संपादक

अब कमल हासन को हिन्दू आतंकवाद नजर क्यों आया
दक्षिण भारतीय फिल्मों से लेकर हिन्दी फिल्मों तक में अपने अभिनय का लोहा मनवा चुके कमल हासन को भी राजनीतिज्ञों की ही तरह अब हिन्दुस्तान में हिन्दूवादी आतंकवाद नजर आ गया है। वैसे इस आशय की बात मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह बहुत पहले कह चुके हैं। उनका भी मानना है कि कुछ कट्टरवादी हिन्दू संगठन आतंकवादियों की ही भाषा बोलते हैं।
 
भाजपा के खजाने पर शिवसेना का कटाक्ष
केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के अकूत खजाने पर अब उसकी ही सहयोगी शिवसेना ने कटाक्ष किया है। शिवसेना ने कहा है कि देश में केवल एक पार्टी के पास ऐसा खजाना है, जिसमें अकूत धन है और इसी धन की बूते यह पार्टी लोगों द्वारा खारिज किये जाने के बावजूद गोवा तथा मणिपुर में सत्ता में आयी है।
 
नेताजी: समरथ को नहिं दोष गुसांई
नेताओं पर चल रहे आपराधिक मुकदमों के बारे में सर्वोच्च न्यायालय ने अब नए सिरे से कठोर रुख अपनाया है। उसने केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की है कि वे इन नेताओं के मुकदमे निपटाने के लिए विशेष अदालतों का इंतजाम करें ताकि अधिक से अधिक एक साल में उनका निपटारा हो सके।
 
बाबरी मस्जिद -राम मंदिर विवाद अनेकांतवाद से संभव
ईश्वर ने शब्द व्यवस्था न की होती और मनुष्य मन रहित होता तो शायद हम बहुत सीमा तक सखु शांि त के साथ बिना भय, यध्ु य के रहत।े एक ओर हम कहत े ह ंै की दुनिया या संसार विनाशिक हैं, सब नित्य हैं, हम क्या लेकर आये थे और क्या लके र जायगें ।े कोर्इ न लके र गया और आज तक न कोर्इ लके र जायगे ा। हा ं आन े वाले समय में शायद हम कफऩ में जेब जरूर रखकर अपनी अपनी सम्पदा लेकर जायेंगे। कारण हम वर्तमान में पद, प्रतिष्ठा, धन, ख्याति के पीछे इतने दीवाने हैं की हमने अपनी पूरी मर्यादें तोड़ दी।
 
विश्व-बैंक: कौनसी गोली ?
विश्व बैंक की इस साल की रपट में भारत अपने 130 वें पायदान से ऊंचा उठकर 100 वें पायदान पर पहुंच गया है। याने उसने 30 पायदान की ऊंची छलांग लगा दी है। ऐसी अच्छी छलांग दुनिया के मुश्किल से सिर्फ 10 देशों ने लगाई है। किस बात की छलांग लगाई है, भारत ने ? यह छलांग हैव्यापार करने की सुविधाओं में और रोजगार पैदा करने के सुधारों में !
 
मानवाधिकार और मूलभूत अधिकार का ऐसा उल्लंघन!
झारखण्ड से आई एक दर्दनाक खबर मानवता को शर्मसार कर रही है। एक ऐसे समाज में जहां मानवाधिकारों और मूलभूत अधिकारों की बातें उच्च स्वरों में की जाती हों, इक्कीसवीं सदी और विकास के भोंपू जोर-जोर से बजाये जाते हों,
 
जाते हुए धन को रोकेंगे ये उपाय
तरह-तरह के उपक्रम करने और पूरी मेहनत के बावजूद यदि आपके पास धन नहीं रुक रहा है तो सावधान हो जाएं। धन की कमी वाली परेशानी को दूर करने के लिए वास्तुशास्‍त्र में बताए गए कुछ आसान उपायों को आपके लिए यहां प्रस्तुत कर रहे हैं। इन्हें करके आप जाते धन को रोक सकते हैं और ऐसा करके धन की कमी भी खत्म हो जाएगी जिससे परिवार में सुख शांति आने में भी मदद मिलेगी।
 
सावधान..डूबते खातों को जनता के धन से मत बचाना
बड़े घराने बैंकों से 8 लाख करोड़ रु. कर्ज लेकर उसे खा चुके हैं। अब इसमें 40 हजार करोड़ रु. की रकम और जुड़ जायेगी। सरकार एन.पी.ए. से बैंकों को उबारने के लिए उन्हें 2.6 लाख करोड़ रु. देने जा रही है। यह जनता के धन से लुटेरे घरानों के पेट भरने जैसा है और सरकार को कोई हक नहीं है कि वह बैंकों को कर्जदार घरानों के डूब रहे धन से जिन्दा रखने के लिए पैकेज दे। खबर है कि रिजर्व बैंक द्वारा एक्सिस बैंक के अन्य बैंकों के साथ मिल कर दिए गए कर्जों को अवरुद्ध या गैर निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) की श्रेणी में वर्गीकृत कर दिए जाने से बैंकिंग क्षेत्र के कुल एनपीए में 40 हजार करोड़ रुपये का और जुडऩे का संकट मंडरा रहा है।
 
राजनारायण : एक संन्यासी नेता
2017 राजनारायणजी का जन्म शताब्दि वर्ष है। आज वे जीवित होते तो उनका सौंवा साल शुरु होता। उनको गए 31 साल होने आ रहे हैं लेकिन हमारी युवा-पीढ़ी के कितने लोग उनका जानते हैं ? उनकी स्मृति में कल विट्लभाई हाउस में जो सभा हुई, उसमें कोई भी समाजवादी कहे जानेवाला नेता दिखाई नहीं पड़ा लेकिन मुझे खुशी है कि आयोजकों में कुछ ऐसे उत्साही नौजवान भी थे, जिन्होंने राजनारायणजी को देखा तक नहीं था।
 
इंदिरा गांधी की साफगोई के कायल थे सभी
भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा प्रियदर्शिनी गांधी की 33वीं पुण्यतिथि देश मना रहा है। वह तारीख 31 अक्टूबर ही थी जबकि जन-जन की प्रिय नेता और देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उनके ही सुरक्षा गार्ड ने गोलियों से छलनी कर शहीद कर दिया था। उनके बाद देश को दूसरी इंदिरा गांधी जैसी महिला प्रधानमंत्री आज तक नहीं मिली, बल्कि यूं कहा जाए कि उनके बाद कोई महिला ही प्रधानमंत्री नहीं बन पाई तो ज्यादा बेहतर होगा।
 
फुटबॉल मानचित्र पर भारत
भारत में अंडर-17 वर्ल्ड कप फुटबॉल का आयोजन हर लिहाज से एक बड़ा अवसर था। इसके बहाने पहली बार भारतीय टीम (भले ही वो सत्रह वर्ष से कम उम ्र के खिलाडिय़ ो ं की हो) को विश्व कप म ें खले न े का मौका मिला। फटु बालॅ म ें भारत की जो स्थिति है, उसके मद्देनजर टीम का प्रदर्शन बहुत खराब नहीं रहा।
 
हरियाणा की बेटियों ने रचा इतिहास
दि ल्ली से 82 कि.मी. दूर हरियाणा सूबे के रिवाड़ी जिला के टह्रश्वपा गोथरा गांव की सरकारी स्कूल की लड़कियों ने वो सफलता हासिल की जो सूबे के इतिहास में दर्ज होने के साथ-साथ लड़कियां चाहे वे धरती के किसी भी कोने की क्यों न हों, उनसे प्रेरित होती रहेंगी।
 
चीन में दूसरे माओ का जन्म
चीन में इस साल नए माओत्सेतुंग का जन्म हुआ है। माओ जितना ताकतवर नेता चीन में अब तक कोई और नहीं हुआ है। माओ के रहते ल्यू शाओ ची और चाऊ एन लाई प्रसिद्ध जरुर हुए लेकिन वे माओ के हाथ के खिलौने ही बने रहे। माओ के बाद चीन में एक बड़े नेता और हुए।
 
विदेशों में हिन्दुस्तान की छवि बिगाडऩे वाली भीड
अधिकांश दुनिया हिन्दुस्तान को अतिथि देवो भव: के साथ ही गंगा-जमुनी तहजीब और शांति, सद्भाव एवं भाईचारे की मिसाल कायम करने वाले देश के तौर पर जानती और पहचानती है। दरअसल अतिथि देवो भव: हमारी भारतीय संस्कृति की एक ऐसी अनुपम परम्परा है जिसमें अतिथियों को देवतुल्य माना जाता है और अपने सामर्थ्य के मुताबिक उनका स्वागत सत्कार एवं अभ्यर्थना में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी जाती है।
 
बनियों पर क्यों बरसे कांचा ?
श्री कांचा इल्लाइहा एक प्रभावशाली बौद्धिक हैं और दलितों के कट्टर समर्थक हैं। एक बौद्धिक के तौर पर वे आदर के योग्य है लेकिन उनके तर्कों से सहमत होना कठिन है। हाल ही में प्रकाशित उनकी पुस्तक ‘पोस्ट हिंदू इंडिया’ पर दक्षिण भारत के बनिया संगठनों ने प्रतिबंध की मांग की थी, जिसे अदालत ने रद्द कर दिया है।
 
मोदी भरे हवा पंचरवाले पहिए मे
पटना विश्वविद्यालय के शताब्दि समारोह में हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अचानक पता नहीं क्या सूझी, उन्होंने घोषणा कर दी कि देश के 20 विश्वविद्यालयों को अगले पांच साल के लिए वे 10 हजार करोड़ रु. देंगे याने इनमें से हर विद्यालय को हर साल 100 करोड़ रु. मिलेंगे। क्यों मिलेंगे ? क्योंकि हमारे प्रधानमंत्रीजी उन्हें विश्व-स्तर का बनाना चाहते हैं। यह छलांग तो अच्छी है लेकिन अभी तो हाल यह है कि भारत का एक भी विश्व विद्यालय विश्व-स्तर का नहीं है।
 
आओ मिलकर खुशियों का दिया जलाए
दी पमालिका का पावन पर्व आ गया। अदालत के आदेश की वजह से दिल्ली एनसीआर में शायद पटाखों का शोर पहले जैसा नही सुनाई देगा। हमें मानना होगा कि देश की सर्वोच्च अदालत ने दिल पर पत्थर रखकर ये फैसला दिया होगा। निश्चित रूप से उन सभी लोगों को धक्का लगा होगा जो वर्ष भर इस पर्व का इंतजार करते हैं।
 
आरुषि-हेमराज हत्याकांड : सीबीआई की विश्वसनीयता कहां रही
देश और दुनिया के लिए रहस्य बन चुके आरुषि-हेमराज दोहरे हत्याकांड मामले में सीबीआई कोर्ट ने नवंबर 2013 में तलवार दंपत्ति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। तब मीडिया ने इसे कुछ यूं प्रचारित किया था मानों सीबीआई ने अपनी जांच से दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया हो।
 
भाजपा लौटे लोहिया की तरफ
डॉ. राममनोहर लोहिया को गए 50 साल पूरे हो रहे हैं लेकिन टीवी चैनलों और अखबारों में उनकी कोई चर्चा नहीं है। देश में कोई बड़ा समारोह नहीं है। आज देश में लोहिया की सप्तक्रांति का कोई नामलेवा-पानीदेवा नहीं है। कौनसा राजनीतिक दल या नेता है, ऐसा है, जो आज जात तोड़ो, अंग्रेजी हटाओ, नर-नारी समता, विश्व सरकार, दाम बांधो, खर्च पर रोक, विश्व-निरस्त्रीकरण जैसे मुद्दों को उठा रहा है।
 
पटाखे : बेमतलब फैसला
सर्वोच्च न्यायालय ने अगले 20 दिन के लिए दिल्ली में पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी है। अदालत का यह फैसला अजीब-सा है। बिक्री पर रोक है लेकिन पटाखे छुड़ाने पर रोक नहीं है। तो अब होगा यह कि दीवाली के मौके पर अदालत की नाक के नीचे जमकर पटाखे फोड़े जाएंगे और वह उन्हें देखते रहने के अलावा कुछ नहीं कर सकती।