संपादक

अस्थिरता की गहराई आशंका
इराक के तेल समृद्ध किरकुक इलके में रहने वाले कुर्दों के विशाल बहुमत ने स्वतंत्र दश्े ा के निमाणर्् ा के पक्ष म ें मतदान किया। उस क्षत्र्े ा म ें कर्दु पार्टी का शासन ह,ै जिसन े वहा ं जनमत सगं ह्र आयोजित किया। वोट डालने वाले 33 लाख लोगों में से 92 फ़ीसद ने अलगाव का समर्थन किया।
 
राहुल गांधी इतने अहम क्यों?
भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में बेशक मुख्य एजेंडा आगामी चुनावों की तैयारी था। लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि पार्टी नेतृत्व ने राहुल गांधी पर हमला बोलने को इस तैयारी की खास रणनीति बनाया। कांग्रेस उपाध्यक्ष पर निशाना साधने की जिम्मेदारी खुद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने संभाली।
 
ये तरीका क्या है?
क्या‍ उत्तर प्रदेश सरकार चाहती है कि वहां कोई समुदाय किसी भी तरह की अपनी मांग ना उठाए? क्या हर तरह के विरोध से निपटने का एकमात्र तरीका उसे दमन ही नजर आता है? वरना बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में छात्राओं पर लाठीचार्ज क्यों होता? शनिवार रात पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राओं पर लाठियां चलाईं, जिसमें कई छात्राएं घायल हुईं। मौके पर सुरक्षा बलों की जबरदस्त तैनाती है। गौरतलब है कि बीएचयू का ये आंदोलन राजनीतिक नहीं है।
 
"हैवान" से कैसे संबंध?
संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि पाकिस्तान हैवानियत की हदें कार कर बेगुनाहों की हत्या कराता है। कमसे- कम भारत में पाकिस्तान के ऐसे चित्रण पर किसी को आश्चर्य या एतराज नहीं होगा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहित खाकन अब्बासी ने महासभा में अपना भाषण भारत और कश्मीर पर केंद्रित रखा था।
 
कृत्रिम जीवन के खिलाफ
ये फैसला ब्रिटेन में आया, लेकिन उससे अपने देश में भी एक जरूरी बहस को गति मिल सकती है। ब्रिटिश अदालत ने निर्णय दिया कि किसी जानलेवा बीमारी के कारण मरणासन्न मरीज से लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाने के लिए आगे से न्यायालय की अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी।
 
चुने उसे जो आकाओं की नहीं, आपकी बात करे
गु डगांव नगर निगम चुनाव आज होने हैं। किसी भी मुद्दे पर संवाद करने से पहले मैं अपील करना चाहता हूं कि बड़ी संख्या में घरों से निकलकर मतदान करें। यह आपके नगर,आपके मोहल्ले की दिशा तय करने का प्रश्न है। अगले पांच साल अपने गिले शिकवे-समस्याएं किसे हम सहजता से सुना सकते हैं।
 
ये है अपना विकास!
उद्घाटन से कुछ ही घंटे पहले बिहार में एक बांध का टूट गया। इससे जुड़े तथ्यों पर गौर कीजिए। ये डैम भागलपुर जिले के कहलगांव में बन रहे उस बटेश्वर गंगा पंप कैनाल प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसे 1977 में योजना आयोग की मंजूरी मिली थी। तब इस पर 14 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान लगाया गया था।
 
परले दर्जे का पक्षपात
तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष पी. धनपाल ने पहले दर्जे का पक्षपात भरा व्यवहार किया। दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधानों पर गौर करें, तो उनके इस व्यवहार का कोई औचित्य नजर नहीं आएगा। विधानसभा अध्यक्ष ने दिनाकरण गुट के 18 विधायकों की सदस्यता इसी कानून के तहत रद कर दी। ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कडग़म (एआईएडीएमके) के ये विधायक शशिकला के समर्थक थे। यह गुट मुख्यमंत्री ई. पलानीस्वामी और उप-मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम का विरोध कर रहा है।
 
चुनौती औचित्य सिद्ध करने की
रोहिंग्या मुद्दे पर एनडीए सरकार ने सामान्य से हटकर रुख लेने का साहस दिखाया है। म्यामांर से आए से आए ये शरणार्थी भारत की सुरक्षा के लिए खतरा हैं- ये बात उसने औपचारिक रूप से सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने हलफनामे में कही है।
 
दहशतगर्दी का सियासी चेहरा
पाकिस्तान के इस घटनाक्रम पर भारत को अवश्य निगाह रखनी चाहिए। ठोस संकेत हैं कि पाकिस्तान की सेना ने रणनीतिक मकसदों के लिए आतंकवाद का इस्तेमाल जारी रखने का एक नया तरीका अपनाया है। वह आतंकवादी समूहों से संबंधित पार्टियों को देश की राजनीति में बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है।
 
सरदार सरोवर का समर्पण
आलोचकों ने कहा है कि गुजरात विधानसभा चुनाव के मद्देनजर वहां विकास का कथानक प्रस्तुत करने के लिए नरेंद्र मोदी इतने बेसब्र हैं कि उन्होंने पितृपक्ष का भी ख्याल नहीं रखा। भारतीय जनता पार्टी को हिंदू मान्यताओं से चलने वाला दल समझा जाता है। मगर मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन की नींव श्राद्धकाल में डाली गई।
 
संबंधों का बहु-आयामी दायरा
प्रधानमंत्री शिंजो आबे की यात्रा ने भारत-जापान संबंधों में नए आयाम जोड़े। अब तक आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग दोनों देशों के संबंधों का आधार था। लेकिन अब रक्षा और सुरक्षा में सहयोग भी उतना ही अहम हो गया है। संबंधों में जुड़े नए आयामों के पीछे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में उभरते नए समीकरणों की खास भूमिका है।
 
मेजबानी का आकर्षण घटा?
ओलिंपिक खेलों की मेजबानी 2024 के लिए पेरिस और 2028 के लिए लॉस एंजिल्स को मिली है। लेकिन ध्यान इस बात ने खींचा कि मेजबानी पर दावा जताने सिर्फ ये शहर ही होड़ में थे। दोनों 2024 की मेज़बानी चाहते थे।
 
विषमता की बढ़ती खाई
थॉमस पिकेटी दुनिया में जाना-माना नाम हैं। इस पर लगभग सहमति है कि 2013 में आई उनकी किताब ‘कैपिटल इन ट्वेन्टीफर्सट सेंचुरी’ ने दुनिया भर में बढ़ती आथिर्क गरै -बराबरी पर नर्इ समझ पद्र ान की। लेि कन तब पिके टी न े भारत के बार े म ें ज्यादा कछु नही ं बताया था। इस बार े म ें पछू न े पर उन्होनं े कहा था कि भारत म ें आंकड़ों का घोर अभाव है।
 
बदहाली का फैलता दायरा
ताजा आधिकारिक सूचनाओं ने देश में आर्थिक बदहाली गहराने की पुष्टि की है। भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी सालाना रिपोर्ट में घाटा दर्शाने वाले मुख्य संकेतकों का हवाला देते हुए कहा कि 2017-18 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में केंद्र सरकार की राजकोषीय हालत बिगड़ी। राजस्व घाटा और सकल राजकोषीय घाटा- दोनों बजट पूर्व अनुमान की तुलना में ज्यादा रहे।
 
सवाल बच्चों की सुरक्षा का
गुडग़ांव के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में सात वर्षीय प्रद्युम्न से यौन दुर्व्यवहार और हत्या के सदमे से लोग उबरे भी नहीं हैं कि राष्ट्रीय राजधानी के गांधी नगर इलाके में एक पांच वर्षीय छात्रा से बलात्कार का मामला सामने आ गया। वहां एक प्राइवेट स्कूल परिसर में स्कूल के ही एक चपरासी ने ये कुकर्म किया। इन दोनों मामलों में कई तथ्य समान हैं।
 
करोड़ों मां-बाप के भरोसे का कत्ल
गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में दूसरी कक्षा के छात्र प्रद्युम्न की दर्दनाक मौत। मां बाप की दुनिया उजड़ गई। एक होनहार बिना किसी गलती के, पूरी तरह स्वस्थ, हंसते खेलते हुए भी अपनी जिंदगी न जी सका। क्योंकि कोई अपनी गलती छिपाने के लिए उसका कत्ल करने पर आमादा था। वो कोई कौन था?
 
कसौटी पर केंद्र की नीयत
जब से चुनाव के लिए नामांकन भरते समय संपत्ति का ब्योरा देना अनिवार्य किया गया, जन-प्रतिनिधियों की समृद्धि में हैरतअंगेज करने वाली वृद्धि की खबरें आम हो गईं। पांच साल में पांच से 12 गुना तक संपत्ति बनने की खबरें गुजरे वर्षों में आईं। लेकिन यह मालूम नहीं होता कि वो संपत्ति आई कहां से?
 
जनरल रावत की चेतावनी
चीन के शहर शियामन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की घंटे भर चली वार्ता में सहमति बनी कि दोकलाम विवाद को पीछे छोडक़र भविष्य की तरफ देखा जाए। उसके पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज कह चुकी थीं कि युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है।
 
विवेकहीनता के दौर में!
किसी घटना के बारे में बिना पूरे तथ्य इक_ा किए, बिना संदर्भ में गए और बिना सबं ंि धत पक्षो ं के परु ान े रिकार्डॅ पर गौर किए जो प्िर तक्रि या जतार्इ जाती ह,ै उस े विवेकहीनता का उदाहरण ही कहा जाना चाहिए। सोशल मीडिया के इस दौर में कोई खबर आते ही उस पर टिह्रश्वपणी करने की होड़ में शामिल हो जाना आम प्रवृत्ति है।