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कांग्रेसी मुख्यमंत्री कुछ कर दिखाएं
पांच राज्यों में हुए चुनावों के नतीजों के कारण भाजपा का मनोबल पातालगामी हो रहा है और कांग्रेस का गगनचुंबी! लेकिन थोड़ी गहराई में उतरें तो आपको पता चलेगा कि ये दोनों मनस्थितियां अतिवादी हैं। सच्चाई कहीं बीच में है। मध्यप्रदेश और राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस, दोनों को जनता ने अधर में लटका दिया।
 
कांग्रेसमुक्त या मोदीमुक्त भारत?
कांग्रेसमुक्त भारत का नारा देने वाले नरेंद्र मोदी को क्या अब मोदीमुक्त भारत के लिए तैयार होना होगा? इन पांचों राज्यों में अभी जो चुनाव लड़े गए हैं, वे किसके नाम पर लड़े गए हैं? किस चेहरे को सबसे बड़ा चेहरा दिखाया गया है? किसकी उपलब्धियों के ढोल पीटे गए हैं? उन नेताओं के नहीं, जो इन प्रदेशों के मुख्यमंत्री थे या पार्टी-अध्यक्ष थे।
 
अब ‘मिनी मैर्केल’ का दौर!
पिछले हफ्ते जर्मनी में आनेग्रेट क्रांप-कारेनबावर को सत्ताधारी सीडीयू पार्टी का अध्यक्ष चुन लिया गया। वे पार्टी अध्यक्ष के रूप में जर्मन चांसलर अंगेला मैर्के ल का स्थान लेंगी। क्रांप-कारेनबावर मैर्के ल की करीबी रही हैं। लेकिन अब उन्होंने कहा है कि उनकी अपनी शख्सियत है। उन्हें ‘मिनी मैर्के ल’ ना समझा जाए।
 
भारत की सबसे बड़ी दुश्मन
कहते हैं कि आदमी सांस न ले सके तो मर जाएगा लेकिन अब सांस लेने से आदमी मर रहा है। सांस लेने पर जो हवा नाक से अंदर जाती है, उससे पिछले साल भारत में 12 लाख 40 हजार लोगों की मौत हो गई। उनकी मौत का कारण कोई आतंकवादी हमला नहीं, कोई आगजनी या गोलीबार की घटना नहीं, कोई आत्महत्या या कैंसर की बीमारी नहीं।
 
लोकसभा की राह तय करेंगे नतीजे
पांच राज्यों के एक्जिट पोल अनुमान ने कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए उम्मीदों का आसमान खुला रखा है। लेकिन असल नतीजे जब 11 तारीख को आएंगे तो सबकी उम्मीदें एक जैसी नहीं रह पाएंगी। कांग्रेस और भाजपा दोनों में से जो भी पीछे रहा उसकी मेहनत बहुत बढ़ जाएगी।
 
मिशेल रामबाण है, भाजपा का
अगस्ता-वेस्टलैंड हेलिकाह्रश्वटरों के सौदे में बिचौलिए का धंधा करने वाले क्रिश्चियन मिशेल को आखिरकार हमारी सरकार ने धर दबोचा है। वह बधाई की पात्र है। 3000 करोड़ रू के इस सौदे में लगभग 300 करोड़ रु. की रिश्वत बांटने वाले इस दलाल को दुबई से पकडक़र अब दिल्ली ले आया गया है।
 
कुंभ मेले के भव्य आयोजन की तैयारी
आ गाज खुशनुमा हो तो अंजाम अच्छा ही होता है। यह अहसास अगले वर्ष (14जनवरी से) प्रयागराज में शुरू होने जा रहे अर्धकुंभ की तैयारियों को देखकर पक्का हो जाता है। अर्धकुंभ की भव्यता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्साहित होकर अर्धकुंभ को कुंभ का नाम दे दिया। योगी सरकार कुंभ को दिव्य रूप देने में लगी है। योगी चाहते हैं कि इस बार का आयोजन पिछले सभी आयोजनों से भव्य ही नहीं विशाल भी हो।
 
इमरान मानें राजनाथ की बात
जिस बात को मैं पिछले कुछ वर्षों से पाकिस्तान के राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों को कहता रहा हूं, मुझे खुशी है कि वही बात अब भारत सरकार के गृहमंत्री राजनाथ सिहं न े सावर्ज नकि रुप स े कह दी ह।ै राजनाथ जी न े पाकिस्तान की सरकार स े कहा है कि यदि वह आतंकवाद से अकेली नहीं लड़ सकती तो भारत उसका साथ देने को तैयार है।
 
देश का पैसा लूटने वाले बख्शे न जाए
दे श अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर कई संकटों से जूझ रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आर्थिक अपराध करके दूसरे देश भागने वालों पर नकेल के लिए जी-20 में पेश किया गया। नौ सूत्रीय फार्मूला सामयिक और बहुत जरूरी कदम है। भारत हजारों करोड़ रूपए का घोटाला करके दूसरे देशों में भागे लोगों की वजह से आंतरिक स्तर पर जद्दोजहद कर रहा है। विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चौकसी के मामले में जटिल प्रक्रियाओं की वजह से मामला उलझा हुआ है।
 
कानून का मंदिर खंडित मत करना
मैं भी रामभक्त हूँ। सनातन धर्म में मेरी आस्था है। प्रभु के श्री चरणों में असीम शांति मिलती है। इसलिए साईं धाम भी जाता हूँ। मेरा मानना है कि पूजा, इबादत निजी आस्था का मसला है। इसपर सार्वजनिक चर्चा जरूरी नहीं है। लेकिन कई बार सार्वजनिक चर्चा के लिए बाध्य होना पड़ता है।
 
क्या यह दबी चिंगारी को हवा देने की कोशिश है?
अभी ज्यादा दिन नहीं हुए थे जब सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत ने एक कार्यक्रम के दौरान पंजाब में खालिस्तान लहर के दोबारा उभरने के संकेत दिए थे। उनका यह बयान बेवजह नहीं था क्योंकि अगर हम पंजाब में अभी कुछ ही महीनों में घटित होने वाली घटनाओं पर नजर डालेंगें तो समझ में आने लगेगा कि पंजाब में सब कुछ ठीक नहीं है। बरसों पहले जिस आग को बुझा दिया गया था उसकी राख में फिर से शायद किसी चिंगारी को हवा देने की कोशिशें शुरू हो गईं हैं।
 
आश्चर्य है कि यह सब पहले ही क्यों नहीं किया गया?
यह एक सार्थक पहल है कि झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाकों से जरूरी सूचनाएं हासिल कर पाने के लिए सीआरपीएफ के जवानों को स्थानीय भाषा व वहां की संस्कृति से रूबरू कराया जा रहा है। उन्हें आदिवासी और स्थानीय लोगों के बोलने के तरीके और उनके रीति-रिवाजों की ट्रेनिंग दी जा रही है। देश में नक्सल विरोधी गतिविधियों से निपटने में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की प्रमुख भूमिका होती है।
 
क्या इस कीमत पर विकास सोचा था आपने ?
अब तक तो हमने प्रकृति का केवल दोहन किया है। अब समर्पण करना होगा। जितने जंगल कटे हैं उससे अधिक बनाने होंगे, जितने पेड़ काटे उससे अधिक लगाने होंगे, जितना प्रकृति से लिया, उससे अधिक लौटना होगा। प्रकृति तो माँ है, जीवनदायिनी है, दोनों हाथों से अपना ह्रश्वयार लुटाएगी। इस धरती को हम जरा सा हरा भरा करेंगे, तो वो इस वातावरण को एक बार फिर से ताजगी के एहसास के साथ सांस लेने लायक बना देगी।
 
सीबीआई की साख पर सवाल बरकरार
सीबीआई में पिछले माह घटित घटनाक्रम की चर्चा फिलहाल सीवीसी और सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवायी के कारण मद्धम पड़ गयी है और मोदी सरकार तथा कारपोरेट मीडिया ने इस घटनाक्रम से भडक़ी आग की लपटों को शांत करने के लिए मुतवातिर चुह्रश्वपी साध ली है क्योंकि सीबीआई के नम्बर 1 अधिकारी यानी निदेशक आलोक वर्मा और नम्बर-2 अधिकारी यानी विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच छिड़ी रिश्वतखोरी के परस्पर आरोपों और एफआईआर बाजी तथा मामले में तथा पीएमओ के हस्तक्षेप ने मामले को इतना मचा दिया था कि सीबीआई की साख और विश्वसनीयता के ही ध्वस्त हो जाने का शोर देशभर में मच गया था।
 
संघ के खिलाफ और हिन्दुत्व के करीब जाती कांग्रेस के निहितार्थ
सुनने में यह बात भले ही अजीब लगती हो लेकिन हकीकत यही है कि कांग्रेस नेता यदि मंदिर और मस्जिद समेत अन्य धार्मिक स्थलों का रुख न करें तो भाजपा और उसके सहयोगी संगठन कहते देखे जाते हैं कि ये अधर्मी लोग धर्म प्रधान देश की जनता के साथ क्या न्याय कर पाएंगे?
 
ऐसे थे बच्चों के ह्रश्वयारे चाचा नेहरू
भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू की शख्सियत से भला कौन परिचित नहीं होगा। बच्चों से उन्हें इतना लगाव था कि उन्हें ह्रश्वयार से ‘बच्चों के ह्रश्वयारे चाचा नेहरू’ कहा जाने लगा था। अपने कोट की जेब पर हमेशा प्रेम का प्रतीक गुलाब का फूल लगाए रहने वाले पंडित जवाहरलाल नेहरू बच्चों से इतना स्नेह करते थे कि आज भी वह देश के प्रथम प्रधानमंत्री से पहले ‘चाचा नेहरू’ के रूप में ही अधिक याद किए जाते हैं।
 
कानून से परे जातीय पंचायतों के फरमान!
हमारे यहाँ जातीय पंचायतें और खाप आदि अब भी बेहद मजबूत हैं। उनके फरमान अक्सर दश्े ा के काननू ो ं के दायर े स े बाहर होत े ह।ंै हाल ही राजस्थान के जोधपरु म ें एक 22 वर्षीय सी.ए.युवती ने थाने पहुँचकर आत्महत्या कर ली।
 
नाम नहीं, काम की दरकार है
इलाहाबाद प्रयागराज हो गया। फैजाबाद अयोध्या हो गया। अहमदाबाद शायद कर्णावती हो जाए। आगरा से लेकर लखनऊ तक नाम बदलने की हलचल तेज नजर आ रही है। मुगलसराय स्टेशन पंडित दीन दयाल उपाध्याय को समर्पित किया जा चुका है।
 
आपातकाल बनाम ‘आफत काल’
कांग्रेस विरोध की राजनीति करने वाले नेता 25 जून 1975 की तिथि को आज तक भुला नहीं पा रहे हैं। जून 1975 से मार्च 1977 के मध्य घोषित किया गया आपातकाल का दौर आज भी न केवल याद किया जाता है बल्कि इसे देश की राजनीति में एक काले अध्याय के रूप में चिन्हित किया जाता है।
 
आज भी ऐसे पूर्वाग्रह!
पंजाब के फाजिल्का जिले से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां के एक सरकारी बालिका विद्यालय में शौचालय के अंदर एक फेंका हुआ सैनेटरी पैड मिला तो महिला टीचरों ने यह देखने के लिए कुछ छात्राओं के कपड़े उतरवा दिए कि उनमें से किसने सैनेटरी पैड पहना है। इसका वीडियो क्लिप सामने आया। उसमें सातवीं क्लास की कुछ लड़कियां रोते हुए यह शिकायत करती दिखीं कि कुंडल गांव में उनके विद्यालय परिसर में महिला टीचरों ने उन्हें निर्वस्त्र करने का आदेश दिया था।