संपादक

बत्ती नहीं, सोच वीआईपी
वीआईपी कल्चर सिर्फ लाल बत्ती तक ही सीमित नहीं है। दरअसल यह अतिविशिष्ट संस्कृति का हिस्सा ही नहीं है। भारत कई अंतर्विरोधों का देश है। यदि एक ओर त्याग और बलिदान है, तो दूसरी तरफ सत्ता की भूख और अपनी अमीरी के अहंकार का प्रदर्शन भी खूब है। मुद्दा विधायक, सांसद, मंत्री, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति के सरकारी या निजी वाहनों पर चिपकी लाल या नीली बत्ती का नहीं है।
 
घंटी भी बजे, अजान भी हो
मं दिर की घंटी और मस्जिद से अजान की आवाज कभी विवाद का विषय बन सकती है,कभी मन में नही आया। पूजा भले ही मंदिर में करते रहे हों लेकिन मस्जिद, गुरुद्वारा या चर्च जो भी सामने दिखा सर श्रद्धा भाव से अपने आप झुक जाता था।
 
चीन ने चुनौती बढ़ाई
चीन प्रत्यक्ष रूप से भारत से तनाव बढ़ाने के रास्ते पर है। तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा की अरुणाचल प्रदेश यात्रा के हफ्ते भर के अंदर उसने इस राज्य पर अपना दावा ठोकने की चाल चली है। चीनी विश्लेषकों ने इसे भारत को "करारा" जवाब देना बताया है।
 
इन्हे भारत की नहीं अपनी फिक्र है
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मैलकम टर्नबुल पिछले हफ्ते भारत आए, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी खूब दोस्ती छलकी। दोनों ने साथ-साथ नई दिल्ली में मेट्रो ट्रेन में यात्रा की, अक्षरधाम मंदिर देखा और सेल्फी ली। लेकिन अपने देश लौटते ही भारत के प्रति टर्नबुल का ये प्रेम काफूर हो गया। मंगलवार को उन्होंने 95,000 से अधिक विदेशी कर्मचारियों द्वारा उपयोग किए जा रहे वीजा कार्यक्रम को खत्म कर दिया। इन विदेशी कर्मचारियों में ज्यादातर भारतीय हैं। इस वीजा कार्यक्रम को 457-वीजा के नाम से जाना जाता है।
 
बड़ा इरादा, कठिन राह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दवा कंपनियों और डॉक्टरों की मिलीभगत को तोडऩे का इरादा जताया है। जाहिर है, इसका चौतरफा स्वागत किया जाएगा। उनकी इस घोषणा से राहत महसूस की जाएगी कि सरकार ऐसा कानून बनाएगी, ताकि डॉक्टर नुस्खा लिखते वक्त ब्रांडेड के बजाय जेनरिक दवाएं लिखें। प्रधानमंत्री ने कहा- ‘डॉक्टर इस तरह से पर्चे पर लिखते हैं कि गरीब लोग उनकी लिखावट को नहीं समझ पाते और लोगों को निजी स्टोर से अधिक कीमत पर दवाएं खरीदनी पड़ती हैं।’ उन्होंने आगे कहा- ‘हम एक ऐसा कानूनी ढांचा लाएंगे जिसके तहत डॉक्टरों को पर्चा ऐसे लिखना होगा जिससे मरीज जेनेरिक दवाएं खरीद सकें और उसे कोई अन्य दवा नहीं खरीदनी पड़े।’
 
तेलंगाना में मुस्लिम आरक्षण
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने यही दिखाया है कि देश की हालिया सियासी घटनाओं से उन्होंने कोई सीख नहीं ली है। वे उसी विमर्श में फंसे हुए हैं, जिसके खिलाफ बहुसंख्यक समुदाय का जनमत बागी तेवर अपनाए हुए है।
 
क्या करें सुरक्षा बल?
कश्मीर घाटी में वीडियो बनाम वीडियो की जंग चल रही है। पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक आक्रामक भीड़ को सीआरपीएफ के जवानों से बदतमीजी करते देखा गया। उस वीडियो से अंदाजा लगा कि घाटी में सुरक्षा जवान किन विकट परिस्थितियों में काम करते हैं और सामान्यत: वे कितने संयम का परिचय देते हैं।
 
चुनौती नहीं, संवाद कीजिए
निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और तकनीशियनों को चुनौती दी है कि वे सामने आकर दिखाएं कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) को हैक किया जा सकता है। यह अजीब रुख है। यह सवाल जरूर उठेगा कि निर्वाचन आयोग रेफरी की भूमिका में है, वह खुद एक पक्ष बन गया है? 17 राजनीतिक दलों ने ईवीएम पर शक जताया है, तो आयोग को इसे बेहद गंभीरता से लेना चाहिए था।
 
धरती के स्वर्ग को नरक मत बनने दीजिये
क श्मीर रो रहा है। धरती के स्वर्ग पर एक के बाद एक नारकीय घटनाएं हो रही हैं। कभी घाटी के हमारे नवजवान मारे जा रहे हैं तो कभी हमारी धरती को अपनी जांबाजी से सुरक्षित रखने वाले जवानो की जान जा रही है।
 
अफस्पा पर सुधार याचिका
केंद्र अफस्पा (सशस्त्र बल विशेष अधिकार कानून) वाले क्षेत्रों में सेना की ताकत घटाने के पक्ष में नहीं है। इसलिए उसने सर्वोच्च न्यायालय में सुधार (क्यूरेटिव) याचिका डाली है। मकसद वो फैसला पलटवाना है, जिसके जरिए सुप्रीम कोर्ट ने जिन क्षेत्रों में अफस्पा लागू है, वहां भी मुठभेड़ में मौत होने पर एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य बना दिया था। 8 जुलाई 2016 को सर्वोच्च न्यायालय ने अफस्पा के तहत सुरक्षा बलों को मिलने वाले विशेष सुरक्षा अधिकारों को निरस्त कर दिया।
 
पस्त विपक्ष का साक्षी
संसद के बजट सत्र में कई खास बातें हुईं। मसलन, रेल बजट अलग से पेश करने की परंपरा खत्म हुई। बजट फरवरी के आखिरी के बजाय प्रथम दिन पेश हुआ। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से संबंधित बिल पारित हुए। मानसिक रोगियों तथा एचआईवी-एड्स के मरीजों के प्रति नई सामाजिक संवेदनशीलता को दर्शाने वाले विधेयकों को मंजूरी मिली।
 
पाकिस्तान की कुटिल करतूत
पाकिस्तान ने भारत को भडक़ाने का सुनियोजित दांव चला है। कश्मीर में भडक़ी अशांति को अपने फायदे में मानते हुए उसने ये आक्रामक कदम उठाया। भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को वहां की एक सैन्य अदालत ने सजा-ए-मौत सुना दी। अदालत ने जाधव को देश के खिलाफ जासूसी और विध्वंसक गतिविधियों में शामिल होने का दोषी पाया। लेकिन ये मुकदमा कहां चला और उसमें क्या प्रक्रिया अपनाई गई, यह किसी को नहीं मालूम।
 
बड़े समझौतों के बावजूद
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद का स्वागत करने के लिए प्रोटोकॉल तोडक़र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हवाई अड्डा पहुंचे। इस यात्रा के दौरान शेख हसीना के पिता के नाम पर दिल्ली में एक रोड का नामाकरण हुआ। ये बातें प्रमाण हैं कि भारत सरकार ने बांग्लादेश के प्रति सद्भावना दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
 
404 फाइलों की फांस !
राजनीति में कुछ चेहरे बेनकाब हुए हैं। एक विश्वास के प्रति मोहभंग हुआ है। एक छवि तार-तार हुई है। फिर राजनीति की परिभाषा यथावत है। अब लगता है कि जिस राजनीतिक व्यवस्था को आमूल बदलने के दावे किए गए थे, वे खोखले थे। भ्रष्टाचार को समाप्त करने, नैतिक मूल्यों की स्थापना के लिए, कुछ ईमानदार चेहरों ने दिल्ली की आत्मा को झकझोरा था, नतीजतन उन्होंने ऐतिहासिक सत्ता हासिल की थी-70 सीटों में से 67 सीटें। बंगला-गाड़ी नहीं लेंगे, सुरक्षा नहीं चाहिए, साइकिल, रिक्शा, मेट्रो ट्रेन के जरिए दफ्तर आएंगे-ये तमाम दावे झूठे साबित हुए।
 
प्रसंगवश : रायसीना हिल पर कौन होगा मोदी की पसंद?
रा ष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद का चुनाव नजदीक आ रहा है। सत्तापक्ष में हलचल शुरू हो गई है। एनडीए की बैठक इसी मकसद से बुलाई गई है। रायसीना हिल पर कौन जाएगा और मौलाना आज़ाद रोड पर किसका आशियाना सजेगा इसकी चर्चा तब तक होगी जब तक नाम तय न हो जाएं।
 
अब चाहिए चौकस रणनीति
चीन ने साफ-साफ कह दिया है कि भारत से उसके संबंध बुरी तरह प्रभावित हो गए हैं। दलाई लामा की अरुणाचल प्रदेश यात्रा पर कड़ा विरोध जताते हुए चीन ने कहा- भारत द्वारा तिब्बती धर्मगुरु को चीन सीमा पर विवादित हिस्से में जाने की इजाज़त देना दोनों देशों के संबंधों पर गंभीर असर डालेगा।
 
योगी ने वादा निभाया
किसानों के कर्ज माफ कर देगी। तो योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल ने अपनी पहली बैठक में ये फैसला ले लिया। विपक्ष ने इसे अधूरा, लेकिन सही दिशा में कदम बताया है। उसके पास कोई चारा भी नहीं है। आखिर किसानों की कर्ज माफी का वादा लगभग सभी दलों ने किया था। इसलिए सिद्धांतत: इस पर सवाल उठाने का नैतिक बल उनके पास नहीं है। तो उन्होंने यही आलोचना की है कि राज्य में दो करोड़ 33 लाख किसान हैं, लेकिन योगी सरकार के फैसले का लाभ 86 लाख किसानों को ही मिलेगा। वजह राज्य सरकार का सिर्फ फसल कर्ज माफ करने का निर्णय है।
 
आरटीआई को ना छेड
ये कोशिश पूर्व यूपीए सरकार ने भी की थी। लेकिन तब सिविल सोसायटी के जोरदार आंदोलन के कारण उसे कदम वापस खींचने पड़े थे। अब वही इरादा लेकर केंद्र की एनडीए सरकार भी आगे बढ़ती दिखती है। लेकिन ना सिर्फ सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता के हित में, बल्कि खुद अपनी छवि की चिंता करते हुए भी- उसे इस कोशिश से बाज आना चाहिए।
 
राम जन्मोत्सव के विहंगम नजारे के दीदार के लिये अयोध्या में श्रद्धालुओं का जमावडा
भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या कल दोपहर बारह बजते ही ‘भये प्रगट कृपाला दीनदयाला’ जैसी चौपाइयों और गीतों से गूँज उठेगी। इस विहंगम दृश्य का दीदार करने के लिये देश विदेश से आये लाखों श्रद्धालु यहां डटे हुये हैं। प्रचलित मान्यताओं के अनुसार कल अर्थात् चैत्र रामनवमी को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्म अयोध्या में हुआ था। इसी उपलक्ष्य में इस नवमी को रामनवमी के रूप में जाना जाता है।
 
जस्टिस के ‘दिल की बात’
मुद्दे वही, लेकिन अंदाज अलग था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने न्यायपालिका की समस्याओं को रखते हुए पूर्व प्रधान न्यायाधीश जस्टिस टीएस ठाकुर भावुक हो गए थे। लेकिन जस्टिस जेएस खेहर मजबूती से बोले। मौका इलाहाबाद हाई कोर्ट की 150वीं वर्षगांठ का था। जस्टिस खेहर ने कहा- ‘प्रधानमंत्री मन की बात करते हैं, तो देश सुनता है। वे अब मुझे अपने दिल की बात करने दें।’ फिर जजों की कमी और अदालतों पर काम के भारी बोझ के सवाल उन्होंने उठाए। जस्टिस खेहर तैयारी से आए थे।