्रधानमंत्री गुजरात क्यों ले जाते हैं ? वे हर किसी विदेशी नेता को नहीं ले जाते। पिछले साढ़े तीन साल में दर्जनों विदेशी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भारत आए हैं लेकिन अहमदाबाद जाने का सौभाग्य अभी तक सिर्फ तीन विदेशी नेताओं को मिला है।
 
न्यायपालिका विवाद : जन आस्था के स्तंभ पर विवाद......!
प्रजातंत्र के पिछले सत्तर सालों में से पिछले साढ़े तीन साल को क्या नाम दिया जाये, यह तो नामकरण करने वाले जाने? किंतु यह सारा देश महसूस कर रहा है कि पिछले साढ़े तीन साल इस देश के लिए शुभ या किसी विशेष उपलब्धि के लिए याद रखने लायक तो कतई नहीं रहें।
 
राजनीतिक आत्ममंथन की आवश्यकता
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के नवनियुक्त अध्यक्ष राहुल गांधी ने जिस समय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली है। वह समय पूरी तरह से कांग्रेस के प्रतिकूल है, जहां पर राहुल और कांग्रेस दोनों के लिये एक नई चुनौती मुंह फाडे खड़ी है।
 
हज-यात्रा अब अपने दम पर
हज-यात्रा में दी जानेवाली सरकारी सहायता को खत्म करने का विरोध कुछ मुस्लिम नेता और संगठन जरुर करेंगे और यह प्रचार भी करेंगे कि आरएसएस के प्रधानमंत्री से इसके अलावा क्या उम्मीद की जा सकती है लेकिन ऐसा करना बिल्कुल गलत होगा।
 
संघ के अनुवांशिक संगठनों की बगावत या नूरा कुश्ती
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुवांशिक संगठनों और सरकार के बीच की दूरियां अब खुलकर सामने आने लगी हैं। यह एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है, या वास्तव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पकड् सरकार और अनुवांशिक संगठनों पर ढीली पड़ रही है।
 
मुद्दा दोगुना आमदनी का
साल 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुना करने के उपाय सुझाने के लिए बनी समिति ने अपनी रिपोर्ट का अगला हिस्सा सरकार को सौंपा है। ये समिति चरणबद्ध ढंग से अपनी रिपोर्ट दे रही है। अशोक दलवई की अध्यक्षता में बनी ये समिति मानती है कि इस लक्ष्य को हासिल करना चुनौती भरा है, लेकिन ऐसा करना संभव है।
 
जब सास बनी बहू की सांस
सा स बहू और साजिश जैसे घर घर में लोकप्रिय सीरियल से उलट गुरुग्राम में एक सास-बहू की वास्तविक जिंदगी की कहानी फिल्मकारों और सीरियल निर्माताओं को नई रोमांचक स्क्रिप्ट दे सकती है। गुरुग्राम के बादशाहपुर की रहने वाली 60 वर्षीय धनपति देवी ने बहू को किडनी देकर उनकी जान बचाई।
 
दुल्हन खरीद की मंडी बना शेखावाटी
दूसरे राज्यों से युवतियों की खरीद फरोख्त के धंधे और कन्या भू्रण हत्याओं के कारण राजस्थान के शेखावाटी में गड़बड़ाते लिंगानुपात की तरफ देश के लोगों का ध्यान खींचा है। शेखावाटी के झुंझुनू,सीकर व चूरू जिले का शायद ही कोई गांव होगा, जहां महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, बंगाल, उड़ीसा, बिहार व उत्तर प्रदेश के कई गरीब इलाकों से एक से दो-तीन लाख रुपए तक में दलालों के जरिए युवतियां खरीद कर लाई गई और यहां कुंआरों को ब्याह दी गई।
 
डेटा सुरक्षा की चुनौतिया
आधार से जुड़ी सूचनाओं के लीक होने की ख़बरों से देश में डेटा सुरक्षा को लेकर नई बहस खड़ी हुई है। हालिया घटनाओं से आधार कार्ड योजना की संवैधानिकता पर सवाल और निजता के अधिकार के हनन की आशंकाएं और मजबूत हुई हैं। यूनिक आईडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (यूआईडीएआई) का दावा है कि आधार डेटा में सेंधमारी संभव नहीं है।
 
सारे तीरथ बार-बार गंगासागर एक बार
गंगासागर भारत के तीर्थों में एक महातीर्थ हैं। गंगाजी इसी स्थान पर आकर सागर में मिलती है। इसी स्थान पर राजा सगर के साठ हजार पुत्रों को मोक्ष प्राप्त हुआ था। यहां मकर संक्रान्ति पर बहुत बड़ा मेला लगता है जहां लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए आते हैं।
 
छोटे और मझौले व्यापारियों के प्रति निर्दयी होती सरकार
विदेशी निवेशकों को लुभाने में केंद्र सरकार समेत प्रदेश सरकारें असफल साबित हुई हैं। यही वजह है कि एफडीआई जैसे फैसले लेने को केंद्र सरकार मजबूर हुई है। बजाये इसके इसमें कोई शक नहीं कि जब बतौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र की बागडोर अपने हाथों में ली थी तो देश का छोटा और मझौला कारोबारी और व्यापारी सबसे ज्यादा खुश और अच्छे दिनों के आने के प्रति आशांवित हुआ था।
 
भारत का अतीत और भविष्य
ओ देवता, निर्बाध बढ़ो, अपने पथ पर, तब तक, जब तक कि यह सूर्य आकाश के मध्य में न आ जाय जब तक तुम्हारा आलोक विश्व में प्रत्येक देश में प्रतिफलित न हो।
 
चुनावी बजट को राहत वाला बनाना सरकार की मजबूरी
आम बजट लाने से पहले लोग वित्तमंत्री अरुण जेटली से मांग कर रहे हैं कि वो अपना चुनावी वादा पूरा करें और आयकर से छूट की सीमा बढ़ाकर 5 लाख करें। गौरतलब है कि वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान खुद जेटली ने तत्कालीन मनमोहन सरकार से मांग की थी कि आयकर छूट की सीमा को 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख किया जाए।
 
मकर संक्रांति पर करें दूध, दही और खिचड़ी का दान
मकर संक्रांति आने वाली है। सूर्य जब राशि परिवर्तिन करते हैं यानी सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में पहुंचने पर मकर संक्रांति मनाई जाती है। तिल, गुड़, दही और खिचड़ी का त्योहार है, मकर संक्रांति के दिन स्नान और दान की परंपरा है। इस दिन कई जगह पितरों को जल में तिल अर्पण भी दिया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन महाभारत में पितामह भीष्म ने सूर्य के उत्तरायण होने पर ही स्वेच्छा से शरीर का परित्याग किया था। उनका श्राद्ध संस्कार भी सूर्य की उत्तरायण गति में हुआ था। संक्रांति के दिन सुबह सुबह पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। पवित्र नदी में स्नान न कर पाएं तो घर में तिल के जल से स्नान कर सकते हैं। स्नान करने के बाद आराध्य देव की प्रार्थना करनी चाहिए। इसके बाद पितरों की आत्मा की शांति के लिए जल में तिल अर्पण करना चाहिए। इस बात का ध्यान रखें कि स्नान के बाद दान का बहुत महत्व है, इसलिए स्नान के बाद तिल दान करना चाहिए। इसके अलावा गर्म कपड़े, चावल, दूध दही और खिचड़ी का दान करना चाहिए। इस त्योहार पर घर में तिल्ली और गुड़ के लड्डू बनाए जाने की परंपरा है। इसलिए इस दिन भोजन में भी तिल को शामिल करना चाहिए।
 
सादगी और ईमानदारी की प्रतिमूर्ति थे लाल बहादुर शास्त्री
क्या आपने कभी ऐसे राजनेता को कल्पना में भी देखा है जो वर्षों किसी नगर निगम का पार्षद रहा हो,किसी अखिल भारतीय राजनीतिक दल का महत्वपूर्ण पदाधिकारी रहा हो, प्रान्तीय और केन्द्रीय सरकार में मंत्री रहा हो और अन्त में प्रधान मंत्री के पद पर भी आसीन रहा हो और अपने छोटे से व्यक्तिगत कार्य के लिए उसे बैंक से कर्जा लेना पड़ा हो जिसे वह चुकता न कर पाया हो।
 
विदेशों में भारत के स्थाई राजदूतों से बढ़ती उम्मीदे
भारतीय इतिहास में संभवत: यह पहली बार हुआ है जबकि विदेशों में रह रहे भारतीय मूल के लोगों से प्रधानमंत्री एवं विपक्ष के नेता खुद से मुलाकात कर रहे हैं और अपने नजरिये से उन्हें अवगत करा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि जब भी वो किसी देश की यात्रा करते हैं, तो उनका प्रयास होता है कि वहां रहने वाले भारतीय मूल के लोगों से वो मुलाकात कर सकें।
 
आखिर लटक ही गया तीन तलाक बिल
तीन तलाक रोकने के लिए पेश किया गया मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक 2017 बिल को पास होने से रोक कर कांग्रेस ने एक बार पुन: अपनी वही पुरानी गलती दोहरा दी है जो पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने शाहबानो प्रकरण में की थी। शाहबानो प्रकरण के बाद कांग्रेस ने केन्द्र में तीन बार सरकार भले ही बना ली हो मगर अपने बूते कभी नही।
 
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