संपादक

सिद्धेश्वर स्कूल में अपने प्रिय नेता को दी अंतिम विदाई
गुरूग्राम सांस्कृतिक गौरव समिति द्वारा नगर के सैकड़ों लोगों को के साथ उनकी अंतिम विदाई का दर्शन दूरदर्शन पर किया गया व अटल जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई।
 
अटलबिहारी वाजपेयी होने का मतलब
अटलबिहारी वाजपेयी यानि एक ऐसा नाम जिसने भारतीय राजनीति को अपने व्यक्तित्व और कृतित्व से इस तरह प्रभावित किया जिसकी मिसाल नहीं मिलती। एक साधारण परिवार में जन्मे इस राजनेता ने अपनी भाषण कला, भुवनमोहिनी मुस्कान, लेखन और विचारधारा के प्रति सातत्य का जो परिचय दिया वह आज की राजनीति में दुर्लभ है। सही मायने में वे पं.जवाहरलाल नेहरू के बाद भारत के सबसे करिश्माई नेता और प्रधानमंत्री साबित हुए।
 
नफरत की खाई पाटने में कानून कितना सक्षम?
दलित समुदाय को देश का बड़ा वोट बैंक मानकर की जाने वाली राजनीति का सिलसिला इन दिनों पूरे शबाब पर है। सत्ता के विशेष पारखीद् तथा सत्ता में बने रहने का हुनर बखूबी जानने वाले केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान के दिल में 2019 में प्रस्तावित लोकसभा चुनाव आने से पूर्व एक बार फिर दलितों के प्रति उनका ‘अपार प्रेम’ झलकता दिखाई पड़ा।
 
तीन तलाक में तीन संशोधन
जब तीन तलाक का विधेयक लाया गया था, तभी लग रहा था कि यह कानून बहुत जल्दबाजी में बनाया जा रहा है और यह उतना ही अत्याचारी सिद्ध होगा, जितना कि खुद तीन तलाक है। तीन तलाक और उसके विरुद्ध बना कानून दोनों ही अतिवाद के शिकार थे। समझ में नहीं आता कि मंत्रिमंडल ने उस विधेयक के प्रारुप को कैसे पास कर दिया?
 
सिद्धेश्वर स्कूल में अपने प्रिय नेता को दी अंतिम विदाई
गुरूग्राम सांस्कृतिक गौरव समिति द्वारा नगर के सैकड़ों लोगों को के साथ उनकी अंतिम विदाई का दर्शन दूरदर्शन पर किया गया व अटल जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई।
 
जागिए : जानलेवा धुएं का गुबार बयानों से खतम नहीं होगा
गुरुग्राम के सोहना रोड पर वाटिका चौक में धूल धुंए का गुबार लोगों को डरा रहा है। डंपर गिरने से फैला फ्लाई ऐश [राख] पहले से प्रदूषण की मार झेल रहे शहर की आबोहवा खराब कर रहा है। मानसून में प्रदूषण की मार से बचने का खुशनुमा ख्याल इस रोड पर आते ही गायब हो जाता है।
 
कठघरे में जनसंख्या नीति
तीन साल पहले चीन ने वन चाइल्ड (एक बच्चे वाली) नीति में बदलाव किया। इसकी मुख्य वजह थी देश में प्रजनन दर का काफी घट जाना है। नई नीति के लागू होने के बाद ही देश में बच्चों के पैदा होने की संख्या में उछाल देखा गया है।
 
क्या फिर से एससी-एसटी एक्ट में संशोधन होना चाहिए ?
गुरुवार को लोकसभा में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खडग़े ने कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी-एसटी एक्ट में किये गये बदलाव को रोकने के लिए गंभीर नही है। विषय को उठाते हुएउन्होंनेकहा कि राजीव गांधी के कार्यकाल में 12 सितम्बर 1989 को एससी-एसटी अत्याचार निवारण कानून बना था।
 
आखिर क्यों है जम्मू-कश्मीर के लिए निकाहनामें जैसा अनुच्छेद 35ए
35ए को रद्ध करने जैसी बातें करके मानों शोलों को और भडक़ाने का काम कर दिया गया है। एक तरह से अनुच्छेद 35ए को लेकर जम्‍मू-कश्‍मीर में बवाल मचा हुआ है। यहां आपको बतला दें कि संविधान के आर्टिकल 35ए के तहत जम्मू- कश्मीर को विशषे राज्य का दर्जा मिलता ह,ै
 
देश के इस हालात में रूस क्या खाक हस्तक्षेप करेगा?
अमेरिका में जब राष्ट्रपति चुनाव का दौर चल रहा था, तभी जोर-शोर से इस बात की आशंकाएं भी व्यक्त की जा रहीं थीं कि कहीं न कहीं इन चुनावों में रुस का हस्तक्षेप हो रहा है। यही कारण था कि लोकप्रियता में पीछे रहने के बावजूद डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति चुनाव जीतने में सफल रहे। इसे देखते हुए ही अपने कार्यकाल के आखिरी दिनों जाते-जाते तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इसकी उच्चस्तरीय जांच की भी घोषणा कर दी थी।
 
इमरान के नेतृत्व में पाक में एक नये युग शुरू होने का इंतजार
पाक में बदलते शासकीय 70 वर्ष के इतिहास में सत्ता परिवर्तन के दूसरे लोकतांत्रिक परिदृश्य के तहत हुये आम चुनाव में नेशनल असेम्बली की 272 सीटों के लिये 3459 उम्मीदवार चुनावी मैदान में खड़े रहे जिसमें से इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक- ए इंसाफ ,पीटीआई को सर्वाधिक सीट मिली जो गठबंधन कर फिलहाल पाकिस्तान में सरकार गठित कर सकती है।
 
तटस्थ भाव भी अपराध है मुजफ्फरपुर के बहाने
मुजफ्फरपुर में बच्चियों के साथ जो कुछ घटित हुआ उससे कल नीतीश कुमार शर्मिंदा हुए। ठीक एक दिन पहले जब राष्ट्रीय शर्म की इस घटना पर बिहार छोडक़र तेजस्वी दिल्ली पहुंचने वाले थे।
 
एनआरसी के बहाने गैरभाजपाई राज्यों पर शिकंजा कसने की कवायद
असम में एनआरसी यानी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स का मामला अब राजनीतिक गलियारे का प्रमुख हथियार बन चुका है। इसके जरिए जहां सत्तारुढ़ दल बिखरे हुए मतदाताओं को ध्रुवीकृत करने में व्यस्त नजर आ रहा है तो वहीं करीब 40 लाख लोगों के ऊपर गिरने वाली गाज का भय बताकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत अन्य विरोधी पार्टियों ने भी वोटरों को लुभाने का काम शुरु कर दिया है।
 
चुनाव पर संदेह का साया
पाकिस्तान में पच्चीस जुलाई को हुए आम चुनाव में क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ 115 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पार्टी पीएमएल (एन) 64 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रही, जबकि 43 सीटों के साथ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी को तीसरा स्थान मिला।
 
ट्रंप की आक्रामकता और दिखावे की नरमी के पीछे का सच
जिस आक्रामकता के साथ डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी उससे यह तो तय हो गया था कि बतौर राष्ट्रपति उनके फैसले सख्त होंगे, लेकिन किसी ने भी यह नहीं सोचा था कि वो अपने कदम वापस भी ले सकते हैं।
 
असम: राष्ट्रहित की हानि न करें
असम में ‘नागरिकों के रजिस्टर’ को लेकर जो विवाद छिड़ गया है वह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। अपनी नागरिकता को पंजीकृत करवाने के लिए 3 करोड़ 29 लाख लोगों ने आवेदन किया था। उसमें से अभी तक 2 करोड़ 89 लाख नामों को पंजीकृत किया गया है अर्थात शेष 40 लाख लोगों की नागरिकता अभी तय नहीं हुई है।
 
धारा 377 : जबर्दस्ती करने वालों के खिलाफ क्या होगा?
देश की सर्वोच्च अदालत ने समलैंगिक संबंधों को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान साफ किया कि अगर कोई कानून मौलिक अधिकारों का हनन करता है, तो अदालतें कानून बनाने, संशोधन करने या उसे रद्द करने के लिए बहुमत की सरकार का इंतजार नहीं कर सकतीं।
 
राहुल गांधी अब वे पह्रश्वपू नहीं, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ह
सं सद में अविश्वास प्रस्ताव के विपक्ष नेता कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार की नीतियों प्रर प्रहार करते हुए अपने भाशण के अंतिम दौर में भावना में बहकर जो भाव व्यक्त करते हुये कहा कि प्रधानमंत्री जी! मैं आज भी आपके लिये पह्रश्वपू हूं ,कल भी रहूंगा मेंरे दिल में सभी के लिये ह्रश्वयार है, नफरत नहीं !
 
इमारतें नहीं, भरोसा हो रहा धराशायी
चंद दिन पहले ग़ाजिय़ाबाद के शाहबेरी इलाके में एक भरी पूरी इमारत भरभरा कर गिरी। कई लोगों की मौत हो गई। कइयों की उम्मीद ईंट और मलबे के नीचे दबकर दफन हो गईं। कितना भयावह है सबकुछ। शाहबेरी की घटना अकेली नहीं है।
 
रिश्वतप्रेमी और रिश्वतद्रोही
संसद ने अब एक ऐसा कानून पास कर दिया है, जिसके कारण रिश्वत लेना ही नहीं, देना भी जुर्म होगा। 1988 में जो भ्रष्टाचार-विरोधी कानून पास हुआ था, वह लंगड़ा था। उसकी एक टांग गायब थी। वह कानून रिश्वत लेनेवालों को तो सजा देता था लेकिन देनेवाला बिल्कुल मुक्त होता था। इस तरह का कानून यह मानकर चलता है कि कोई भी आदमी रिश्वत तभी देता है, जबकि वह भयंकर मजबूरी में फंस जाता है।