समाचार ब्यूरो
17/11/2017  :  10:16 HH:MM
आतंकवाद पर दंश देता अमेरिका और पाकिस्तान
Total View  361

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत-आसियान शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए दुि नया को बतान े का पय्र ास कर रह े थ े कि हिन्दस्ु तान न े आतकं वाद का दश्ं ा सबस े ज्यादा झले ा ह ै और अब समय आ गया ह ै कि आसियान के सदस्य दश्े ा इस बरु ार्इ से खिलाफ एकजुट हो जाएं।
वहीं दूसरी तरफ खबर आती है कि अमेरिकी कांग्रेस ने फैसला लिया है कि पाकिस्तान लश्कर-ए-तोयबा को छोडक़र सिर्फ हक्कानी गुट पर कार्रवाई करे तो उसे 70 करोड़ डालर की अटकी हुई अमेरिकी सहायता दे दी जाएगी। इस तरह देखा जाए तो आतंकवाद पर भारत को दोहरा झटका लगा है, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी सभी को एकजुट होकर आतंकवाद के खिलाफ लडऩे की बात कर रहे हैं और दूसरी तरफ अमेरिका अच्छे और बुरे आतंकवाद को परिभाषित करते हुए पाकिस्तान को आतंकवाद बढ़ाने प्रोत्साहित कर रहा है। देखा जाए तो अमेरिकी कांग्रेस का फैसला अच्छे और बुरे आतंकवाद को परिभाषित करने जैसा ही है। इस फैसले के जरिए उसने बतला दिया कि भारत और उसके नेता भले ही कुछ क्यों न कहें लेकिन वह पाकिस्तान के साथ था, है और आगे भी रहेगा। दरअसल इससे पहले अमेरिका द्वारा कहा गया था कि पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी संगठनों और आतंकियों पर सख्त कार्रवाई करनी होगी, उसके बाद ही कोई बात आगे बढ़ सकेगी। इसके बाद जिस तरह से पाकिस्तान के नेताओं ने अमेरिका से दूरी बनाई और उसके खिलाफ बयान दिए उससे यह समझ में आने लगा था कि अमेरिका अपने फैसले से वापस होगा और पाकिस्तान का साथ हरगिज नहीं छोड़ेगा। इसी बात का यह सुबूत है कि देखते ही देखते अमेरिका ने पाकिस्तान को राहत दते े हएु आतकं वाद पर दोहरी नीति के तहत काम करन े का सदं श्े ा भी द े दिया है। गौरतलब है कि हक्कानी गुट के लड़ाके अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं, जबकि लश्कर-ए-तोयबा ने मुंबई हमले को अंजाम देकर भारत के लिए सिरदर्द बना था। इससे साफ हो जाता है कि अमेरिका एक व्यापारी के तौर पर पाकिस्तान स े वह सौदा कर रहा ह ै जो उसके अपन े हक म ें है। उसे इस बात की चिंता है ही नहीं कि पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी संगठन और आतंकी भारत जैसे पड़ोसी मुल्क के लिए चुनौती बने हुए हैं और आए दिन सीमापार से घुसपैठ करके देश में हमले करते हैं और आम इंसान की जिंदगी के
सुख-चैन को छीन रहे हैं। इसलिए भले ही राजनीतिक लाभ के लिए कहा जा रहा हो कि अमेरिका और भारत में दोस्ताना ताल्लुकात प्रगाढ़ हो रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में ऐसा होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। दरअसल पाकिस्तान परस्त अमेरिका आतंकवाद को लेकर अपनी ही बात पर कायम नहीं रह पाया है। अपनी
जुबान से मुकरते हुए अमेरिका ने पाकिस्तान पर सख्त रवैया अपनाने की बजाय उसे मदद करने का फैसला ले लिया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आतकं वाद को पŸ्र ाय दने े का काम यदि पाकिस्तान करता ह ै तो उसकी मदद करन े म ें अमेरिका भी पीछे नहीं है।






Enter the following fields. All fields are mandatory:-
Name :  
  
Email :  
  
Comments  
  
Security Key :  
   4756101
 
     
Related Links :-
सिंधिया की सीख होगी कितनी कारगर !
मुसीबत में दूध किसान
भारत माता के महान और समर्पित सपूत
अरबों रुपए किसानों को बांटने के बाद भी किसानों में नाराजगी क्यो
आतंकवादियों का अपना कोई धर्म नही
योग दिवस पर वीआईपी कलचर रहा हावी
फीफा विश्व कप की अद्भुत चमक
भाजपा-पीडीपी गठबंधन से देश को क्या मिला.....?
अधिकारी भयभीत हैं तो जनता का क्या होगा
जज्बे से भरेगा नापाक हरकतों का जख्म