समाचार ब्यूरो
05/12/2017  :  10:39 HH:MM
देश में रोजाना सैकडों आत्महत्या क्यों?
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देश के लगभग सभी राज्यों में आत्महत्या की प्रवृत्ति बड़ी तेजी के साथ बढ़ रही है। उत्तर भारत और इससे लगे हुए राज्यों में स्थिति बहुत खराब है। म.प्र., उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली एवं अन्य राज्यों में रोजाना आत्म हत्याओं के समाचार छपे हुए मिलते हैं। आत्महत्या के जो प्रमुख कारण सामने आते है। उनमें किसानों द्वारा कर्ज के बोझ से आत्महत्या करना।

युवाओं द्वारा पढ़ाई और नौकरी में असफल होने पर आत्महत्या करना। युवाओं द्वारा ह्रश्वयार में धोखा खाना, शादी के बाद इच्छा की पूर्ति नहीं होने पर लव मैरिज एवं अरेंज मैरिज करने युवाओं में आत्महत्या की प्रवृत्ति तेजी के साथ बढऱही है। पिछले वर्षों में व्यापारी और सट्टे में घाटा खाने वाले भी बडी् तेजी के साथ आत्महत्या करके, सारे झंझटों से एक ही झटके में मुक्ति पाने का रास्ता अपना रह े ह।ै यवु ाओ ं म ें आत्महत्या की पव्र ृत्ति बढ ़ रही ह।ै इस समस्या स े निपटन े के लिय े सामाजिक, धार्मिक एवं सरकारों द्वारा अतिसंवेदनशीलता का परिचय दिया जा रहा है। इससे चिंता और भी बढ़ जाती है। देश में सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1 साल में लगभग 1 लाख 35 हजार लोग आत्महत्या कर रहे हैं। एक दिन में 370 लोगों का आत्महत्या करना कोई साधारण बात नहीं है। कई सरकारें आत्महत्या को स्वभाविक मौत मानकर उनकी गणना नहीं करती है। यदि उसको भी जोड़ दिया जाए तो यह संख्या दुगनी हो जाएगी।

2010 से 2015 के 5 वर्षों में 39775 विद्यार्थियों ने आत्महत्या की। 1 लाख 35 हजार आत्महत्या में 80 फीसदी युवाओं ने आत्म हत्या की हैं। सबसे ज्यादा आत्महत्या किसान और युवा कर रहे हैं। पिछले 2 वर्षों में व्यापारियों की आत्महत्या बड़ी तेजी के साथ बढ़ी है। 2004 के बाद से लोगों में कर्ज लेने की प्रवृत्ति बडी तजे ी के साथ बढी ह।ै कर्ज  लने े म ें महिलाओ ं की भूि मका भी बढ ़ गर्इ  ह।ै पिछल े डढे ् दशक में आमदनी अठ्टनी और खर्च रुपया के कारण मध्यम एवं निम्न वर्ग के उपर कर्ज बढा है। उसकी बचत लगभग खत्म हो गई है। मध्यम एवं निम्नवर्गीय परिवारों के बच्चे उच्च शिक्षा की पढाई के लिए भारी मात्रा में कर्ज ले रहे हैं। डिग्री से नौकरी मिलन े की अवधारणा के कारण गावं ो ं एव ं छोट े शहरो ं स े निम्न एव ं मध्यम आय वर्ग  के यवु ा शहरो ं म ें आकर उच्च शिक्षा की पढार्इ  कर रह े ह।ै के दं ्र एव ं राज्य सरकारो ं द्वारा हरिजन,आदिवासी, अल्पसंख्यक परिवारों के बच्चों को उच्च शिक्षा की फीस शासकीय कोष से देने के कारण सभी युवाओं के मन में नौकरी करने का सपना, सरकारों और कालेजों ने केम्पस सिलेक्शन के नाम पर बडे जोर-शोर से युवाओं के मन में डालकर करोड़ों - अरबों रुपयों की कमाई कर ली। किन्तु उच्च शिक्षा प्राप्त यवु ाओ ं को लबं े सघ्ं ार्ष  के बाद भी जब नौकरी नही ं मिलती ह,ै तो आत्महत्या जसै े
आत्मघाती कदम उठाकर दुनिया से रुखसत हो जाते हैं। 2004 के बाद से बैंकों, फायनेंस कम्पनियों और सरकारों ने कर्ज देकर आम आदमियों को कर्ज के बोझ से लाद दिया है। किसानों की जमीन बैंकों में बंधक रखकर किसानों की जमीने छीनने का कुत्सित प्रयास कारर्पोरेट और बडे-बडे् नौकरशाह, राजनेता कर रहे है। पिछले 10 वर्षों में बिजली, डीजल,पेट्रोल,खाद, बीज और टेक्स का बोझ किसानों और व्यापारियों पर लादा गया। लोगों ने अपनी जरुरतों को पूरा करने के लिए अपनी हैसियत और कमाई की तुलना में ज्यादा कर्ज ले लिया, अब वह कर्ज चुका नहीं पा रहा है। जिसके कारण भारत जैसे अध्यात्मिक देश में इतनी बड़ी मात्रा में आत्महत्या होना, आज सबसे ज्यादा चिंता का विषय है। सामाजिक नेतृत्व करने वाले धर्माचार्यों, सरकारों और न्यायपालिका का मौन धारण करना आश्चर्यजनक है।






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