संपादक

घिनौना तंत्र-सड़ा सिस्टम, किस पर करें गर्व?
बि हार में मुजफ्फरनगर के बालिकागृह की घटना देश के लिए बेहद शर्मनाक है। दो दर्जन के करीब लड़कियों से बलात्कार की पुष्टि हुई है। सबसे घिनौना तथ्य ये है कि यहां कि लड़कियों को हवश का शिकार बनाने के लिए नेता, विधायक, मंत्री और अधिकारियों के यहां भेजा जाता था। विरोध करने वाली लड़कियों को मारकर जमीन में गाड़ दिया गया।
 
कुमारस्वामी ने एक्टिंग भी सीख ली!
कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने अपने सियासी-रुलाई प्रसंग पर सफाई दी है। उनके स्पष्टीकरण से कांग्रेस ने अवश्य राहत महसूस की होगी लेकिन वह यह दावा करने की स्थिति में नहीं है कि कुमारस्वामी की बातों पर कितना भरोसा किया जा सकता है।
 
सिंधिया की सीख होगी कितनी कारगर !
चुनाव का मौसम ऐसा लगता हैं जैसे सब पार्टियों के पास कल्पवृक्ष आ गए हो जिनके सामने जो चाहो वह मिल जाता हैं। एक नवयुवक चलते चलते बहुत थक गया था। वह एक वृक्ष की छाया में आकर लेट गया। थोड़ी देर आराम करने के बाद उसे ह्रश्वयास लगी यह सोचा ही था की उसके सामने सोने की गिलास में अचानक पानी आ गया।
 
मुसीबत में दूध किसान
अब दूध उत्पादक मुसीबत में हैं। महाराष्ट्र में वे आंदोलन की राह पर हैं। वे प्रति किलो दूध कम-से-कम पांच रुपये की सब्सिडी मांग रहे हैं। हरियाणा में भी दूध उत्पादक परेशान हैं। उनकी शिकायत है कि सहकारी दुग्ध समितियां (वीटा मिल्क ह्रश्वलांट) का मुनाफा हर साल बढ़ता जा रहा है, लेकिन किसानों को नुकसान हो रहा है।
 
आतंकवादियों का अपना कोई धर्म नही
आज जो कुछ जम्मू - कश्मीर में हो रहा है, किसी से छिपा नहीं है। वहां के युवा गुमराह हो चले है, जो आतंकवादी गिरोहों के शिकार होकर अपने पर ही धावा बोल रहे है। जम्मू - कश्मीर में पत्थरबाजी की घटना सबसे खतरनाक खेल है जहां अपने ही अपने के खिलाफ खड़े दिखाई दे रहे है।
 
योग दिवस पर वीआईपी कलचर रहा हावी
समालखा चतुर्थ विश्व योगा दिवस पर नई अनाज मंडी में सैकड़ों महिलापुरू षों सहित बच्चो व बुजुर्गों ने भी उत्साहपूर्वक योग व प्राणायाम किया। जिसका विधिवत्त शुभारम्भ एसडीएम गौरव कुमार द्वारा किया गया। आयुष विभाग, पतंजलि योग समिति व भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित कार्यक्रम में जहां लोगों में उत्साह दिखा वहीं वीआईपी कलचर भी इस पर भारी रहा।
 
फीफा विश्व कप की अद्भुत चमक
भ ले ही भारत सहित दुनियाभर के अनेक देशों में खेल प्रेमियों और यहां तक कि छोटे-छोटे बच्चों तक पर क्रिकेट की खुमारी छाई नजर आती है किन्तु आपको जानकर आश्चर्य होगा कि फुटबाल न केवल दुनिया का सबसे लोकप्रिय खेल है बल्कि इसमें पैसा भी क्रिकेट के मुकाबले कई गुना ज्यादा बरसता है।
 
भाजपा-पीडीपी गठबंधन से देश को क्या मिला.....?
भाजपा ने कल पीडीपी से अपना नाता तोड़ लिया। इस पर कोई आश्चर्य नहीं करना चाहिए। जब पीडीपी और भाजपा की बेमेल शादी हुई थी तब ही यह तय हो गया था कि इनका रिश्ता पाँच साल का नहीं है, बीच में ही कभी भी तलाक़ की नौबत आ जाएगी।
 
बच्चे के लिए इस प्रकार करें स्कूल का चयन
ब च्चे के जन्म के बाद से ही मां-बाप चाहते हैं कि वह बड़े होकर उनसे भी सफल व्यक्ति बने। इसके लिए वह स्कूल जाने की उम्र से पहले ही अच्छे स्कूलों की तलाश शुरु कर देते हैं। कई स्कूल बड़े नामी होते हैं पर उनकी फीस आपके बजट में नहीं होती।
 
प्रणब दा तू सी ग्रेट हो....
आरएसएस के मुख्यालय पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का जाना और वहाँ पर सारगर्भित भाषण देना उन तमाम अंदेशों को ख़त्म कर गया जो जाने से पहले लगाए जा रहे थे। प्रणब दा के नागपुर जाने से कांग्रेस अत्याधिक सहमी हुई थी। संघ के समारोह में दादा कही ं कछु एसे ा न कह दें जिससे कांग्रेस की साख को आघात लग जाए।
 
मुलाकात से पहले अमेरिका के इरादों को जाहिर करतीं टकराव की बाते
अ मेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के प्रमुख नेता किम जोंग उन की संभावित 12 जून की मुलाकात को लेकर दुनियाभर में चर्चे हो रहे हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह मुलाकात बताएगी कि दुनिया शांति के रास्ते पर जाने वाली है या फिर युद्ध की तैयारी में जुटना होगा। दरअसल परमाणु परीक्षणों को लेकर उत्तर कोरिया के प्रमुख नेता किम जोंग उन को दुनियाभर में सनकी शासक घोषित कर युद्ध थोपने जैसा काम अमेरिका ने कर रखा था।
 
नए विवाद में फेसबुक
सोशल मीडिया साइट फेसबुक एक और डेटा विवाद में फंस गई है। ऐसा लगता है कि ये सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। नया मामला फेसबुक और चीनी कंपनियों के डेटा एक्सेस से जुड़ा है। इस मामले में फेसबुक ने माना है कि वह चीन की कई हैंडसेट निर्माता कंपनियां मसलन हुवावेई, लेनोवो, ओह्रश्वपो और टीसीएल के साथ डेटा साझा करता रहा है।
 
शांति का मार्ग प्रशस्त करने भारत-पाक रिश्तों की दुहाइ
चीन ने एक बार हिन्दी-चीनी भाई-भाई का नारा लगाते हुए हिन्दुस्तान की पीठ पर खंजर घोंप दिया था, जिसके जख्म आज तक भर नहीं पाए हैं। जी हॉं हम बात वर्ष 1962 में भारत और चीन के बीच हुए युद्ध की ही कर रहे हैं, जिसमें भारत की बुरी तरह हार हुई थी।
 
निपाह वायरस से करें बचाव
पिछले कुछ दिनों से निपाह वायरस के चलते तकरीबन दो दर्जन लोगों की मौते होन े स े लोग डर हएु ह।ंै निपाह वायरस चमगादडो़ ं की लार स े फै लता ह।ै चमगादड ़ (बैट) जब किसी फल के संपर्क में आते हैं तो यह वायरस उन फलों में भी आ जाता है।
 
मौत का पर्याय बना निपाह वायरस
केरल के कोझिकोड जिले में रहस्यमय और बेहद घातक निपाह वीषाणु की चपेट में आकर 10 लोगों की मौत हो गई और छह की हालत नाजुक बनी हुई है। इस वीषाणु की चपेट में आए 25 रोगियों को विशेष निगरानी के लिए आईसीयू में रखा गया है।
 
आदर्श पत्रकार थे पंडित नेहरू
पंडित जवाहर लाल नेहरू के अनेक सहयोगियों का यह मत रहा कि अगर भारत के प्रथम प्रधान मंत्री राजनीति में पूरी तरह से सक्रिय न होते वे अपने जीवन का बड़ा भाग प्रधान मंत्री निवास में नहीं, किसी बड़े दैनिक पत्र के सम्पादक के रूप में बिताते।
 
कलयुग के यह उपदेशक...
हमारे देश में उपदेशकों की गोया बाढ़ सी आई हुई है। धर्म क्षेत्र से लेकर राजनीति के क्षेत्र तक हर जगह ‘मुफ्त’ में ही ज्ञान उंडेला जा रहा है। और इस ज्ञान वर्षा का परिणाम क्या है यह बताने की ज़रूरत भी नहीं है।
 
प्रदूषण रोकने, हिंसक प्रदर्शन और पुलिस गोलीबारी का औचित्य
एक फैक्ट्री से रहवासी इलाके में इस कदर प्रदूषण फैलता है कि स्थानीय लोग महीनों प्रदर्शन करने पर मजबूर हो जाते हैं, लेकिन जब उनकी सुनवाई नहीं होती तो मांगकर्ता प्रदर्शनिकारी हिंसा पर उतारु हो जाते हैं। वहीं दूसरी तरफ अधिकांश मामलों में मूकदर्शक बनी रहने वाली पुलिस भी हिंसक भीड़ को काबू करने के नाम पर इस कदर गोलीबारी करती है कि लोगों को जलियांबाला बाग की याद ताजा हो आती है।
 
केरल में निपाह का प्रकोप
केरल में एक नई बीमारी का आतंक है। ये रोग निपाह नाम के वायरस से फैल रहा है। निपाह वायरस पशुओं से मनुष्य में फैलता है। इससे पशु और मनुष्य दोनों गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं। इस विषाणु के स्वाभाविक वाहक चमगादड़ हैं।
 
जैव विविधता भारत की धरोहर है
जि स तरह से आज पूरी दुनिया वैश्विक प्रदूषण से जूझ रही है और कृषि क्षेत्र में उत्पादन का संकट बढ़ रहा है, उस परिप्रेक्ष्य में जैव विविधता का महत्व बढ़ गया है। लिहाजा हमें जहां जैव कृषि सरंक्षण को बढ़ावा देने की जरूरत है, वहीं जो प्रजातियां बची हुई हैं, उनके भी सरंक्षण की जरूरत है। क्योंकि आज 50 से अधिक प्रजातियां प्रतिदिन विलुप्त हो रही हैं। यह भारत समेत पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है।