Breaking News
भाजपा ने महज 10 महीने में कांग्रेस से हथिया ली दो राज्यों की सत्ता   |  अवैध रूप से सीएंडडी वेस्ट डंपिंग करने वालों पर की जा रही है कार्रवाई  |  कोराना (कोविड-19) से स्वच्छता, सतर्कता व जागरुकता ही बचाव : नरेश नरवाल  |  आज का देश की महिलाओं व हमारी बच्ची के लिए ऐतिहासिक दिन है : बजरंग गर्ग  |  कोविड 2019 संक्रमण को फैलने से रोकने के उपायों के बारे में आम जनता को ज्यादा से ज्यादा जागरूक करें : उपायुक्त  |  संदिग्ध मरीजों के लिए गुरुग्राम जिला में 22 आइसोलेटिड वार्ड तथा 4 क्वारंर्टाइन सुविधा बनाई गई  |  स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा संक्रमण से बचने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है  |  भाजपा ने प्रदेश पदाधिकारियों तथा प्रदेश मोर्चा अध्यक्षों की घोषणा की   |  
जापान से परमाणु समझौते का अर्थ
अमेरिका से असैनिक परमाणु सहयोग समझौते को अमल पर लाने की कोशिश में भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से दो महत्त्वपूर्ण लिखित वादे किए थे। एक यह कि भारत कभी अपनी तरफ से किसी देश पर परमाणु हमला नहीं करेगा।
 
नोटबंदी से होगा गरीबों का भला?
प्र धानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर की आधी रात से 500 और 1000 के नोट पर प्रतिबंध लगाने का एलान किया। प्रधानमंत्री जिस वक्त यह एलान कर रहे थे देश के करोड़ों लोग टेलीविजन सेट से चिपके हुए थे। लोग तरह तरह की आशंकाओं से ग्रस्त थे। पता नहीं क्या होने वाला है।
 
अब काला धन खत्म?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करने के फैसले को खास समर्थन मिला है। परेशानी झेल रहे लोग भी आम तौर पर इसे अच्छे मकसद से उठाया गया कदम बता रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि इससे काले धन की बुराई पर काबू पाने में मदद मिलेगी।
 
जोखिम भरा, पर साहसी
नरेंद्र मोदी सरकार ने साहसी कदम उठाया है। ऐसा जिसमें एक बड़ा राजनीतिक जोखिम भी है। काला धन पर नियंत्रण के उसके इरादे की देश के बड़े हिस्से में बेशक तारीफ होगी, लेकिन 500 और 1000 रुपए के नोटों को अचानक बंद करने से जो अफरा-तफरी मची है, उसका परिणाम अभी अनिश्चित है। तात्कालिक असर सिर्फ काला धन रखने वाले लोगों पर ही नहीं, बल्कि आबादी के ज्यादातर हिस्सों पर पड़ा है।
 
तो अब दुविधा क्या?
कांग्रेस कार्यसमिति की सोमवार को हुई बैठक में यह साफ हो गया कि पार्टी अब राहुल गांधी के नेतृत्व में चलने को तैयार हो गई है। खास बात यह रही कि बुजुर्ग नेताओं ने राहुल गांधी से नेतृत्व संभालने का अनुरोध किया। बताया गया कि सोनिया गांधी बीमार हैं, इसलिए बैठक की अध्यक्षता राहुल गांधी ने ही की। यानी पार्टी की सर्वोच्च नीति निर्धारण संस्था ने इस सिफारिश के साथ ही राहुल के कांग्रेस अध्यक्ष पद संभालने का रास्ता तैयार कर दिया है।
 
गुलाम हैदर ने पहचाना था लता की प्रतिभा को
लता मंगेशकर के सिने करियर के शुरूआती दौर में कई निर्मातानिर्देश क और संगीतकारों ने पतली आवाज के कारण उन्हें गाने का अवसर नहीं दिया लेकिन उस समय एक संगीतकार ऐसे भी थे, जिन्हें लता मंगेशकर की प्रतिभा पर पूरा भरोसा था और उन्होंने उसी समय भविष्यवाणी कर दी थी Þयह लडक़ी आगे चलकर इतना अधिक नाम करेगी कि बड़े से बड़े निर्माता-निर्देशक और संगीतकार उसे अपनी फिल्म में गाने का मौका दंगे। यह संगीतकार थेÞ गुलाम हैदर।
 
जिंदगी में जहरीली हवा घोलने की साजिश
आं खों में जलन हो रही हैं। सर में दर्द है। उलझन हो रही है। हर सांस लेने में इतनी मुश्किल मानो एक एक सांस का टैक्स वसूला जा रहा है। आओ गरीब भाइयों लौट चलें अपने गांव अपने देश। ये सवाल तमाम बेबस नागरिकों की जुबान पर है। दिल्ली-एनसीआर बेहाल हैं। देश की राजधानी प्रदूषण की राजधानी बन गई है। यहां तो हवा भी साफ़ नहीं रही। साफ़ नहीं बल्कि जहरीली है। कहीं ये बड़ी साजिश का हिस्सा तो नहीं।
 
पार्टियां ‘राजनीति’ क्यों न करें?
फर्ज कीजिए। राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) मामले में आत्म-हत्या करने वाले पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल के परिवार से सामान्य ढंग से मिल लेने दिया जाता। तो उससे क्या होता? क्या भूचाल आता? देश ग्रेवाल की खुदकुशी की खबर सुनकर दुख में डूबा था। राहुल या केजरीवाल की उनकी परिवार से मुलाकात एक-दो घंटे की सुर्खी होती।
 
पुलिस मुठभेड़ पर राजनीति क्यों?
पुलिस मुठभेड़ पर फिर राजनीति गरमाई हुई है। भोपाल जेल से भागने वाले आतंकी आरोपियों को ले कर जितनी बहस हुई है उसमें यह कोर सवाल अनछुआ है कि भारत में हमेशा क्यों हर पुलिस मुठभेड़ विवादास्पद रही है? दूसरा सवाल है कि क्यों मुस्लिम आतंकी आरोपी की मुठभेड़ ही राजनैतिक रंग पाती है? तथ्य है कि भोपाल की मुठभेड़ से ठीक पहले ओडिशा में पुलिस-नक्सली मुठभेड़ हुई थी। उसमें दो दर्जन नक्सली मारे गए।
 
नीतिश: मंडल ह्रश्वलस की पॉलिटिक्स
पिछले साल बिहार विधानसभा के चुनाव के दौरान लालू प्रसाद यादव ने मंडल2 को अपना प्रमुख एजेंडा बनाया था। उसका निहितार्थ था- दलित, आदिवासी और ओबीसी जातियों के लिए निजी क्षेत्र में आरक्षण की मांग उठाना। मगर चुनाव में नीतीश-लालू-कांग्रेस गठबंधन की जीत के बाद यह नारा फिर सुनने को नहीं मिला। मगर अब नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) ने "मंडल ह्रश्वलस" का एजेंडा अपनाने के संकेत दिए हैं।
 
न्यूजीलैंड का बदला रुख?
भारत यात्रा पर आए न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री जॉन की ने कहा कि परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत की सदस्यता के मुद्दे पर जल्द फैसला हो, इसके लिए उनका देश रचनात्मक भूमिका निभाएगा। इसे भारतीय मीडिया के एक हिस्से ने भारत के रुख का समर्थन बताया। क्या यह सही व्याख्या है? निर्णय भारत के पक्ष में हो, ऐसी कोई बात न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री ने नहीं कही। बल्कि ऐसा कूटनीतिक बयान दिया, जिसे अति-आशावादी भारतीय ही अपने पक्ष में कही गई बात मान सकते हैं।