संपादक

क्या लोकनायक जयप्रकाश की डगर पर चल पड़े सिन्हा
पू र्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने राष्ट्रीय मंच बनाया है। इस मंच के माध्यम से उन्होंने आंदोलन का आगाज किया है। इस आंदोलन में अन्य राजनीतिक दलों के नेता भी शामिल हो रहे हैं। यशवंत सिन्हा ने इस आंदोलन को प्रजातंत्र और संवैधानिक संस्थाओं के खतरे में होने की बात कहते हुए यह आंदोलन शुरु किया है।
 
क्या यह समझौता रोहिंग्या समस्या का अंतिम समाधान है?
दक्षिण एशियाई देशों को हिला देने वाली म्यांमा की रोहिंग्या समस्या का हल क्या सचमुच ढूंढ़ लिया गया है? क्योंकि बांग्लादेश और म्यांमा के बीच शरणार्थियों की वापिसी के सवाल पर सहमत भले बन गई हो, लेकिन समस्या की जड़ तो म्यांमा में है। जरूरी यह है कि वहाँ सेना और रोहिंग्याओं के बीच चल रहा टकराव और उससे उपजी स्थिति सुधरे और वहाँ स्थायी शांति और स्थिरता कायम हो।
 
दिल्ली में दुकानबंदी का दंगल
दिल्ली में दुकानबंदी (सीलिंग) को लेकर बड़ा मजेदार दंगल चल रहा है। दिल्ली में तीन प्रमुख राजनीतिक दल हैं। एक आम आदमी पार्टी, दूसरी भाजपा और तीसरी कांग्रेस! ये तीनों दल अपने मतदाताओं को पटाने में लगे हुए हैं। कोई दल यह नहीं चाहता कि दिल्ली की उन दुकानों पर ताला लग जाए, जो लोगों के घरों से चल रही हैं या घरों के तलघरों से चल रही हैं।
 
आर्थिक समानता के लिए वेतन विसंगति हटाना जरूरी
आ जादी के समय से ही यह सवाल उठता रहा है कि जनप्रतिनिधियों को वेतन लेना चाहिए या नहीं। जनप्रतिनिधि भी क्या उसी तरह काम करते हैं, जैसे कि अन्य कर्मचारी और अधिकारी करते हैं। क्या वे नियमित रूप से विधानसभा या अपने क्षेत्र में जाते हैं। यदि हां, तो जनता को इस बात की शिकायत क्यों रहती है कि उन्होंने चुने गए प्रतिनिधि का चेहरा वर्षों से नहीं देखा। कुछ नेताओं के गायब होने के पोस्टर दीवारों पर चस्पा क्यों होते हैं?
 
प्रदोष व्रत से मिलता है मोक्ष
प्रदोष व्रत में भगवान शिव की उपासना की जाती है। यह व्रत हिंदू धर्म के सबसे शुभ व महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है। हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार प्रदोष व्रत चंद्र मास के 13 वें दिन (त्रयोदशी) पर रखा जाता है। माना जाता है कि प्रदोष के दिन भगवान शिव की पूजा करने से व्यक्ति के पाप धूल जाते हैं और उसे मोक्ष प्राप्त होता है।
 
वरुण गांधी की बेमिसाल सलाह... सांसद वेतन छोड़ें...
यह तो सब को पता है कि नेहरु-गांधी परिवार के दूसरे चश्मो-चिराग़ वरुण गांधी जिनका सियासी ताल्लुक़ भाजपा के साथ है, ने नई तरह की सियासी बहस छेड़ दी है। यूँ तो वरुण गांधी किसी न किसी कारण से सुर्खय़िो में रहते हैं परंतु इस बार उन्होंने जो मुद्दा उठाया है, वह गज़़ब का है।
 
मोदी सरकार लक्ष्य से कितने दूर कितने पास
केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश किए जाने वाले बजट से देश के तमाम लोगों को खासी उम्मीदें हैं। लोकलुभावन बजट की आस में बैठे लोगों को सरकार संतुष्ट कर पाएगी या नहीं यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, इससे पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण के साथ ही बजट सत्र की शुरुआत हो गई।
 
’लाभ का पद‘ बना ’राजनीतिक लाभ‘ का माध्यम....?
प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी ने दिल्ली के एक राष्ट्रीय समाचार चैलन को दी गई विशेष भेंट के दौरान कहा कि "सरकार तथा राजनीतिक दलों को न्यायालयीन कार्यक्षेत्र में हस्तक्षेप से दूर रहना चाहिए", और संयोगवश इसी दिन दिल्ली विधानसभा के बीस विधायकों की सदस्यता लाभ के पद के मामले में निरस्त कर दी गई।
 
सराहनीय अदालती टिह्रश्वपणी : अधर्म करने वाला धार्मिक नहीं हो सकता
पिछले दिनों जयपुर के एक अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से संबंध रखने वाले आठ सदस्यों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई तथा इसके साथ ही प्रत्येक अभियुक्त पर 11-11 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
 
गांधी, गौतम के देश की राजधानी दिल्ली...!
दिल्ली भारत की महान राजधानी जहां सियासी दांव पेचों के दौर चलते हैं। वहां आम आदमी पार्टी केजरीवाल की हुंकार सुनाई देती है तो वहां बिरजू महाराज, अमजद अलि खॉन, यामनी कृष्णमूर्ति आदि के संगीतों की झंकार भी है। मेट्रो में दौड़ लगाने यहां के लोग भागे जा रहे हैं। अपनी मंजिल की तरफ कोई सिसक रहा है और कोई इठलाकर हंस रहा है।
 
लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराना कैसे होगा संभव
प्र धानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा तथा विधानसभा के चुनाव एक साथ कराना चाहते हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने चुनावों के कारण विकास के बाधित होने और चुनाव में अरबों रुपए के खर्च को मुद्दा बनाते हुए लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की बात कही है।
 
तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा... सुभाषचंद्र बोस
अंग्रेजों की जड़ों को उखाड़ फेंकने में जिन अमर शहीदों का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया सुभाषचंद्र बोस उन्हीं में से एक हैं। अपने साहस और बुद्धिमानी से सुभाष ने अपने साथियों और भारतीयों में नया जोश भरा। अपने नेतृत्व से उन्होंने भारत के युवाओं को आजादी की तरफ उत्प्रेरित किया।
 
क्या केवल गरीब ही है सबसे बड़ा ‘मुजरिम’?
गत् 70 वर्षों से देश में लोकतंत्र के होने के बावजूद खासतौर पर सत्ता विरोधी दलों द्वारा यही बताने व जताने की कोशिश की जाती है कि सत्ता में बैठी सरकार पूंजीवादियों, उद्योगपतियों तथा कारपोरेट के हितों का ध्यान रखने वाली सरकार है। कई उत्साही नेता तो यह तक कह देते हैं
 
आर्थिक मोर्चे पर नसीहत करता अमेरिकी शटडाउन
सीनेट में फंडिंग बिल खारिज होने के साथ ही अमेरिका से खबरें आने लगीं हैं कि दिवालिया होने की कगार पर अमेरिका पहुंच चुका है। शटडाउन के चलते लाखों लोग बेरोजगारी की कगार पर पहुंच चुके हैं। लाखों कर्मचारियों को अबैतनिक अवकाश पर भेज दिया जाएगा। इस मार से व्हाइट हाउस के कर्मचारी भी अछूते नहीं रहेंगे, आदि आदि। हकीकत भी यही है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तमाम कोशिशें फेल साबित हुईं हैं और सीनेट में बिल पास नहीं होने की वजह से शटडाउन की स्थिति निर्मित हुई है।
 
वे प्रधानमंत्री हैं, प्रचारमंत्री नही
विदेशी राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों को हमारे प्रधानमंत्री गुजरात क्यों ले जाते हैं ? वे हर किसी विदेशी नेता को नहीं ले जाते। पिछले साढ़े तीन साल में दर्जनों विदेशी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भारत आए हैं लेकिन अहमदाबाद जाने का सौभाग्य अभी तक सिर्फ तीन विदेशी नेताओं को मिला है।
 
न्यायपालिका विवाद : जन आस्था के स्तंभ पर विवाद......!
प्रजातंत्र के पिछले सत्तर सालों में से पिछले साढ़े तीन साल को क्या नाम दिया जाये, यह तो नामकरण करने वाले जाने? किंतु यह सारा देश महसूस कर रहा है कि पिछले साढ़े तीन साल इस देश के लिए शुभ या किसी विशेष उपलब्धि के लिए याद रखने लायक तो कतई नहीं रहें।
 
राजनीतिक आत्ममंथन की आवश्यकता
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के नवनियुक्त अध्यक्ष राहुल गांधी ने जिस समय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली है। वह समय पूरी तरह से कांग्रेस के प्रतिकूल है, जहां पर राहुल और कांग्रेस दोनों के लिये एक नई चुनौती मुंह फाडे खड़ी है।
 
हज-यात्रा अब अपने दम पर
हज-यात्रा में दी जानेवाली सरकारी सहायता को खत्म करने का विरोध कुछ मुस्लिम नेता और संगठन जरुर करेंगे और यह प्रचार भी करेंगे कि आरएसएस के प्रधानमंत्री से इसके अलावा क्या उम्मीद की जा सकती है लेकिन ऐसा करना बिल्कुल गलत होगा।
 
संघ के अनुवांशिक संगठनों की बगावत या नूरा कुश्ती
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुवांशिक संगठनों और सरकार के बीच की दूरियां अब खुलकर सामने आने लगी हैं। यह एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है, या वास्तव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पकड् सरकार और अनुवांशिक संगठनों पर ढीली पड़ रही है।
 
मुद्दा दोगुना आमदनी का
साल 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुना करने के उपाय सुझाने के लिए बनी समिति ने अपनी रिपोर्ट का अगला हिस्सा सरकार को सौंपा है। ये समिति चरणबद्ध ढंग से अपनी रिपोर्ट दे रही है। अशोक दलवई की अध्यक्षता में बनी ये समिति मानती है कि इस लक्ष्य को हासिल करना चुनौती भरा है, लेकिन ऐसा करना संभव है।