संपादक

बदहाली का फैलता दायरा
ताजा आधिकारिक सूचनाओं ने देश में आर्थिक बदहाली गहराने की पुष्टि की है। भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी सालाना रिपोर्ट में घाटा दर्शाने वाले मुख्य संकेतकों का हवाला देते हुए कहा कि 2017-18 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में केंद्र सरकार की राजकोषीय हालत बिगड़ी। राजस्व घाटा और सकल राजकोषीय घाटा- दोनों बजट पूर्व अनुमान की तुलना में ज्यादा रहे।
 
सवाल बच्चों की सुरक्षा का
गुडग़ांव के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में सात वर्षीय प्रद्युम्न से यौन दुर्व्यवहार और हत्या के सदमे से लोग उबरे भी नहीं हैं कि राष्ट्रीय राजधानी के गांधी नगर इलाके में एक पांच वर्षीय छात्रा से बलात्कार का मामला सामने आ गया। वहां एक प्राइवेट स्कूल परिसर में स्कूल के ही एक चपरासी ने ये कुकर्म किया। इन दोनों मामलों में कई तथ्य समान हैं।
 
करोड़ों मां-बाप के भरोसे का कत्ल
गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में दूसरी कक्षा के छात्र प्रद्युम्न की दर्दनाक मौत। मां बाप की दुनिया उजड़ गई। एक होनहार बिना किसी गलती के, पूरी तरह स्वस्थ, हंसते खेलते हुए भी अपनी जिंदगी न जी सका। क्योंकि कोई अपनी गलती छिपाने के लिए उसका कत्ल करने पर आमादा था। वो कोई कौन था?
 
कसौटी पर केंद्र की नीयत
जब से चुनाव के लिए नामांकन भरते समय संपत्ति का ब्योरा देना अनिवार्य किया गया, जन-प्रतिनिधियों की समृद्धि में हैरतअंगेज करने वाली वृद्धि की खबरें आम हो गईं। पांच साल में पांच से 12 गुना तक संपत्ति बनने की खबरें गुजरे वर्षों में आईं। लेकिन यह मालूम नहीं होता कि वो संपत्ति आई कहां से?
 
जनरल रावत की चेतावनी
चीन के शहर शियामन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की घंटे भर चली वार्ता में सहमति बनी कि दोकलाम विवाद को पीछे छोडक़र भविष्य की तरफ देखा जाए। उसके पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज कह चुकी थीं कि युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है।
 
विवेकहीनता के दौर में!
किसी घटना के बारे में बिना पूरे तथ्य इक_ा किए, बिना संदर्भ में गए और बिना सबं ंि धत पक्षो ं के परु ान े रिकार्डॅ पर गौर किए जो प्िर तक्रि या जतार्इ जाती ह,ै उस े विवेकहीनता का उदाहरण ही कहा जाना चाहिए। सोशल मीडिया के इस दौर में कोई खबर आते ही उस पर टिह्रश्वपणी करने की होड़ में शामिल हो जाना आम प्रवृत्ति है।
 
चीन से निपटने के लिए तैयारी जरूरी
डो कलाम में चीन के साथ भारत का विवाद जटिल होता नजर आ रहा है। चीन के साथ कूटनीतिक स्तर पर बातचीत के जरिये समाधान की कई कोशिशें विफल साबित हुई हैं। सबसे ताजा कोशिश अभी हाल में की गई। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने चीनी समकक्ष से एनएसए ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान चीन जाकर बातचीत की। उनकी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात हुई।
 
अब पूरा ताना-बाना तोड
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने कश्मीर स्थित अलगाववादी नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज करने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इन नेताओं पर कश्मीर में निरंतर अशांति फैलाए रखने की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। जाहिर है, यह आरोप कोई नया खुलासा नहीं है।
 
आंतरिक सुरक्षा का आईना
नक्सलवाद को इस्लामी आतंकवाद के साथ जोडक़र देखना तार्किक नजरिया ह ै या नही,ं इस पर बहस हो सकती ह।ै लेि कन यह निविर्व ाद ह ै कि इन दोनो ं स े देश की आंतरिक सुरक्षा को गहरा खतरा है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपनी सालाना रिपोर्ट में भारत के संदर्भ में इन दोनों को एक साथ रखा।
 
बिजली पर खोखले दावे!
ग्रामीण इलाकों में बिजली पहुंचाने के एनडीए सरकार के दावों पर गंभीर सवाल उठा है। नीति आयोग ने अपनी एक ताजा रिपोर्ट में कहा है कि मौजूदा ग्रामीण विद्युतीकरण अभियान से जमीनी हालात में खास सुधार नहीं हुआ है। इस रिपोर्ट के मुताबिक देश में अब भी तीस करोड़ से ज्यादा लोगों को बिजली मुहैया नहीं हुई है।
 
बस्तों के बोझ तले न दबे बालमन
कें द्र सरकार ने एक बार फिर कहा है कि स्कूलों में बच्चों के बस्ते का बोझ कम होगा। दूसरी कक्षा तक केवल दो किताबें और पांचवीं तक तीन किताबें पढ़ाने की सिफारिश एनसीईआरटी ने की है। सरकार का कहना है कि वो इन प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार कर रही है।
 
मौलिक या कानूनी अधिकार?
निजता व्यक्ति का मौलिक अधिकार है, या साधारण कानूनी हक? मुद्दा संवैधानिक भावना की रचनात्मक व्याख्या का है। सर्वोच्च न्यायालय के सामने ये सवाल पहले भी दो बार आए। लेकिन वो पचास साल से भी ज्यादा पहले की बात है। 1954 और 1962 में आए उन निर्णयों ने सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि भारतीय संविधान के तहत निजता नागरिकों का मौलिक अधिकार नहीं है।
 
प्रशासनिक सुधार की जरूरत
नौकरशाहों की सेवा शर्तों पर गौर करें तो तबादला कोई दंड नहीं है। लेकिन अक्सर सरकारें इस फैसले का उपयोग ऐसे अफसरों को दंडित करने के लिए करती हैं, जिनसे उनके लिए परेशानी खड़ी होती है। मीडिया में ऐसे अफसरों को नायकत्व प्रदान किया जाता है।
 
इस घुसपैठ का क्या करें?
चीन से आने वाले सस्ते और अच्छे सामानों ने स्थानीय लघु उद्योगों को बंद होने पर मजबूर कर दिया। इससे चीन के सामान घर-घर में घुस गए। अर्थशास्त्रियों ने ध्यान दिलाया है कि दोनों देशों में भले राजनीतिक मतभेद रहे हैं, लेकिन इससे द्विपक्षीय व्यापार पर कभी कोई खास असर नहीं पड़ा।
 
अब अमल की करें गारंटी
संसद का सत्र शुरू होने से ठीक पहले प्रधानमंत्री ने गो-रक्षा के नाम पर हो रही हिंसा के खिलाफ महत्त्वपूर्ण बयान दिया। मॉनसून सत्र के पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में नरेंद्र मोदी ने कहा कि गो-रक्षा के नाम पर कानून को हाथ में लेने की घटनाओं से देश की बदनामी हो रही है।
 
कैसे होंगी सडक़ें सुरक्षित?
यह तो जाना-पहचान तथ्य है कि भारत में सडक़ यात्रा असुरक्षित है। हर साल सवा लाख से ज्यादा लोगों की जान सडक़ हादसों में जाती है। इससे कहीं ज्यादा विकलागं या घायल होत े ह।ंै इन हादसो ं के कर्इ कारण बताए जात े ह।ंै मसलन, सडक़ े ं टूटी-फूटी अवस्था में होती हैं और स्पीड ब्रेकर मनमाने तरीके से बने होते हैं।
 
अमेरिका का अजीब खेल
पांच सुन्नी देशों ने कतर से राजनयिक संबंध तोड़े तो ईरान ने उसके पीछे अमेरिका का हाथ बताया। तब यही माना गया कि इस कार्रवाई का रास्ता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की सऊदी अरब यात्रा से खुला। लेकिन अब उसी अमेरिका ने आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए कतर से समझौता कर लिया है।
 
कोविंद के स्वागत के लिए तैयार रायसीना हिल!
दे श के प्रथम संवैधानिक पद के लिए सोमवार सुबह से मतदान शुरू हो जाएगा। 20 तारीख को नए राष्ट्रपति के निर्वाचन की आधिकारिक घोषणा हो जाएगी। वैसे तो चुनाव की अपनी मर्यादा है। नतीजे सांसदों,विधायकों के मतदान से ही तय होंगे।
 
कब तक गिनेंगे नोट?
उर्जित पटेल के पास हर सवाल को टालने की तरकीब थी। जहां मामला फंस सकता था, यह कह दिया कि गोपनीयता की धारा के तहत वे उस बारे में सूचना नहीं दे सकते। बहरहाल, यह सूचना गोपनीयता के दायरे में नहीं थी कि नोटबंदी के बाद जमा कराए गए पुराने नोटों को गिनने का काम कब पूरा होगा।
 
कभी गरीबों का भोजन रहा बाटी चोखा, अब शाही भोजन की पहचान
कभी अभावग्रस्त पूर्वी उत्तर प्रदेश और पड़ोसी राज्य बिहार के कुछ जिलों के गरीबों का मुख्य भोजन रहा बाटी-चोखा अब बदलते जमाने में शाही लोगों का पसन्दीदा भोजन बनता जा रहा है।