संपादक

मौलिक या कानूनी अधिकार?
निजता व्यक्ति का मौलिक अधिकार है, या साधारण कानूनी हक? मुद्दा संवैधानिक भावना की रचनात्मक व्याख्या का है। सर्वोच्च न्यायालय के सामने ये सवाल पहले भी दो बार आए। लेकिन वो पचास साल से भी ज्यादा पहले की बात है। 1954 और 1962 में आए उन निर्णयों ने सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि भारतीय संविधान के तहत निजता नागरिकों का मौलिक अधिकार नहीं है।
 
प्रशासनिक सुधार की जरूरत
नौकरशाहों की सेवा शर्तों पर गौर करें तो तबादला कोई दंड नहीं है। लेकिन अक्सर सरकारें इस फैसले का उपयोग ऐसे अफसरों को दंडित करने के लिए करती हैं, जिनसे उनके लिए परेशानी खड़ी होती है। मीडिया में ऐसे अफसरों को नायकत्व प्रदान किया जाता है।
 
इस घुसपैठ का क्या करें?
चीन से आने वाले सस्ते और अच्छे सामानों ने स्थानीय लघु उद्योगों को बंद होने पर मजबूर कर दिया। इससे चीन के सामान घर-घर में घुस गए। अर्थशास्त्रियों ने ध्यान दिलाया है कि दोनों देशों में भले राजनीतिक मतभेद रहे हैं, लेकिन इससे द्विपक्षीय व्यापार पर कभी कोई खास असर नहीं पड़ा।
 
अब अमल की करें गारंटी
संसद का सत्र शुरू होने से ठीक पहले प्रधानमंत्री ने गो-रक्षा के नाम पर हो रही हिंसा के खिलाफ महत्त्वपूर्ण बयान दिया। मॉनसून सत्र के पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में नरेंद्र मोदी ने कहा कि गो-रक्षा के नाम पर कानून को हाथ में लेने की घटनाओं से देश की बदनामी हो रही है।
 
कैसे होंगी सडक़ें सुरक्षित?
यह तो जाना-पहचान तथ्य है कि भारत में सडक़ यात्रा असुरक्षित है। हर साल सवा लाख से ज्यादा लोगों की जान सडक़ हादसों में जाती है। इससे कहीं ज्यादा विकलागं या घायल होत े ह।ंै इन हादसो ं के कर्इ कारण बताए जात े ह।ंै मसलन, सडक़ े ं टूटी-फूटी अवस्था में होती हैं और स्पीड ब्रेकर मनमाने तरीके से बने होते हैं।
 
अमेरिका का अजीब खेल
पांच सुन्नी देशों ने कतर से राजनयिक संबंध तोड़े तो ईरान ने उसके पीछे अमेरिका का हाथ बताया। तब यही माना गया कि इस कार्रवाई का रास्ता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की सऊदी अरब यात्रा से खुला। लेकिन अब उसी अमेरिका ने आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए कतर से समझौता कर लिया है।
 
कोविंद के स्वागत के लिए तैयार रायसीना हिल!
दे श के प्रथम संवैधानिक पद के लिए सोमवार सुबह से मतदान शुरू हो जाएगा। 20 तारीख को नए राष्ट्रपति के निर्वाचन की आधिकारिक घोषणा हो जाएगी। वैसे तो चुनाव की अपनी मर्यादा है। नतीजे सांसदों,विधायकों के मतदान से ही तय होंगे।
 
कब तक गिनेंगे नोट?
उर्जित पटेल के पास हर सवाल को टालने की तरकीब थी। जहां मामला फंस सकता था, यह कह दिया कि गोपनीयता की धारा के तहत वे उस बारे में सूचना नहीं दे सकते। बहरहाल, यह सूचना गोपनीयता के दायरे में नहीं थी कि नोटबंदी के बाद जमा कराए गए पुराने नोटों को गिनने का काम कब पूरा होगा।
 
कभी गरीबों का भोजन रहा बाटी चोखा, अब शाही भोजन की पहचान
कभी अभावग्रस्त पूर्वी उत्तर प्रदेश और पड़ोसी राज्य बिहार के कुछ जिलों के गरीबों का मुख्य भोजन रहा बाटी-चोखा अब बदलते जमाने में शाही लोगों का पसन्दीदा भोजन बनता जा रहा है।
 
सुधार का सही मौका
स्वागत-योग्य है कि केंद्र ने पशु हत्या और बिक्री पर रोक से संबंधित अधिसूचना पर जिद्दी रुख नहीं अपनाया। सुप्रीम कोर्ट में अटार्नी जनरल ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों से आई प्रतिक्रिया को ध्यान में रखते हुए सरकार उस अधिसूचना पर पुनर्विचार कर रही है।
 
सवाल तो वाजिब ह
लोकतंत्र के लिए निर्णायक महत्त्व की निर्वाचन आयोग जैसी संस्था में नियुक्ति की कोई वैधानिक प्रक्रिया आज तक देश में नहीं बनी, तो पारदर्शिता के प्रति यह अपने सत्ताधारियों की लापरवाही की ही मिसाल कहा जाएगा। भारतीय संविधान ने ये अपेक्षा जताई थी कि संसद निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए ठोस प्रावधानों से युक्त कानून बनाएगी।
 
भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग बिना भेदभाव के हो
वक्त का पहिया कैसे घूमता है ये लालू प्रसाद यादव से बेहतर कौन जानता होगा। एक वक्त था जब लालू प्रसाद यादव देश के सबसे ताकतवर नेताओं की जमात में शामिल थे। नब्बे के दशक वे जहां भी जाते थे उनको सुनने,देखने वालों की अच्छी खासी तादाद होती थी। संसद में बोलते थे तो उनका मुखर आलोचक भी बिना उनको सुने और उनकी व्यंग्यात्मक शैली पर ठहाका लगाए बिना नही राह सकता था।
 
विधि आयोग की सही सलाह
अपने देश में प्रगतिशील कानूनों की कमी नहीं है। लेकिन उन भावना के मुताबिक उन सब पर अमल भी होता है, ये कहना कठिन है। कम-से-कम ऐसे कानूनों पर तो नहीं ही होता, जो विवाह या पारिवारिक मामलों को विनियमित करने के लिए बनाए गए।
 
इतना बेखौफ़ पाकिस्तान!
पाकिस्तान बेखौफ है। एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर के मुताबिक पिछले साल भारत की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद उसने भारतीय सीमा के उल्लंघन की घटनाएं बढ़ा दीं। अब उसने सीधे अमेरिका को चुनौती दी है। अमेरिका ने हाल में हिज्बुल मुजाहिदीन के मुखिया सलाहुद्दीन को अपनी अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी की सूची में डाल दिया।
 
संबंधों का सामने आना
भारत-इजराइल संबंधों में बेशक यह ऐतिहासिक मौका है। पहली बार कोई भारतीय प्रधानमंत्री इजराइल की जमीन पर कदम रखने जा रहा है। इस रिश्ते पर विशेष ध्यान देने का ही परिणाम है कि नरेंद्र मोदी ने तेल अवीव और यरुशलम की यात्रा के साथ फिलस्तीन जाने का कार्यक्रम नहीं बनाया।
 
प्रणब बाबू के प्रवचन
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी अपने कार्यकाल के आखिरी दिनों में हैं। तीन हफ्ते बाद उनकी राष्ट्रपति भवन से विदाई होगी। अक्सर राष्ट्रपति अपने पीछे कोई विरासत या अपने ऐसे कार्य छोड़ जाते हैं, जो आगे चलकर उदाहरण बनते हैं।
 
सबको साथ लेने का वक्त
यह तो साफ है कि नेपाल की बहुसंख्यक जनता ने स्थानीय चुनाव के प्रति उत्साह दिखाया। इससे इनका बहिष्कार करने का मधेशी संगठनों का इरादा कमजोर पड़ा।
 
बारिश से न हो जाम की त्रासदी
बा रिश का मौसम आ जाये तो मन किन किन कोनों में रमता है किसी युवा से पूंछिये। उस किसान से पूंछिये जिसकी जमीन महीनों से ह्रश्वयासी, बस आसमान को निहार रही होती है। भीषण गर्मी से हाल बेहाल मेहनतकश लोगों से पूंछिये जो यही कामना करता है कि काश घटा उमड़े और बादल बरसकर उसके तनमन को ठंड का एहसास करा जाए।
 
एयर इंडिया का क्या करें?
एयर इंडिया भारत सरकार का बड़ा सिरदर्द है। दशकों से ये कंपनी कर्ज में डूबती गई है। कई बार इसे राहत पैकेज दिए गए। लेकिन बात बनी नहीं। कुछ वर्षों में कर्ज की मात्रा घूम-फिर कर बेहद ऊंचे स्तर पर पहुंच जाती है। इस बारे में एयर इंडिया के अपने तर्क हैं।
 
चीन की गंभीर चुनौती
चीन की ताजा चुनौती को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। सिक्किम में उसने घुसपैठ की। भारतीय सेना के दो बंकरों को तबाह कर दिया। बताया जाता है कि वहां काफी देर तक भारतीय और चीनी सेना का आमना-सामना रहा। हैरतअंगेज है कि उसके बाद चीन ने भारत से औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।