संपादक

निपाह वायरस से करें बचाव
पिछले कुछ दिनों से निपाह वायरस के चलते तकरीबन दो दर्जन लोगों की मौते होन े स े लोग डर हएु ह।ंै निपाह वायरस चमगादडो़ ं की लार स े फै लता ह।ै चमगादड ़ (बैट) जब किसी फल के संपर्क में आते हैं तो यह वायरस उन फलों में भी आ जाता है।
 
मौत का पर्याय बना निपाह वायरस
केरल के कोझिकोड जिले में रहस्यमय और बेहद घातक निपाह वीषाणु की चपेट में आकर 10 लोगों की मौत हो गई और छह की हालत नाजुक बनी हुई है। इस वीषाणु की चपेट में आए 25 रोगियों को विशेष निगरानी के लिए आईसीयू में रखा गया है।
 
आदर्श पत्रकार थे पंडित नेहरू
पंडित जवाहर लाल नेहरू के अनेक सहयोगियों का यह मत रहा कि अगर भारत के प्रथम प्रधान मंत्री राजनीति में पूरी तरह से सक्रिय न होते वे अपने जीवन का बड़ा भाग प्रधान मंत्री निवास में नहीं, किसी बड़े दैनिक पत्र के सम्पादक के रूप में बिताते।
 
कलयुग के यह उपदेशक...
हमारे देश में उपदेशकों की गोया बाढ़ सी आई हुई है। धर्म क्षेत्र से लेकर राजनीति के क्षेत्र तक हर जगह ‘मुफ्त’ में ही ज्ञान उंडेला जा रहा है। और इस ज्ञान वर्षा का परिणाम क्या है यह बताने की ज़रूरत भी नहीं है।
 
प्रदूषण रोकने, हिंसक प्रदर्शन और पुलिस गोलीबारी का औचित्य
एक फैक्ट्री से रहवासी इलाके में इस कदर प्रदूषण फैलता है कि स्थानीय लोग महीनों प्रदर्शन करने पर मजबूर हो जाते हैं, लेकिन जब उनकी सुनवाई नहीं होती तो मांगकर्ता प्रदर्शनिकारी हिंसा पर उतारु हो जाते हैं। वहीं दूसरी तरफ अधिकांश मामलों में मूकदर्शक बनी रहने वाली पुलिस भी हिंसक भीड़ को काबू करने के नाम पर इस कदर गोलीबारी करती है कि लोगों को जलियांबाला बाग की याद ताजा हो आती है।
 
केरल में निपाह का प्रकोप
केरल में एक नई बीमारी का आतंक है। ये रोग निपाह नाम के वायरस से फैल रहा है। निपाह वायरस पशुओं से मनुष्य में फैलता है। इससे पशु और मनुष्य दोनों गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं। इस विषाणु के स्वाभाविक वाहक चमगादड़ हैं।
 
जैव विविधता भारत की धरोहर है
जि स तरह से आज पूरी दुनिया वैश्विक प्रदूषण से जूझ रही है और कृषि क्षेत्र में उत्पादन का संकट बढ़ रहा है, उस परिप्रेक्ष्य में जैव विविधता का महत्व बढ़ गया है। लिहाजा हमें जहां जैव कृषि सरंक्षण को बढ़ावा देने की जरूरत है, वहीं जो प्रजातियां बची हुई हैं, उनके भी सरंक्षण की जरूरत है। क्योंकि आज 50 से अधिक प्रजातियां प्रतिदिन विलुप्त हो रही हैं। यह भारत समेत पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है।
 
लोकतंत्र के लिए कड़े फैसले जरूरी
कर्नाटक के नाटक का अंत हो गया। भाजपा के लिए दुखांत तो कांग्रेस-जेडीएस के लिए इससे बड़ा सुखान्त क्या हो सकता था। लेकिन जनता के लिए (धुर समर्थकों को छोड़ दें) ये क्या था? आम जनता शायद ठगा ही महसूस कर रही होगी। ये कैसा लोकतंत्र है जहां जुगाड़ जीतता है। भला हो सुप्रीमकोर्ट का वरना लोकतंत्र के चीरहरण की विधिवत तैयारी हो गई थी।
 
यरुशलम में अमेरिकी दूतावास
राइल का इंतजार खत्म हुआ। वो वक्त आ गया, जिसका वह पिछले कई महीनों से इंतजार कर रहा था। तब से, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने यरुशलम में अमेरिकी दूतावास खोलने का एलान किया था। करीब 800 मेहमानों की मौजूदगी के बीच यरुशलम में अमेरिकी दूतावास का उद्घाटन हुआ।
 
अपने शरीफाना बयान पर कितना कायम रहेंगे शरीफ
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का सियासी सफर काफी उथल-पुथल वाला रहा है। इसे देखते हुए कहना पड़ता है कि संभवत: पाकिस्तान ही नहीं बल्कि अन्य लोकतांत्रिक देशों में भी ऐसा उदाहरण आज तक देखने को नहीं मिला होगा कि एक शख्स को प्रधानमंत्री के पद से दो-दो बार पद्च्युत किया गया हो और वह लगातार लड़ाई लड़ते हुए आगे बढऩे की जीतोड़ कोशिश कर रहा है।
 
खुदरा कारोबार को ध्वस्त कर देगा यह सौदा
कठोपनिषद में मत्स्य न्याय का वर्णन है। मत्स्य न्याय का मतलब होता है, समुद्र में बड़ी मछली छोटी को निगल जाती है। मत्स्य न्याय केवल समुद्र में ही नहीं होता, आज की नवउदारवादी आर्थिक नीतियों के दौर में बाजार में भी होता है। खुदरा कारोबार की दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी वॉलमार्ट ने हमारे देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट को खरीद लिया।
 
शांति में ही मिलेगा ईश्वर, अल्लाह और वाहे गुरु
पू जा, इबादत, नमाज कोई भी नाम दें। ईश्वर, अल्लाह या वाहे गुरु जिस नाम से हमारी आस्था हो हम पुकारें। लेकिन इस सच्चाई से भला कौन इंकार करेगा कि इस सृष्टि का नियंता एक है। सबका मालिक एक है। जहां विज्ञान की दृष्टि कमजोर पडऩे लगती है। हमारी धार्मिक आस्थाएं वहां भी अंधेरे से बाहर निकलने का रास्ता खोज लेती हैं।
 
विकासशील देशों पर भी होगा ट्रंप के फैसले का विपरीत असर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी कार्यशैली के लिए दुनिया में एक अलग पहचान बना चुके हैं। प्रारंभ से विवादों में रहने के शौकीन ट्रंप को जो भाता है वो वही करते हैं, साथ ही वो ऐसे निर्णय भी लेते हैं जो उनसे पहले की सरकारों के फैसलों को पलटता हो। ऐसे मसौदे जिन्हें पहले कभी अमेरिका की पूर्व सरकारों ने देश और दुनिया के हित के मद्देनजर लागू किया, उन फैसलों को भी पलटने से वो गुरेज नहीं कर रहे हैं।
 
प्रदेश पुलिस को बल
सुप्रीम कोर्ट ने कठुआ सामूहिक बलात्कार और हत्या मामले की सुनवाई पर लगी रोक हटा ली। उसके बाद उसने मामले को जम्मू-कश्मीर से बाहर पंजाब के पठानकोट की अदालत में ट्रांसफर कर दिया। इस पर जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की महत्त्वपूर्ण प्रतिक्रिया आई।
 
धार्मिक विरासत की अवहेलना
रणथंभौर के सबसे पुराने गणेश मंदिर की चौखट तक आने में आम गणेश भक्त आज भी दसवीं सदी की ही तकलीफें झेल पुराने रीति-रिवाज निभाने में अघाते नहीं दिखते हैं। क्योंकि गजानन भी इससे अनजान नहीं कि अपने इष्ट का दरस पाने में भक्त अपने धीरज की कोई भी परीक्षा देने को तैयार रहता है।
 
वाक्या-ए-पत्थरगढ़ी : आदिवासियों की जागृति को सलाम....!
दे श के आधा दर्जन आदिवासी बहुल राज्यों में अपने अधिकारों की रक्षा तथा राजनीतिक शोषण से मुक्ति के लिए आदिवासी वर्ग जागृत हो गया है, इन राज्यों में छत्तीसगढ़, झारखण्ड और राजस्थान के साथ हमारा अपना मध्यप्रदेश भी शामिल है, इन राज्यों में आदिवासियों ने अपने शोषण तथा संवैधानिक अधिकारों को लेकर आवाज बुलंद की है तथा कुछ जिलों में तो सरकारी पंचयतों के समानांतर अपनी पंचायतें गठित कर ली है
 
फिर से वही चिंता
ताज महल की रंगत को लेकर फिर वही चिंता उठी है, जो हम पिछले कई दशकों से सुनते आ रहे हैं। बताया गया है कि ताज महल पर धीरे धीरे कहीं हरे रंग तो कहीं पीले और काले रंगे के साए उभर रहे है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने फिर से चिंता जताई है। पिछले हफ्ते अदालत में जज ने अधिकारियों से कहा कि आप सब लोग बेबस नजर आ रहे है।
 
धधकते खेत और बढ़ता प्रदूषण चिंतनीय
नासा की ताजा तस्वीरें भारतीयों को जरूर चौंका रही होंगी लेकिन सरकारी तंत्र को नहीं। दरअसल ये जंगल नहीं कई राज्यों में धधकते खेतों की हकीकत है। गेहूं कटने के बाद बचे ठूठों और धान की बाली से दाना निकालने के बाद बचे पुआल जिसे पराली या कहीं पइरा भी कहते हैं को जलाने का नया रिवाज शुरू हो गया है।
 
प्रजातंत्र के तीनों स्तंभों को अपने कब्जे में रखने को आतुर सरकार..!
अ ब धीरे-धीरे यह रहस्य उजागर होने लगा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बीच जिम्मेदारियों का जो बंटवारा हुआ है, उसके तहत अमित भाई शाह ने पूरे देश पर ‘‘चक्रवर्ती राजा’’ की तरह अपनी सरकारें स्थापित करने की जिम्मेदारी ली है,
 
पं. नेहरू को भुला देने के प्रयास में मोदी!
इस आजाद देश के पहले और लगातार सोलह साल साढ़े दस महीने प्रधानमंत्री के रूप में स्वतंत्र भारत पर राज करने वाले स्व. पण्डित जवाहरलाल नेहरू के बताए गए मार्ग पर यह देश लगभग सड़सढ साल चला, किंतु 2014 में देश के राष्ट्रीय क्षितिज पर उभरें नरेन्द्र मोदी नामक धूमकेतु ने पिछले चार सालों में हर स्तर पर स्व. पण्डित नेहरू को विस्मृत करवाने का प्रयास किया और वह प्रयास आज भी जारी है, फिर वह चाहे नीतियों के स्तर पर हो या शासन संचालन के स्तर पर या कि नेहरू जी के व्यक्तित्व के स्तर पर।