संपादक

राजनीतिक दलों में भ्रम उत्पन्न करता खामोश मतदाता
साल 2018 के अंत तक मध्य प्रदेश समेत छत्तीसगढ़, राजस्थान और मिजोरम में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए न सिर्फ राजनीतिक पार्टियां बल्कि संभावित उम्मीदवारों व स्थानीय नेताओं ने भी अपनी सक्रियता दिखानी शुरु कर दी है।
 
इमरान और कुरैशी जरा सोचें
भारत-पाकिस्तान संबंध सुधरेंगे कैसे ? बातचीत और भेंट तो भंग हो गई और अब दौर चला है, तू-तू---मैं-मैं का। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को म ंै जानता ह।ंू उन्होनं े आतकं वाद को लके र जिस तरह का भाषण सयं क्तु राष्ट ्र सघ्ं ा म ें दिया ह,ै वसै ी आशकं ा मझ्ु ा े नही ं थी। व े अपन े पध्र ानमत्र्ं ाी इमरान खान स े भी आग े निकल गए।
 
समानता के हक में
यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के उदार सामाजिक रुख के अनुरूप है। जिस तरह कोर्ट ने मुंबई के हाजी अली में महिलाओं के प्रवेश की इजाजत दे दी थी, उसी प्रकार अब उसने केरल के संबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को जाने की इजाजत दे दी है।
 
जानकारियां सुरक्षित होने के दावे कितने खरे?
आ धार कार्ड के डाटाबेस की सुरक्षा में सेंध को लेकर आए दिन नए-नए दावे सामने आ रहे हैं और विड़म्बना यह है कि आधार प्राधिकरण इस तरह के दावों को खारिज करने से ज्यादा कुछ नहीं कर पा रहा है। अब हाफिंगटन पोस्ट की तीन माह की पड़ताल के बाद एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आधार का सॉफ्टवेयर हैक किया जा चुका है तथा भारत के लगभग एक अरब लोगों की निजी जानकारियां दांव पर हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार महज ढ़ाई हजार रुपये खर्च कर आसानी से फर्जी आधाार बनाया जा सकता है।
 
ये वर्दी दागदार है ......
पुलिस को देखकर सुरक्षा का एहसास होना चाहिए। लेकिन पुलिस को देखकर आम आदमी खौफ खाने लगे तो समझ लीजिए ये कल्याणकारी सरकार की पुलिस नहीं बल्कि एक अराजक शासन के वर्दी वाले गुंडे हैं। यूपी पुलिस ने जिस तरह से एक पढ़े लिखे नौकरीपेशा नौजवान एपल के मैनेजर विवेक तिवारी की गोली मारकर हत्या की उससे वर्दी की मर्यादा तार-तार हो गई।
 
आजादी ही जिसकी दुल्हन थी - शहीद भगत सिंह
सरदार भगत सिंह जैसा लाल पैदा करने के लिए कितनी ही माताएं दिन रात भगवान से प्रार्थनाएं करती हैं तब कहीं लाखों में से किसी एक विद्यावती को यह सौभाग्य प्राप्त होता है। शहीदे-आजम भगत सिहं भारत माता के एक एसे े सपतू थ े जिन्होनं े बहतु छोटी आय ु म ें ही देश की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। 28 सितम्बर 1907 को पंजाब प्रान्त के लायलपुर जिले के बंगा नामक गांव में भगत सिंह का जन्म हुआ।
 
सुप्रीम कोर्ट की सराहनीय पहल संदर्भ : अदालती कार्यवाही का लाइव प्रसारण होना
देश में शासन-प्रशासन के गैरजिम्मेदाराना रवैये से परेशान आमजन को अगर किसी से उम्मीद होती है तो वो न्यायपालिका ही है। दरअसल चारों तरफ से मायूस होने के बाद न्याय की खातिर व्यक्ति अदालत का दरवाजा खटखटाता है, लेकिन यहां भी उसे तारीखों के सिवाए कुछ हासिल होता हुआ नजर नहीं आता है। बहुत कम मामलों में न्याय मिलता हुआ दिखाई देता है, जिससे यह आरोप लगते रहे हैं कि अमीरों के लिए अलग न्याय होता है और गरीबों के लिए अलग।
 
श्रद्धा भाव से किया जाना ही श्राद्ध है
श्रद्धया इदं श्राद्धम, अर्थात जो श्रद्धा से किया जाये वही श्राद्ध है। श्राद्ध प्रथा वैदिक काल के बाद शुरू हुई और इसके मूल में इसी श्लोक की भावना है। उचित समय पर शास्त्रसम्मत विधि द्वारा पितरों के लिए श्रद्धा भाव से मन्त्रों के साथ जो दान-दक्षिणा आदि दिया जाय वही श्राद्ध कहलाता है।
 
कितना प्रभावी सिद्ध होगा मोदी मंत्र
म ध्य प्रदेश समेत राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में इसी वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में प्रमुख राजनीतिक पार्टियां पूरे दम-खम के साथ अपनी उपस्थिति इन राज्यों में दर्ज कराने में जुटी हुई हैं। इसी तारतम्य में भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के जंबूरी मैदान में ‘कार्यकर्ता महाकुंभ’ का आयोजन किया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री उमा भारती एवं प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान समेत अनेक नेताओं ने शिरकत की। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने मिशन-2018 के लिए हुंकार भरते हुए महाकुंभ में आए लाखों कार्यकर्ताओं को जीत का मंत्र दिया।
 
किसानों के बेजोड़ नेता थे चौ. देवी लाल
भारतीय राजनीति को लगभग सात दशक तक निरन्तर प्रभावित करने वाले चौ. देवी लाल किसानों के बेजोड़ नेता थे। स्वतंत्रता संग्राम के एक साधारण सत्याग्रही से राजनीति का प्रारम्भ करने वाले चौ.देवी लाल ने भारत के उप प्रधान मंत्री का पद दो बार सुशोभित किया।
 
गरीबों के लिए तोहफा साबित होंगी लोकलुभावन योजनाएं?
दे श में जो भी सरकारें आती हैं वो यही वादा करती हुई आती हैं कि समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े अंतिम गरीब व्यक्ति को लाभांवित करने के लिए सत्तारुढ़ हो रही हैं और कार्यकाल पूरा करते हुए यह दावा करती चली जाती हैं कि उनकी लोकहिकारी योजनाओं से करोड़ों गरीब परिवार लाभांवित हुए हैं और आगे भी होते रहेंगे।
 
लाजमी हो गया है देश के चौकीदार पर सवाल उठाना
एक शख्स जब यह कहते हुए सत्ता के शिखर पर आरुढ़ होता है कि वह बतौर प्रधानमंत्री नहीं बल्कि एक चौकीदार के तौर पर कार्य करना चाहता है तो सवाल उठना लाजमी हो जाता है कि उसके रहते हुए बैंकों में जमा धन लेकर आखिर कोई विदेश कैसे भाग सकता है?
 
पह्रश्वपू और गह्रश्वपू की राजनीति
तीन तलाक के विधेयक को कानून का रुप देने के लिए सरकार ने अध्यादेश जारी कर दिया। लोग पूछ रहे हैं कि सरकार को ऐसी क्या जल्दी पड़ी हुई थी कि उसने अध्यादेश जारी कर दिया ? इसी सवाल के साथ लगे हाथ लोग यह भी पूछ रहे हैं कि संघ प्रमुख मोहन भागवत को हिंदुत्व की विचारधारा को पतली करने की जरुरत अभी ही क्यों आन पड़ी ? इसी मौके पर अयोध्या के राम मंदिर पर उन्होंने दो ग्रंथों का विमोचन क्यों किया ?
 
सवा सौ करोड़ देशवासियों की आन बान का मामला
पाक सेना ने बीएसएफ के एक जवान का गला रेत कर उसके शव से खिलवाड़ किया। मानव गरिमा को तार-तार किया। दुनिया के जितने भी मापदंड होते हैं उनकी अनदेखी की। यह पहली बार नहीं था। एलओसी पर पाक सेना ने पहले भी इस तरह की हरकत की है।
 
तीन तलाक मामले में अटक कर रह गई मोदी सरकार
लंबे इंतजार के बाद आखिरकार कैबिनेट ने तीन तलाक वाले अध्यादेश पर मुहर लगा ही दी। इसके बाद अब सत्ता पक्ष खासतौर पर भाजपा कह सकती है कि मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक जैसे दंश से मोदी सरकार ने छुटकारा दिला दिया है।
 
रोजगार का एक बेहतर क्षेत्र है नाविक बनना
अपने वायदे के मुताबिक देश में युवकों के लिए रोजगार सृजित न कर पाने पर विपक्ष की आलोचना की शिकार मोदी सरकार की ओर से एक अच्छी खबर आयी है। केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग, जहाजरानी एवं रसायन तथा उर्वरक राज्यमंत्री मनसुख एल मंडावीया ने घोषणा की है कि देश में नाविकों की संख्या में 60 हजार से भी अधिक बढ़ोतरी हो गई है। उन्होंने कहा कि जहां जहाज संबंधित रोजगारों में केवल 92,000 लोग शामिल थे, अब उनकी संख्या बढक़र 1,54,000 तक पहुंच गई है।
 
एससी/एसटी एक्ट पर बढ़ते विवाद से वर्ग-संघर्ष का खतरा!
देश की आजादी के बाद बने संविधान में समाज के कमजोर समझे जाने वाले वर्ग की सुरक्षा, उनके सामाजिक स्तर पर विकास एवं प्रगतिमय पथ के लिये भारतीय संविधान में कानून बनाकर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के नाम से तमाम सुविधाएं प्रदान की गई , जिसमें इस वर्ग के लिये शिक्षा से लेकर नौकरी तक विशेष आरक्षण की सुविधा एवं इनके साथ किसी भी तरह के भेद - भाव रखने वालों के खिलाफ मुकादमा दर्ज कर दंडित किये जाने का विशेष कानून का प्रवधान किया गया।
 
अन्नदाता की आय सुरक्षित करने की सार्थक पहल
समय पर किसान द्वारा उपजाई फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल पाने के कारण अन्नदाता के सामने कई तरह के सकं ट महुं बाए खड ़े हो जात े ह।ंै एसे े म ें वह न तो बकंै ो ं स े लिया कर्ज समय पर चुका पाते हैं और न ही अगली फसल के लिए वाजिब तैयारी कर पाते हैं। बच्चों की पढ़ाई और शादी भी प्रभावित होते हैं। यदि अन्नदाता के परिवार में कोई सदस्य गंभीर बीमारी से पीडि़त है तो उसका इलाज कराना भी मुश्किल होता है। इन वजहों से उबर नहीं पाने के कारण किसान आत्मघाती कदम उठाने तक को मजबूर हो जाते हैं।
 
अन्याय व अहंकार के विरोध की याद दिलाती शहादत-ए-हुसैन
इन दिनों पूरे विश्व में हजऱत इमाम हुसैन की शहादत को याद किया जा रहा है। मुसलमानों के विभिन्न समुदाय करबला की इस घटना को अपने अलग-अलग अंदाज़ में मना रहे हैं। भारतवर्ष में भी खासतौर पर शिया व दाऊदी बोहरा समुदाय के लोग हजऱत इमाम हुसैन का गम मजलिस, मातम व ताजिय़ादारी का आयोजन कर मनाते आ रहे हैं। पिछले दिनों अशर-ए-मुबारक नाम का एक ऐसा ही आयोजन मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दाऊदी बोहरा समुदाय द्वारा आयोजित किया गया जिसमें बोहरा समुदाय के 53वें धर्मगुरू सय्यैदना मुफद्दल सैफुद्दीन के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शिरकत की।
 
प्रकृति की चेतावनियों से परिपूर्ण है मैंगकूट तूफान
पिछले कुछ दिनों में भारत के केरल राज्य ने भारीवर्षा और बाढ़ के कारण प्राकृतिक आपदा का सामना किया। इस आपदा में तीन सौ से ज्यादा लोग मारे गए जबकि हजारों लोग बेघर हो गए। इसके बाद केरल से खबर आई कि जहां कुछ दिनों तक बाढ़ का आलम था अब वहां सूखे की स्थिति बन रही है! मतलब यह कि प्रकृति अपने स्वभाव के विपरीत क्रिया करती नजर आ रही है।