संपादक

गांधी व्यक्ति, ब्रांड नहीं विचारधारा है
मान,अपमान,सुख,दु:ख,प्रशंसा,आलोचना के भाव से जो व्यक्ति ऊपर उठ जाता है वही महायोगी, महापुरुष की श्रेणी में आता है। बापू संत थे। बापू महायोगी थे। बापू महापुरुष थे।
 
कांग्रेस की ‘जन वेदना’ का अर्थ
कांग्रेस ने दिल्ली में राष्ट्रीय ‘जन वेदना’ सम्मेलन किया। घोषित उद्देश्य नोटबंदी से लोगों को हुई परेशानियों को मुद्दा बनाना था। पार्टी यह संदेश देना चाहती थी कि इस मुसीबत के समय वह आम जन के साथ है। उनकी दिक्कतों को लेकर वह संघर्ष करेगी। कांग्रेस नेताओं ने नोटबंदी के परिणाम के साथ-साथ इसके फैसले और तरीकों पर भी सवाल उठाए। इसके लिए अपने सबसे बड़े नामों को मंच पर उतारा।
 
प्रवासी सम्मेलन : भावनाओं से जाए आगे
इन दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एजेंटे पर काला धन सर्वोपरि है। इसलिए जब वे 14वें प्रवासी भारतीय सम्मेलन को संबोधित करने पहुंचे तो वहां भी नोटबंदी और उससे जुड़े मुद्दे उनके भाषण में प्रमुख बने रहे।
 
चल गीता चल.. कोई नहीं.. जीतकर मानेंगे
दं गल जितनी सफल फिल्म साबित हो रही है मेरा मन उतना ही उमंग से सराबोर हो रहा है। एक और फिल्म जिसकी पटकथा हरियाणा की धरती से ताल्लुक रखती है। फि़ल्म का कथानक और कहानी की धुरी गीता का नाता इस माटी से है। इसके पहले सुल्तान भी इसी सूबे की प्रेरणा से रुपहले परदे पर आई थी। सुल्तान भी बहुत सफल हुई। दरअसल मेरा उत्साह इन फिल्मों के हरियाणा से ताल्लुक रखने भर से नहीं है। ये एक वजह हो सकती है। लेकिन असली और ठोस वजह ये है कि ये फिल्में हमारी सामाजिक चेतना को जगाती हैं। हमारे बदलाव की भूख को बयान करती हैं।
 
स्वच्छता का भी इत्मिहान
अगले फरवरी-मार्च में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होंगे। इनके कार्यक्रम की घोषणा के साथ लोगों का ध्यान वहां के चुनावी समीकरणों पर केंद्रित हो गया है। मगर इन चुनावों में दलों और नेताओं की तकदीर के साथ-साथ इन चुनावों में भारतीय निर्वाचन व्यवस्था की छवि भी दांव पर है। ये धारणा मजबूत है कि चुनावों में धन का प्रभाव बढ़ता गया है- खासकर काले धन का।
 
शशिकला को मिली कमान
शशिकला नटराजन का ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कडग़म का अध्यक्ष बनना भारत में दलीय राजनीति में लगी गंभीर बीमारी का परिचायक है। शशिकला पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की दोस्त रहीं। इस नाते वे परदे के पीछे से सियासी समीकरणों के खेल में लगी रहती थीं, लेकिन कभी प्रत्यक्ष राजनीति नहीं की।
 
जवाब जो नहीं मिले
देश ने 31 दिसंबर की शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का बेसब्री से इंतजार किया। लोग पचास दिन पूरे होने के बाद नोटबंदी के बारे में प्रधानमंत्री का आकलन सुनने को बेताब थे। लेकिन पचास मिनट के भाषण में नोटबंदी के मुख्य मकसदों को हासिल करने में कितनी कामयाबी मिली, इस बारे में प्रधानमंत्री ने कोई तथ्यात्मक विवरण नहीं दिया।
 
कैशलेस संकल्प का नया साल
न या साल शुरू हो गया। वर्ष 2017 हमारे प्रदेश,देश दुनिया के लिए सुख शांति का वर्ष साबित हो इस मंगलकामना के साथ नए बदलाव की उम्मीद की जानी चाहिए। बदलाव प्रकृति का नियम है। जो बदलता नहीं वह समय के साथ अ-प्रासंगिक हो जाता है। इसलिए एक सार्थक बदलाव के लिए हमें हमेशा तत्पर रहना चाहिए। नयापन हर तरफ ताजगी लाता है।
 
टाटा की महंगी जीत
साइरस मिस्त्री की टाटा सन्स ग्रुप से विदाई हो गई है। इसे रतन टाटा की जीत माना जा सकता है। लेकिन ये बड़ी महंगी जीत है। टाटा समूह के चेयरमैन पद से हटाए जाने के फैसले को मिस्त्री ने सहजता से स्वीकार नहीं किया।
 
सियासी चंदे पर वाजिब सवाल
मुद्दा राजस्व सचिव हसमुख अधिया के बयान से उठा। अधिया के बयान से संकेत मिला कि राजनीतिक दलों को मिलने वाले नकद चंदे को लेकर सरकार ने नई छूट दी है। इसके तहत 500 और 1000 पुराने नोटों से अभी चंदा दिया जा सकता है। साथ ही नोटबंदी के बाद राजनीतिक दलों के खातों में चाहे जितनी भी रकम जमा हुई हो, उसकी जांच नहीं की जाएगी।
 
एक तरफ खाद्यान्न संकट तो दूसरी तरफ खाद्यान्न बर्बादी
जहां एक और दुनिया खाद्यान्नों के संकट से जूझ रही है वहीं उचित रखरखाव व फसलोत्तर गतिविधियों के अभाव में देश में एक लाख करोड़ रुपए से अधिक के खाद्यान्न सालाना नष्ट हो जाते हैं। खाद्यान्नों की सालाना बरबादी के यह आंकड़े पिछले दिनों ही भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण विभाग के सचिव अविनाश कुमार श्रीवास्तव ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित एक सेमिनार में दिये हैं। खाद्यान्नों की बरबादी पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार की ओर से बताया गया है कि वह दलहन और खाद्यान्नों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की प्रोद्यौगिकी विकसित करने पर विचार कर रही है।
 
पढ़ाई-लिखाई पर दें ध्यान
हिंदुओं की अजीब विडंबना है। अमेरिका में सभी मतावलंबियों के बीच ये समुदाय शिक्षा पर सबसे ज्यादा ध्यान देता है। मगर बात पूरी दुनिया की हो, तो सामने आता है वह सबसे कम पढ़ा-लिखा समुदाय है। हालांकि हिंदू इस पर संतोष कर सकते हैं कि पियू रिसर्च के वैश्विक सर्वे में यह सामने आया कि हर जगह बहुसंख्यक समुदाय के लोग पढ़ाई-लिखाई में सबसे पिछड़े हुए होते हैँ। अत: भारत में अगर हिंदुओं का यही हाल है, तो उसमें कोई अचरज नहीं। मगर यह संतोष करने का कमजोर आधार है। पियू रिसर्च के सर्वे का सही सबक यह होगा कि हिंदू समुदाय के लोग पढ़ाईलि खाई पर ज्यादा ध्यान दें। शिक्षा के प्रसार को प्राथमिकता दें। वरना, ऐसी सुर्खियां कतई अच्छा अनुभव प्रदान नहीं करतीं कि हिंदू दुनिया में सबसे ज्यादा अनपढ़ हैं।
 
राहुल खुलासा तो करें
बेशक कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की राजनीति और दलीलों को गंभीरता से न लिया जाए। बेशक नोटबंदी पर कांग्रेस एक सशक्त और तार्किक विपक्ष की भूमिका नहीं निभा पाई है। कांग्रेस सडक़ों पर आंदोलन खड़े नहीं कर पाई। राहुल गांधी के नेतृत्व में एक भी जत्थे ने बैंकों या एटीएम अथवा रिजर्व बैंक का घेराव नहीं किया।
 
रिजिजू मामला, सवाल नैतिकता का
नरेंद्र मोदी ने सरकार भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ जंग छेड़ी हुई है। नोटबंदी का एलान होते ही भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने उसे काले धन पर सर्जिकल स्ट्राइक बताया था। मगर नोटबंदी से काला धन खत्म होने की उम्मीदें टूट चुकी हैं। जगह-जगह से करोड़ों रुपए के नए नोट बरामद होने की घटनाओं से यह संदेश तो गया है कि सरकार भ्रष्ट लोगों पर कार्रवाई के प्रति कृत-संकल्प है, मगर भ्रष्टाचार का तंत्र कितना मजबूत और व्यापक है- उससे यह भी जाहिर हुआ है।
 
किसानों से बेफिक्र सरकार
पिछले हफ्ते मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सीताराम येचुरी ने राज्यसभा में गेहूं पर आयात शुल्क शून्य करने के सरकारी फैसले का मामला उठाया। अफसोस जताया कि हरित क्रांति चार दशक बाद सरकार ने अन्नदाताओं (किसानों) के हितों के खिलाफ ये फैसला लिया है। आरोप लगाया कि देश में गेहूं के दाम बढ़ रहे हैं, उससे भयाक्रांत सरकार ने जल्दबाजी में ये निर्णय लिया।
 
नोटबंदी के 30 दिन
आठ दिसंबर को नोटबंदी का एक महीना पूरा हो गया। सडक़ों पर अराजकता, विरोध-प्रदर्शन, आंदोलन नगण्य हैं, लेकिन विपक्ष के 14 दलों ने कांग्रेस के नेतृत्व में काली पट्टी बांध कर संसद के परिसर में काला दिवस मनाकर अपना विरोध जताया और संसदीय कार्यवाही को जाम रखा। संसद में गतिरोध पर भाजपा के शीर्षस्थ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने नाराजगी जताई थी। संसद को जाम रखने और इस नाराजगी में राजनीति निहित हो सकती है, लेकिन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी संसदीय गतिरोध पर नाराजगी के साथ चिंता भी जताई है।
 
ट्रंप: पर्सन ऑफ द ईयर
नरेंद्र मोदी के समर्थक बेवजह निराश हुए। हालांकि उनकी मायूसी को समझा जा सकता है। उन्होंने जोर लगाकर अमेरिकी पत्रिका टाइम के पर्सन ऑफ द ईयर यानी 2016 के वर्ष पुरुष के चयन में अपने नेता को सबसे आगे किया।
 
फिर पाकिस्तान पर निशाना
हर्ट ऑफ एशिया सम्मेलन का मेजबान भारत बना, तो पाकिस्तान घेरे में आया। पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। कहा कि अफगानिस्तान और हमारे क्षेत्र को निशाना बनाने वाले आतंकवादियों पर चुह्रश्वपी से "आतंकवादियों और उनके आकाओं" का मनोबल बढ़ेगा। इसके बाद अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गऩी ने भी पाकिस्तान के खिलाफ मोर्चा खोला। कहा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकवादी घोषित करीब 30 संगठन अफगानिस्तान में अपना आधार जमाने की कोशिश में हैं।
 
गरीब कल्याण का लक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया है कि आयकर कानून में संशोधन का विधेयक लोगों को काले धन को सफेद करने का मौदा देने के लिए नहीं, बल्कि गरीबों के लूटे गए धन को वापस लाने के लिए लाया गया है। सोमवार को लोकसभा में संशोधन विधेयक पेश होने के बाद ऐसी धारणा बनाई गई कि मोदी सरकार ने लोगों को काला धन घोषित करने का एक और अवसर दिया है। ऐसी समझ बिल के दो प्रावधानों से बनी। 8 नवंबर को नोटबंदी की घोषणा के बाद से देशभर में बड़ी संख्या में लोग 500 और 1000 रुपए के पुराने नोटों के रूप में अपना धन बैंकों में जमा करा रहे हैं। संशोधन विधेयक में प्रावधान है कि इस दौरान ढाई लाख रुपए से ज्यादा जमा कराई गई रकम का अध्ययन आयकर अधिकारी करेंगे। शक होने पर वे नोटिस जारी करेंगे।
 
गरीब कल्याण का मुलम्मा?
सरकार ने आय कर कानून में संशोधन का विधेयक पेश किया है। इससे सामने आने वाले काले धन पर कर, उपकर और जुर्माने की कुल रकम बढ़ाने का प्रावधान किया जाएगा। उपलब्ध जानकारियों के मुताबिक इस साल के अंत तक 500 और 1000 रुपए के पुराने नोटों के रूप में ढाई लाख रुपए से ज़्यादा जमा की गई राशि का अध्ययन आय कर अधिकारी करेंगे।