समाचार ब्यूरो
23/11/2017  :  10:46 HH:MM
चीन की बढ़ी पैठ
Total View  347

चीन ने एलान किया है कि बांग्लादेश और म्यांमार ने रोहिंग्या शरणार्थी संकट के समाधान के लिए उसकी मध्यस्थता को स्वीकार कर लिया है। दोनों देश चीनी विदेश मंत्री वांग यी के तीन चरणों वाले समाधान को लागू करने पर सहमत हो गए हैं। छह लाख से ज्यादा रोहिंग्या मुसलमान म्यांमार के हिंसा प्रभावित रखाइन प्रांत स े भाग कर पडो़ सी बग्ं लादश्े ा म ें शरण ल े चकु े ह।ंै म्यामं ारी सने ा के रोहिग्ं या सगं ठनो ं के खिलाफ पिछले अगस्त से अभियान तेज करने के बादे से ये संकट खड़ा हुआ।

भारत ने इसमें म्यांमार की भावनाओं के मुताबिक नीति तय की। तब कहा गया था कि भारत नहीं चाहता कि म्यांमार चीन के पाले में जाए। लेकिन अब म्यांमार ने चीन के समाधान प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। चीनी विदेश मंत्री ने ढाका जाकर बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना से मुलाकात की। इसके बाद वे म्यांमार गए।
वहां सर्वोच्च नेताओं से बातचीत की। इसी दौरान उन्होंने चीन चरण वाला समाधान प्रस्ताव रखा। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक इस पहल को बांग्लादेश और म्यांमार दोनों की स्वीकृति मिली। चीन को उम्मीद है कि इससे यह संकट खत्म हो जाएगा। चीन की राय में रोहिंग्या संकट मुख्य रूप से हिंसाग्रस्त रखाइन प्रांत का मुद्दा है, जहां रोहिंग्या रहते हैं। चीन के प्रस्ताव के मुताबिक पहला चरण यह होगा कि रखाइन में संर्घष विराम लागू हो, जिससे स्थानीय लोगों को विस्थापित ना होना पड़े। इसकी मुख्य जिम्मेदारी म्यांमार सरकार की होगी। चीनी विदेश मंत्री ने कहा कि संघर्ष विराम के लिए साझा प्रयास किए जा रहे हैं। दूसरे चरण में अंतरराष्ट्रीय समुदाय म्यांमार और बांग्लादेश को इस मुद्दे के यथासंभव स्वीकार्य समाधान के लिए प्रोत्साहित करेगा। दोनों देश बातचीन से ये हल निकालें, इसके लिए उन्हें उत्साहित किया जाएगा। चीन के मुताबिक तीसरे चरण में इस समस्या का दीर्घकालिक समाधान तलाशा जाएगा। जाहिर है, इन सभी चरणों में चीन की महत्त्वपूर्ण भूमिका
होगी। उल्लेखनीय है कि म्यांमार और बांग्लादेश दोनों जगहों पर चीन ने भारी निवेश कर रखा है। इसलिए वहां शांति कायम रखने में उसका निहित स्वार्थ है। अब इसके लिए उसने अपनी हैसियत का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। ध्यान देने की बात यह है कि इस पर दोनों संबंधित देश सहमत हुए हैं। सवाल है कि इस क्षेत्र  की कूटनीति में भारत कहां है? क्या उन देशों के चीन के प्रभाव क्षेत्र में रहने की हकीकत को स्वीकार कर लिया है?






Enter the following fields. All fields are mandatory:-
Name :  
  
Email :  
  
Comments  
  
Security Key :  
   6403302
 
     
Related Links :-
सिंधिया की सीख होगी कितनी कारगर !
मुसीबत में दूध किसान
भारत माता के महान और समर्पित सपूत
अरबों रुपए किसानों को बांटने के बाद भी किसानों में नाराजगी क्यो
आतंकवादियों का अपना कोई धर्म नही
योग दिवस पर वीआईपी कलचर रहा हावी
फीफा विश्व कप की अद्भुत चमक
भाजपा-पीडीपी गठबंधन से देश को क्या मिला.....?
अधिकारी भयभीत हैं तो जनता का क्या होगा
जज्बे से भरेगा नापाक हरकतों का जख्म