संपादक

फुटबॉल मानचित्र पर भारत
भारत में अंडर-17 वर्ल्ड कप फुटबॉल का आयोजन हर लिहाज से एक बड़ा अवसर था। इसके बहाने पहली बार भारतीय टीम (भले ही वो सत्रह वर्ष से कम उम ्र के खिलाडिय़ ो ं की हो) को विश्व कप म ें खले न े का मौका मिला। फटु बालॅ म ें भारत की जो स्थिति है, उसके मद्देनजर टीम का प्रदर्शन बहुत खराब नहीं रहा।
 
हरियाणा की बेटियों ने रचा इतिहास
दि ल्ली से 82 कि.मी. दूर हरियाणा सूबे के रिवाड़ी जिला के टह्रश्वपा गोथरा गांव की सरकारी स्कूल की लड़कियों ने वो सफलता हासिल की जो सूबे के इतिहास में दर्ज होने के साथ-साथ लड़कियां चाहे वे धरती के किसी भी कोने की क्यों न हों, उनसे प्रेरित होती रहेंगी।
 
चीन में दूसरे माओ का जन्म
चीन में इस साल नए माओत्सेतुंग का जन्म हुआ है। माओ जितना ताकतवर नेता चीन में अब तक कोई और नहीं हुआ है। माओ के रहते ल्यू शाओ ची और चाऊ एन लाई प्रसिद्ध जरुर हुए लेकिन वे माओ के हाथ के खिलौने ही बने रहे। माओ के बाद चीन में एक बड़े नेता और हुए।
 
विदेशों में हिन्दुस्तान की छवि बिगाडऩे वाली भीड
अधिकांश दुनिया हिन्दुस्तान को अतिथि देवो भव: के साथ ही गंगा-जमुनी तहजीब और शांति, सद्भाव एवं भाईचारे की मिसाल कायम करने वाले देश के तौर पर जानती और पहचानती है। दरअसल अतिथि देवो भव: हमारी भारतीय संस्कृति की एक ऐसी अनुपम परम्परा है जिसमें अतिथियों को देवतुल्य माना जाता है और अपने सामर्थ्य के मुताबिक उनका स्वागत सत्कार एवं अभ्यर्थना में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी जाती है।
 
बनियों पर क्यों बरसे कांचा ?
श्री कांचा इल्लाइहा एक प्रभावशाली बौद्धिक हैं और दलितों के कट्टर समर्थक हैं। एक बौद्धिक के तौर पर वे आदर के योग्य है लेकिन उनके तर्कों से सहमत होना कठिन है। हाल ही में प्रकाशित उनकी पुस्तक ‘पोस्ट हिंदू इंडिया’ पर दक्षिण भारत के बनिया संगठनों ने प्रतिबंध की मांग की थी, जिसे अदालत ने रद्द कर दिया है।
 
मोदी भरे हवा पंचरवाले पहिए मे
पटना विश्वविद्यालय के शताब्दि समारोह में हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अचानक पता नहीं क्या सूझी, उन्होंने घोषणा कर दी कि देश के 20 विश्वविद्यालयों को अगले पांच साल के लिए वे 10 हजार करोड़ रु. देंगे याने इनमें से हर विद्यालय को हर साल 100 करोड़ रु. मिलेंगे। क्यों मिलेंगे ? क्योंकि हमारे प्रधानमंत्रीजी उन्हें विश्व-स्तर का बनाना चाहते हैं। यह छलांग तो अच्छी है लेकिन अभी तो हाल यह है कि भारत का एक भी विश्व विद्यालय विश्व-स्तर का नहीं है।
 
आओ मिलकर खुशियों का दिया जलाए
दी पमालिका का पावन पर्व आ गया। अदालत के आदेश की वजह से दिल्ली एनसीआर में शायद पटाखों का शोर पहले जैसा नही सुनाई देगा। हमें मानना होगा कि देश की सर्वोच्च अदालत ने दिल पर पत्थर रखकर ये फैसला दिया होगा। निश्चित रूप से उन सभी लोगों को धक्का लगा होगा जो वर्ष भर इस पर्व का इंतजार करते हैं।
 
आरुषि-हेमराज हत्याकांड : सीबीआई की विश्वसनीयता कहां रही
देश और दुनिया के लिए रहस्य बन चुके आरुषि-हेमराज दोहरे हत्याकांड मामले में सीबीआई कोर्ट ने नवंबर 2013 में तलवार दंपत्ति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। तब मीडिया ने इसे कुछ यूं प्रचारित किया था मानों सीबीआई ने अपनी जांच से दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया हो।
 
भाजपा लौटे लोहिया की तरफ
डॉ. राममनोहर लोहिया को गए 50 साल पूरे हो रहे हैं लेकिन टीवी चैनलों और अखबारों में उनकी कोई चर्चा नहीं है। देश में कोई बड़ा समारोह नहीं है। आज देश में लोहिया की सप्तक्रांति का कोई नामलेवा-पानीदेवा नहीं है। कौनसा राजनीतिक दल या नेता है, ऐसा है, जो आज जात तोड़ो, अंग्रेजी हटाओ, नर-नारी समता, विश्व सरकार, दाम बांधो, खर्च पर रोक, विश्व-निरस्त्रीकरण जैसे मुद्दों को उठा रहा है।
 
पटाखे : बेमतलब फैसला
सर्वोच्च न्यायालय ने अगले 20 दिन के लिए दिल्ली में पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी है। अदालत का यह फैसला अजीब-सा है। बिक्री पर रोक है लेकिन पटाखे छुड़ाने पर रोक नहीं है। तो अब होगा यह कि दीवाली के मौके पर अदालत की नाक के नीचे जमकर पटाखे फोड़े जाएंगे और वह उन्हें देखते रहने के अलावा कुछ नहीं कर सकती।
 
अमिताभ का ‘अमिताभ’ हो जाना
यह तो दुनिया जानती है कि उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में 11 अक्टूबर 1942 को जन्में अमिताभ बच्चन सदी के महानायक हैं, परन्तु यह कम लोग ही जानते होंगे कि अमिताभ सिनेमाजगत की ऐसी कालजयी रचना हैं, जिन्होंने उन तमाम सीमाओं को वसी यानी विस्तारित किया है जो कि किसी भी कला जगत को बांधे रखने के लिए आवश्यक होती हैं। कला साधकों की तरह अभिनय को जीवन में उतारने वाले अमिताभ बच्चन चूंकि डॉ हरिवंश राय बच्चन और तेजी बच्चन की संतान हैं अत: उनमें संस्कारवान होने के तमाम गुण भी विद्यमान हैं।
 
कामुक और बलात्कारी बाबाओं के बेनकाब होने का सिलसिला
कभी बाबा वेशधारी लोगों पर धर्म के नाम पर धंधा करके भारी भरकम सम्पत्ति जटु ान े और उसके बतू े एश्े ा करन े के आरोप लगा करत े थ े अब एसे े कर्इ बाबाओ ं पर युवतियों और महिलाओं से छेड़छाड़ करने और यौन उत्पीडऩ करने के आरोप लग रह े ह ंै और उन्ह ें जले के सीखं चो ं के पीछ े भजे ा जा रहा ह।ै बात नित्यानदं स े आसाराम रामरहीम के बाद कौशलेन्द्र प्रपन्नाचार्य जैसे प्रभावी नाम वाले खोटे सिक्के से होते हुए बाबा सीताराम तक आ गई है।
 
संघ और हिंदी : इतना तो करें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अ.भा. कार्यकारी मंडल की बैठक आजकल भोपाल में हो रही है। यहां गैर-हिंदीभाषी क्षेत्रों के प्रचारकों की विशेष बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में सर संघचालक मोहन भागवत इन प्रचारकों को ‘मातृभाषा अभियान’ चलाने की प्रेरणा देंगे याने प्राथमिक शाला के बच्चों को अंग्रेजी की चक्की में पिसने से बचाएंगे।
 
हरियाणा फिर भी बेहतर है पूरी तस्वीर धुंधली क्यों?
हरियाणा में लड़कियों को जन्म लेने से पहले भ्रूण में मार देने की समस्या, महिलाओं को लेकर रुढि़वादी विचार आदि सामाजिक मुद्दे हमेशा चर्चा का विषय रहे हैं। लेकिन हाल फिलहाल की रिपोर्ट देखकर लगता है कि हरियाणा तो फिर भी बेहतर है देश की पूरी तस्वीर धुंधली क्यों है? भारत के नक्शे में देखिए पूरा बायां हिस्सा लाल निशान से रंगा नजर आएगा।
 
14 वर्षों से प्रदेश शिशु मृत्यु दर में अग्रणी, आत्मचिंतन जरूरी !
राजा प्रजा का पालक होता है और जैसा राजा वैसी प्रजा। ये कहावत पुरानी जरूर हो गयी पर इनमे बहुत गहरे अर्थ छिपे है। प्रजातंत्र में राजा जनता पर निर्भर होता भी हैं और होता ही हैं। पर वर्तमान परिप्रेक्ष्य में राजा जब अधिक दिनों तक सत्ता में रह जाता हैं तो उसे अहसास होता हैं की राज्य शांति से चल रहा हैं और होता भी हैं कारण बहुत दिनों का शासक निर्भीक होकर शासन करता हैं और उसे इतने अधिक सहायक हो जाते हैं जैसे निज़ाम के यहाँ उसकी पांच सौ औरतें थी उसे खुद नहीं पता था की कौन कौन उसकी औरतें थी।
 
धोखा या हम धोखे में?
चीन भारत को धोखा दे रहा है या भारतवासियों को धोखे में रखा गया? खबर यह है कि डोकलाम के पास चीन ने अपने जवानों की तैनाती बढ़ा दी है। पिछले जून के मध्य से ढाई महीनों तक भारत-भूटान-चीन सीमा पर मौजूद इस जगह पर गतिरोध चला था। विवाद उस क्षेत्र में चीन के सडक़ बनाने से शुरू हुआ था।
 
ये आईबी का काम!
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने वॉक फ्री फाउंडेशन (डब्लूएफएफ) नामक एनजीओ से मिल कर पिछले महीने आधुनिक गुलामी पर एक वैश्विक रिपोर्ट जारी की। ये रिपोर्ट पिछले कई सालों से जारी हो रही है। इसमें कोशिश दासता को आधुनिक अर्थों में समझने का है। जैसे हर प्रवृत्ति या प्रथा का अर्थ युग के साथ बदलता है, वही बात गुलामी पर भी लागू होती है।
 
टूट के कगार पर स्पेन?
स्पे‍न का संकट बढ़ गया है। रविवार को कैटेलोनिया प्रांत में अलगाव के मुद्दे पर आयोजित जनमत संग्रह को रोकने की जैसी कोशिश स्पेन सरकार ने की, उससे मामला शांत होने के बजाय और सुलग गया। स्पेन सरकार ने पहले ही जनमत संग्रह को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। इसके बावजूद कैटेलोनिया प्रशासन इस पर कायम रहा। हिंसा के बीच हुए जनमत संग्रह हुआ।
 
मूंदहू आंख कतहूं कछु नहीं!
पिता को बेटे ने जवाब दिया (चर्चा है कि दिलवाया गया)। यशवंत सिन्हा ने कहा कि देश की बदहाल होती अर्थव्यवस्था के बारे में वे नहीं बोलेंगे, यह उनका अपने "राष्ट्रीय कर्त्तव्य" से चूकना होगा। तो अगले दिन उनके बेटे- केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने टाइम्स ऑफ इंडिया में लेख लिख कर जवाब दिया। जयंत सिन्हा के लेख का सार है कि सब ठीक-ठाक है। देश तेजी से प्रगति कर रहा है।
 
जड़ से ख़त्म करो रैगिंग का रोग
रै गिंग की वजह से गलगोटिया कॉलेज में एक छात्र का डिप्रेशन का शिकार होना और मौत को गले लगाना अफसोसजनक खबर है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश और स्पष्ट गाइड लाइन के कई साल बाद भी इस तरह की खबरें आना दु:खद भी है और आश्चर्यजनक भी।