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संपादक

आरएसएस को क्या भय?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रवक्ता मनमोहन वैद्य ने कोई ऐसी बात नहीं कही, जिसके लिए उन्हें या उनके संगठन को सफाई देनी पड़ती। उन्होंने डॉ. बीआर अंबेडकर के हवाले से कहा कि सबको समान अवसर मिलना चाहिए। दलित, आदिवासियों को लंबे समय तक शिक्षा एवं प्रगति से बाहर रखा गया। इसलिए उन्हें आरक्षण मिला। लेकिन ऐसे प्रावधान को स्थायी बनाना समाज के हित में नहीं होगा। क्या एक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन का प्रतिनिधि होने के नाते संघ के नेता स्वतंत्र रूप से ऐसा किसी अन्य विषय पर अपनी राय नहीं जता सकते? बेशक आज देश की सत्ता संघ से वैचारिक प्रेरणा लेने वाली पार्टी के हाथ में है।
 
अब यूनिवर्सल बेसिक इनकम?
क्या वित्त मंत्री अरुण जेटली अपने अगले बजट में यूनिवर्सल बेसिक इनकम (यूबीआई) स्कीम की घोषणा करेंगे? सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा है कि बजट पूर्व आर्थिक सर्वेक्षण में यूबीआई का विस्तृत विश्लेषण पेश किया जाएगा। यूबीआई एक नई अवधारणा है, जिस पर चर्चा तो कई देशों में चल रही है, लेकिन जिस पर अभी अमल कहीं नहीं हुआ है।
 
सडक़ पर दम न तोड़े हमारा भविष्य
ती न दिन पहले उत्तरप्रदेश के एटा में 13 नन्हे मुन्हों की मौत सडक़ दुर्घटना में हो गई। इन बच्चों को इनके माता-पिता ने बेहतर भविष्य का सपना संजोकर घने-कुहासे के बीच भी स्कूल भेजा। सपने टूट गए। सुनहरा भविष्य सडक़ों पर दर्दनाक तरीके से दम तोड़ गया।
 
सलमान बन गए सवाल
अभिनेता सलमान खान पर कानून ने इतना रहम दिखाया है कि वे खुद इस पर एक सवाल बन गए हैं। ऐसा सवाल, जिसका जवाब देने में भारतीय न्याय व्यवस्था शायद ही कभी सफल हो। बात फुटपाथ पर लोगों को कुचलने की हो या काले हिरण के अवैध शिकार की- अथवा गैर-कानूनन हथियार रखने की- हर मामले में सलमान ने न्याय की अपेक्षाओं का मुंह चिढ़ा दिया है।
 
पाक सुनेगा मोदी का पैगाम?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ‘रायसीना डायलॉग’ के दूसरे संस्करण का उद्घाटन करते हुए पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया। कहा कि जब तक वह आतंकवाद प्रायोजित करने के तरीके से बाज नहीं आता, उससे संबंध नहीं सुधर सकते। रायसीना डायलॉग भारत की महत्त्वाकांक्षी पहल है। इस बार इस भूराजनीति क सम्मेलन में 65 देशों के 250 से ज्यादा प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।
 
‘दुनिया का कल्चरल एक्सपीरियंस बनेगा जयपुर’
प्रसिद्ध गीतकार गुलजार ने साहित्यकारों और लेखकों को जमीन से जुडाव को कायम रखने की सीख देते हुये कहा कि अपने अंदर के उबाल को कायम रखना होगा। श्री गुलजार ने आज यहां शुरू हुये दसवें जयपुर लिटरेचर फेस्टीवल में विषय प्रवर्तक के रूप में बोलते हुये कहा कि अच्छा साहित्य वही है जो जनता की विचारधारा को अभिव्यक्त करता हो और अच्छा साहित्यकार या लेखक वही है जो जमीं से जुडे रहकर अपने सृजन का निखार करें।
 
अखिलेश गुट को साइकिल
निर्वाचन आयोग ने अखिलेश यादव गुट को समाजवादी पार्टी का असली धड़ा माना। नतीजतन, उसे ही पार्टी का चुनाव निशान- साइकिल- देने का फैसला किया। आयोग ने 1969 के कांग्रेस के विभाजन को नजीर बनाया।
 
गांधी व्यक्ति, ब्रांड नहीं विचारधारा है
मान,अपमान,सुख,दु:ख,प्रशंसा,आलोचना के भाव से जो व्यक्ति ऊपर उठ जाता है वही महायोगी, महापुरुष की श्रेणी में आता है। बापू संत थे। बापू महायोगी थे। बापू महापुरुष थे।
 
कांग्रेस की ‘जन वेदना’ का अर्थ
कांग्रेस ने दिल्ली में राष्ट्रीय ‘जन वेदना’ सम्मेलन किया। घोषित उद्देश्य नोटबंदी से लोगों को हुई परेशानियों को मुद्दा बनाना था। पार्टी यह संदेश देना चाहती थी कि इस मुसीबत के समय वह आम जन के साथ है। उनकी दिक्कतों को लेकर वह संघर्ष करेगी। कांग्रेस नेताओं ने नोटबंदी के परिणाम के साथ-साथ इसके फैसले और तरीकों पर भी सवाल उठाए। इसके लिए अपने सबसे बड़े नामों को मंच पर उतारा।
 
प्रवासी सम्मेलन : भावनाओं से जाए आगे
इन दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एजेंटे पर काला धन सर्वोपरि है। इसलिए जब वे 14वें प्रवासी भारतीय सम्मेलन को संबोधित करने पहुंचे तो वहां भी नोटबंदी और उससे जुड़े मुद्दे उनके भाषण में प्रमुख बने रहे।
 
चल गीता चल.. कोई नहीं.. जीतकर मानेंगे
दं गल जितनी सफल फिल्म साबित हो रही है मेरा मन उतना ही उमंग से सराबोर हो रहा है। एक और फिल्म जिसकी पटकथा हरियाणा की धरती से ताल्लुक रखती है। फि़ल्म का कथानक और कहानी की धुरी गीता का नाता इस माटी से है। इसके पहले सुल्तान भी इसी सूबे की प्रेरणा से रुपहले परदे पर आई थी। सुल्तान भी बहुत सफल हुई। दरअसल मेरा उत्साह इन फिल्मों के हरियाणा से ताल्लुक रखने भर से नहीं है। ये एक वजह हो सकती है। लेकिन असली और ठोस वजह ये है कि ये फिल्में हमारी सामाजिक चेतना को जगाती हैं। हमारे बदलाव की भूख को बयान करती हैं।
 
स्वच्छता का भी इत्मिहान
अगले फरवरी-मार्च में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होंगे। इनके कार्यक्रम की घोषणा के साथ लोगों का ध्यान वहां के चुनावी समीकरणों पर केंद्रित हो गया है। मगर इन चुनावों में दलों और नेताओं की तकदीर के साथ-साथ इन चुनावों में भारतीय निर्वाचन व्यवस्था की छवि भी दांव पर है। ये धारणा मजबूत है कि चुनावों में धन का प्रभाव बढ़ता गया है- खासकर काले धन का।
 
शशिकला को मिली कमान
शशिकला नटराजन का ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कडग़म का अध्यक्ष बनना भारत में दलीय राजनीति में लगी गंभीर बीमारी का परिचायक है। शशिकला पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की दोस्त रहीं। इस नाते वे परदे के पीछे से सियासी समीकरणों के खेल में लगी रहती थीं, लेकिन कभी प्रत्यक्ष राजनीति नहीं की।
 
जवाब जो नहीं मिले
देश ने 31 दिसंबर की शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का बेसब्री से इंतजार किया। लोग पचास दिन पूरे होने के बाद नोटबंदी के बारे में प्रधानमंत्री का आकलन सुनने को बेताब थे। लेकिन पचास मिनट के भाषण में नोटबंदी के मुख्य मकसदों को हासिल करने में कितनी कामयाबी मिली, इस बारे में प्रधानमंत्री ने कोई तथ्यात्मक विवरण नहीं दिया।
 
कैशलेस संकल्प का नया साल
न या साल शुरू हो गया। वर्ष 2017 हमारे प्रदेश,देश दुनिया के लिए सुख शांति का वर्ष साबित हो इस मंगलकामना के साथ नए बदलाव की उम्मीद की जानी चाहिए। बदलाव प्रकृति का नियम है। जो बदलता नहीं वह समय के साथ अ-प्रासंगिक हो जाता है। इसलिए एक सार्थक बदलाव के लिए हमें हमेशा तत्पर रहना चाहिए। नयापन हर तरफ ताजगी लाता है।
 
टाटा की महंगी जीत
साइरस मिस्त्री की टाटा सन्स ग्रुप से विदाई हो गई है। इसे रतन टाटा की जीत माना जा सकता है। लेकिन ये बड़ी महंगी जीत है। टाटा समूह के चेयरमैन पद से हटाए जाने के फैसले को मिस्त्री ने सहजता से स्वीकार नहीं किया।
 
सियासी चंदे पर वाजिब सवाल
मुद्दा राजस्व सचिव हसमुख अधिया के बयान से उठा। अधिया के बयान से संकेत मिला कि राजनीतिक दलों को मिलने वाले नकद चंदे को लेकर सरकार ने नई छूट दी है। इसके तहत 500 और 1000 पुराने नोटों से अभी चंदा दिया जा सकता है। साथ ही नोटबंदी के बाद राजनीतिक दलों के खातों में चाहे जितनी भी रकम जमा हुई हो, उसकी जांच नहीं की जाएगी।
 
एक तरफ खाद्यान्न संकट तो दूसरी तरफ खाद्यान्न बर्बादी
जहां एक और दुनिया खाद्यान्नों के संकट से जूझ रही है वहीं उचित रखरखाव व फसलोत्तर गतिविधियों के अभाव में देश में एक लाख करोड़ रुपए से अधिक के खाद्यान्न सालाना नष्ट हो जाते हैं। खाद्यान्नों की सालाना बरबादी के यह आंकड़े पिछले दिनों ही भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण विभाग के सचिव अविनाश कुमार श्रीवास्तव ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित एक सेमिनार में दिये हैं। खाद्यान्नों की बरबादी पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार की ओर से बताया गया है कि वह दलहन और खाद्यान्नों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की प्रोद्यौगिकी विकसित करने पर विचार कर रही है।
 
पढ़ाई-लिखाई पर दें ध्यान
हिंदुओं की अजीब विडंबना है। अमेरिका में सभी मतावलंबियों के बीच ये समुदाय शिक्षा पर सबसे ज्यादा ध्यान देता है। मगर बात पूरी दुनिया की हो, तो सामने आता है वह सबसे कम पढ़ा-लिखा समुदाय है। हालांकि हिंदू इस पर संतोष कर सकते हैं कि पियू रिसर्च के वैश्विक सर्वे में यह सामने आया कि हर जगह बहुसंख्यक समुदाय के लोग पढ़ाई-लिखाई में सबसे पिछड़े हुए होते हैँ। अत: भारत में अगर हिंदुओं का यही हाल है, तो उसमें कोई अचरज नहीं। मगर यह संतोष करने का कमजोर आधार है। पियू रिसर्च के सर्वे का सही सबक यह होगा कि हिंदू समुदाय के लोग पढ़ाईलि खाई पर ज्यादा ध्यान दें। शिक्षा के प्रसार को प्राथमिकता दें। वरना, ऐसी सुर्खियां कतई अच्छा अनुभव प्रदान नहीं करतीं कि हिंदू दुनिया में सबसे ज्यादा अनपढ़ हैं।
 
राहुल खुलासा तो करें
बेशक कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की राजनीति और दलीलों को गंभीरता से न लिया जाए। बेशक नोटबंदी पर कांग्रेस एक सशक्त और तार्किक विपक्ष की भूमिका नहीं निभा पाई है। कांग्रेस सडक़ों पर आंदोलन खड़े नहीं कर पाई। राहुल गांधी के नेतृत्व में एक भी जत्थे ने बैंकों या एटीएम अथवा रिजर्व बैंक का घेराव नहीं किया।