हरियाणा मेल ब्यूरो
07/12/2017  :  10:10 HH:MM
वादा था भूगोल बदलने का; बदला जा रहा है इतिहास......?
Total View  199

वरिष्ठ कवि, गीतकार और युग प्रवर्तक साहित्यकार इंदिवर ने पिछली शताब्दी के छठें दशक में एक कविता लिखी थी- "इतिहास मुझे पसंद नहीं, इतिहास पढ़ाना बंद करो, मानव इतना गिर सकता है, यह सबक सिखाना बंद करो"।

इस कविता के जन्म के पचास साल बाद शायद आज सरकार से लेकर हर कोई इन्हीं पंक्तियों को मूर्तरूप देने में संलग्न हो गया है, अंतर सिर्फ इतना है कि कवि इंदिवर ने तो इतिहास को पढऩ े के बाद उसके पात्रो ं की नीचता स े दखु ी होकर य े पंि क्तया ं लिखी थी, कितं ु आज सत्तारूढ़ दल, सरकार, फिल्म उद्योग आदि सभी हमारे अतीत (इतिहास) को नैस्तनाबूत करने पर तुले है और आश्चर्य यह कि ये सब इतिहास के उन काली छवि वाले पात्रों को मिटाने की मांग नहीं कर रहे है, बल्कि उन पात्रों का नाम-ओ-निशान मिटाने पर आमादा है, जो इतिहास के गौरव माने जाते है।

शायद इसी की शुरूआत देश में सत्तारूढ़ पार्टी की उन राज्य सरकारों ने की, जो नई पीढ़ी को नया इतिहास पढ़ाने को उत्सुक है, इसी गरज से कभी दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल को पर्यटन स्थलों की सूची से हटा दिया जाता है तो कभी दिल्ली के कुतुब मिनार व ऐतिहासिक खण्डहरनुमा महलों पर निशाना साधा
जाता है। किंतु पिछले दिनों तो विदेश में बसने वाले अप्रवासी भारतीय लेखकों ने भी हमारे इतिहास को कपोल-कल्पित घटनाओं से तहस-नहस करने में कोई कमीं शषे नही ं रखी। आज जयपरु  की वीरागं ना रानी पद्मावती को लके र जो परू  े दश्े ा म ें तहलका मचा है, वह तो किसी से भी छुपा नहीं है। प्रसिद्ध निदेशक संजयलीला भंसाली की इस फिल्म के रिलीज़ होने के पहले ही बिना उसे देखे देश की आधा दजर्न राज्य सरकारो ं न े उस फिल्म पर प्िर तबधं लगा दिया, यहा ं तक कि ससें र बोर्ड  न े भी उस े अभी नही ं दखे ा ह?ै क्या यह एक अजबू ा नही ं ह ै कि सिर्फ  अफवाहो ं के आधार पर इतना बड़ा बखेड़ा खड़ा कर दिया जाए? इसी तरह राम जन्मभूमि लिब्राहम जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर निर्मित "द गेम ऑफ अयोध्या" फिल्म को लेकर भी देश में एक अजीब उत्तेजनात्मक माहौल तैयार करने की शुरूआत हो गर्इ  ह,ै विश्व हिन्द ू परिषद, भारतीय सतं समाज आदि इसके विरोध म ें खड ़े हो गए ह ै
और मरन-े मारन े तक की धमकिया ं द े रह ें ह,ंै यह फिल्म आढ ़ दिसम्बर को रिलीज ़ होन े की तयै ारी म ें ह।ै यद्यपि इस फिल्म को भी अभी किसी न े भी नही ं दखे ा ह,ै कितं ु एसे ा आरोप ह ै कि फिल्म म ें हिन्दअू ो ं को छल स े भगवान राम की मूि र्त  स्थापित करत े दिखाया गया है, संत समाज इसे अन्तर्राष्ट्रीय साजिश बता रहा है। यह फिल्मी विवाद तो देश में चल ही रहा है, इसी बीच ब्रिटेन में निवासरत एक अप्रवासी भारतीय महिला लेखिका जयश्री मिश्रा की एक पुस्तक भी विवादस्पद हो गई है, यद्यपि झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई पर यह किताब एक दशक पहले लिखी गई थी और उस पर उत्तरप्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने 2008 में प्रतिबंध भी लगा दिया था, किंतु यह पुस्तक आज ’ऑन लाईन‘ उपलब्ध है, इस पुस्तक में लेखिका ने यह तथ्य उजागर किया है कि झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई का ईस्ट इण्डिया कम्पनी के एक पॉलिटिकल एजेंट रॉबर्ट एलिस के साथ प्रेम सम्बंध थे। चूंकि यह पूरी पुस्तक आज ऑन लाईन है, और पृष्ठ 212 पर यह तथ्य उजागर किया गया है, इसलिए सोशल मीडिया में इसकी खासी चर्चा है।






Enter the following fields. All fields are mandatory:-
Name :  
  
Email :  
  
Comments  
  
Security Key :  
   1788404
 
     
Related Links :-
तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा... सुभाषचंद्र बोस
क्या केवल गरीब ही है सबसे बड़ा ‘मुजरिम’?
आर्थिक मोर्चे पर नसीहत करता अमेरिकी शटडाउन
वे प्रधानमंत्री हैं, प्रचारमंत्री नही
न्यायपालिका विवाद : जन आस्था के स्तंभ पर विवाद......!
राजनीतिक आत्ममंथन की आवश्यकता
हज-यात्रा अब अपने दम पर
संघ के अनुवांशिक संगठनों की बगावत या नूरा कुश्ती
मुद्दा दोगुना आमदनी का
जब सास बनी बहू की सांस