संपादक

14 वर्षों से प्रदेश शिशु मृत्यु दर में अग्रणी, आत्मचिंतन जरूरी !
राजा प्रजा का पालक होता है और जैसा राजा वैसी प्रजा। ये कहावत पुरानी जरूर हो गयी पर इनमे बहुत गहरे अर्थ छिपे है। प्रजातंत्र में राजा जनता पर निर्भर होता भी हैं और होता ही हैं। पर वर्तमान परिप्रेक्ष्य में राजा जब अधिक दिनों तक सत्ता में रह जाता हैं तो उसे अहसास होता हैं की राज्य शांति से चल रहा हैं और होता भी हैं कारण बहुत दिनों का शासक निर्भीक होकर शासन करता हैं और उसे इतने अधिक सहायक हो जाते हैं जैसे निज़ाम के यहाँ उसकी पांच सौ औरतें थी उसे खुद नहीं पता था की कौन कौन उसकी औरतें थी।
 
धोखा या हम धोखे में?
चीन भारत को धोखा दे रहा है या भारतवासियों को धोखे में रखा गया? खबर यह है कि डोकलाम के पास चीन ने अपने जवानों की तैनाती बढ़ा दी है। पिछले जून के मध्य से ढाई महीनों तक भारत-भूटान-चीन सीमा पर मौजूद इस जगह पर गतिरोध चला था। विवाद उस क्षेत्र में चीन के सडक़ बनाने से शुरू हुआ था।
 
ये आईबी का काम!
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने वॉक फ्री फाउंडेशन (डब्लूएफएफ) नामक एनजीओ से मिल कर पिछले महीने आधुनिक गुलामी पर एक वैश्विक रिपोर्ट जारी की। ये रिपोर्ट पिछले कई सालों से जारी हो रही है। इसमें कोशिश दासता को आधुनिक अर्थों में समझने का है। जैसे हर प्रवृत्ति या प्रथा का अर्थ युग के साथ बदलता है, वही बात गुलामी पर भी लागू होती है।
 
टूट के कगार पर स्पेन?
स्पे‍न का संकट बढ़ गया है। रविवार को कैटेलोनिया प्रांत में अलगाव के मुद्दे पर आयोजित जनमत संग्रह को रोकने की जैसी कोशिश स्पेन सरकार ने की, उससे मामला शांत होने के बजाय और सुलग गया। स्पेन सरकार ने पहले ही जनमत संग्रह को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। इसके बावजूद कैटेलोनिया प्रशासन इस पर कायम रहा। हिंसा के बीच हुए जनमत संग्रह हुआ।
 
मूंदहू आंख कतहूं कछु नहीं!
पिता को बेटे ने जवाब दिया (चर्चा है कि दिलवाया गया)। यशवंत सिन्हा ने कहा कि देश की बदहाल होती अर्थव्यवस्था के बारे में वे नहीं बोलेंगे, यह उनका अपने "राष्ट्रीय कर्त्तव्य" से चूकना होगा। तो अगले दिन उनके बेटे- केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने टाइम्स ऑफ इंडिया में लेख लिख कर जवाब दिया। जयंत सिन्हा के लेख का सार है कि सब ठीक-ठाक है। देश तेजी से प्रगति कर रहा है।
 
जड़ से ख़त्म करो रैगिंग का रोग
रै गिंग की वजह से गलगोटिया कॉलेज में एक छात्र का डिप्रेशन का शिकार होना और मौत को गले लगाना अफसोसजनक खबर है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश और स्पष्ट गाइड लाइन के कई साल बाद भी इस तरह की खबरें आना दु:खद भी है और आश्चर्यजनक भी।
 
अस्थिरता की गहराई आशंका
इराक के तेल समृद्ध किरकुक इलके में रहने वाले कुर्दों के विशाल बहुमत ने स्वतंत्र दश्े ा के निमाणर्् ा के पक्ष म ें मतदान किया। उस क्षत्र्े ा म ें कर्दु पार्टी का शासन ह,ै जिसन े वहा ं जनमत सगं ह्र आयोजित किया। वोट डालने वाले 33 लाख लोगों में से 92 फ़ीसद ने अलगाव का समर्थन किया।
 
राहुल गांधी इतने अहम क्यों?
भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में बेशक मुख्य एजेंडा आगामी चुनावों की तैयारी था। लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि पार्टी नेतृत्व ने राहुल गांधी पर हमला बोलने को इस तैयारी की खास रणनीति बनाया। कांग्रेस उपाध्यक्ष पर निशाना साधने की जिम्मेदारी खुद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने संभाली।
 
ये तरीका क्या है?
क्या‍ उत्तर प्रदेश सरकार चाहती है कि वहां कोई समुदाय किसी भी तरह की अपनी मांग ना उठाए? क्या हर तरह के विरोध से निपटने का एकमात्र तरीका उसे दमन ही नजर आता है? वरना बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में छात्राओं पर लाठीचार्ज क्यों होता? शनिवार रात पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राओं पर लाठियां चलाईं, जिसमें कई छात्राएं घायल हुईं। मौके पर सुरक्षा बलों की जबरदस्त तैनाती है। गौरतलब है कि बीएचयू का ये आंदोलन राजनीतिक नहीं है।
 
"हैवान" से कैसे संबंध?
संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि पाकिस्तान हैवानियत की हदें कार कर बेगुनाहों की हत्या कराता है। कमसे- कम भारत में पाकिस्तान के ऐसे चित्रण पर किसी को आश्चर्य या एतराज नहीं होगा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहित खाकन अब्बासी ने महासभा में अपना भाषण भारत और कश्मीर पर केंद्रित रखा था।
 
कृत्रिम जीवन के खिलाफ
ये फैसला ब्रिटेन में आया, लेकिन उससे अपने देश में भी एक जरूरी बहस को गति मिल सकती है। ब्रिटिश अदालत ने निर्णय दिया कि किसी जानलेवा बीमारी के कारण मरणासन्न मरीज से लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाने के लिए आगे से न्यायालय की अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी।
 
चुने उसे जो आकाओं की नहीं, आपकी बात करे
गु डगांव नगर निगम चुनाव आज होने हैं। किसी भी मुद्दे पर संवाद करने से पहले मैं अपील करना चाहता हूं कि बड़ी संख्या में घरों से निकलकर मतदान करें। यह आपके नगर,आपके मोहल्ले की दिशा तय करने का प्रश्न है। अगले पांच साल अपने गिले शिकवे-समस्याएं किसे हम सहजता से सुना सकते हैं।
 
ये है अपना विकास!
उद्घाटन से कुछ ही घंटे पहले बिहार में एक बांध का टूट गया। इससे जुड़े तथ्यों पर गौर कीजिए। ये डैम भागलपुर जिले के कहलगांव में बन रहे उस बटेश्वर गंगा पंप कैनाल प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसे 1977 में योजना आयोग की मंजूरी मिली थी। तब इस पर 14 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान लगाया गया था।
 
परले दर्जे का पक्षपात
तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष पी. धनपाल ने पहले दर्जे का पक्षपात भरा व्यवहार किया। दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधानों पर गौर करें, तो उनके इस व्यवहार का कोई औचित्य नजर नहीं आएगा। विधानसभा अध्यक्ष ने दिनाकरण गुट के 18 विधायकों की सदस्यता इसी कानून के तहत रद कर दी। ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कडग़म (एआईएडीएमके) के ये विधायक शशिकला के समर्थक थे। यह गुट मुख्यमंत्री ई. पलानीस्वामी और उप-मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम का विरोध कर रहा है।
 
चुनौती औचित्य सिद्ध करने की
रोहिंग्या मुद्दे पर एनडीए सरकार ने सामान्य से हटकर रुख लेने का साहस दिखाया है। म्यामांर से आए से आए ये शरणार्थी भारत की सुरक्षा के लिए खतरा हैं- ये बात उसने औपचारिक रूप से सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने हलफनामे में कही है।
 
दहशतगर्दी का सियासी चेहरा
पाकिस्तान के इस घटनाक्रम पर भारत को अवश्य निगाह रखनी चाहिए। ठोस संकेत हैं कि पाकिस्तान की सेना ने रणनीतिक मकसदों के लिए आतंकवाद का इस्तेमाल जारी रखने का एक नया तरीका अपनाया है। वह आतंकवादी समूहों से संबंधित पार्टियों को देश की राजनीति में बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है।
 
सरदार सरोवर का समर्पण
आलोचकों ने कहा है कि गुजरात विधानसभा चुनाव के मद्देनजर वहां विकास का कथानक प्रस्तुत करने के लिए नरेंद्र मोदी इतने बेसब्र हैं कि उन्होंने पितृपक्ष का भी ख्याल नहीं रखा। भारतीय जनता पार्टी को हिंदू मान्यताओं से चलने वाला दल समझा जाता है। मगर मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन की नींव श्राद्धकाल में डाली गई।
 
संबंधों का बहु-आयामी दायरा
प्रधानमंत्री शिंजो आबे की यात्रा ने भारत-जापान संबंधों में नए आयाम जोड़े। अब तक आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग दोनों देशों के संबंधों का आधार था। लेकिन अब रक्षा और सुरक्षा में सहयोग भी उतना ही अहम हो गया है। संबंधों में जुड़े नए आयामों के पीछे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में उभरते नए समीकरणों की खास भूमिका है।
 
मेजबानी का आकर्षण घटा?
ओलिंपिक खेलों की मेजबानी 2024 के लिए पेरिस और 2028 के लिए लॉस एंजिल्स को मिली है। लेकिन ध्यान इस बात ने खींचा कि मेजबानी पर दावा जताने सिर्फ ये शहर ही होड़ में थे। दोनों 2024 की मेज़बानी चाहते थे।
 
विषमता की बढ़ती खाई
थॉमस पिकेटी दुनिया में जाना-माना नाम हैं। इस पर लगभग सहमति है कि 2013 में आई उनकी किताब ‘कैपिटल इन ट्वेन्टीफर्सट सेंचुरी’ ने दुनिया भर में बढ़ती आथिर्क गरै -बराबरी पर नर्इ समझ पद्र ान की। लेि कन तब पिके टी न े भारत के बार े म ें ज्यादा कछु नही ं बताया था। इस बार े म ें पछू न े पर उन्होनं े कहा था कि भारत म ें आंकड़ों का घोर अभाव है।