हरियाणा मेल ब्यूरो
10/12/2017  :  11:45 HH:MM
वाणी दोष से पीडि़त हैं मणिशंकर
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मणिशंकर अय्यर जैसे लोगों को आखिर कब तक झेला जा सकता है। कांग्रेस ने अपने इस वरिष्ठ नेता को प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया है। कांग्रेस के गलियारों से उड़ी या उड़ाई जा रही सूचनाओं के अनुसार राहुल गांधी इस समय अय्यर से बहुत नाराज हैं।

राहुल गांधी ने उनसे अपनी उस टिह्रश्वपणी के लिए माफी मांगने के लिए कहा जिसमे अय्यर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए नीच शब्द का प्रयोग किया था। राजनीतिक क्षेत्रों में कहा जा रहा है कि अय्यर की यह टिह्रश्वपणी गुजरात में बरसों बाद भाजपा को चुनौती देने की स्थिति में देखी जा रही कांग्रेस को बहुत भारी पड़ सकती है। अपनी बेलगाम जुबान के लिए बदनाम अय्यर को जुबान फटकारते समय इस खतरे का अहसास नहीं हुआ होगा लेकिन मीडिया और सोशल मीडिया में अय्यर के कारण उठे तूफान से निबटने कांग्रेस तुरंत डेमेज कंट्रोल की मुद्रा में आ गई। अय्यर का बयान आने के चार-पांच घण्टे के अंदर उन्हें कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया। इसके बाद अय्यर की हालत न घर के न घाट वाली हो गई। उनका मुरझाया चेहरा साफ कह रहा है कि राहुल गांधी के कदम से वह सकपका गए हैं। उधर, कांग्रेस विरोधियों के अलावा आम लोगों में भी यह राय देखी गई कि अतीत में भी अपनी बकवास के कारण कांग्रेस के लिए दुविधापूर्ण स्थिति
बनाते रहे अय्यर के विरूद्ध पहले ही ऐसी ही कोई सख्त कार्रवाई कर ली जाती तो पार्टी को इस स्वयंभू बुद्धिजीवी के कारण बार-बार शर्मिन्दगी का सामना नहीं करना पड़ता। अतीत के कम से कम दो या तीन ऐसे अवसर याद आते हैं जब अय्यर के बयानों को उनके निजी विचार बता कर कांग्रेस ने उत्पन्न विवाद से पल्ला झाडऩे की कोशिश की। कांग्रेस नेतृत्व के ऐसे रवैये के कारण ही अय्यर के हौसले बढ़ते चले गए। 10 अप्रैल 1941 को लाहौर में जन्मे अय्यर 1963 में भारतीय विदेश सेवा का हिस्सा बने थे। वह अर्थशास्त्र के स्नातक हैं और विदेश के एक प्रतिष्ठित शिक्षा संस्थान से उच्च शिक्षा प्राप्त की थी। अपने सेवाकाल के दौरान वह कुछ समय
पाकिस्तान में भी पदस्थ रहे। कहा जाता है कि राजीव गांधी से अपने सम्पर्क और संबंधों के चलते वह 1989 नौकरी छोड़ कर राजनीति में आ गए। राजीव गांधी की कृपा के चलते ही उनका राजनीति में पुनर्वास संभव हो सका। 2004 से 2009 तक वह मनमोहन सिंह सरकार में मंत्री रहे। 2009 और फिर 2014 में वह चुनाव
हार गए। इससे पूर्व 1996 और 1998 में भी वह चुनाव हार गए थे। ऐसा लगता है कि गांधी परिवार से वफादारी के कारण ही उन्हें 2004 में टिकट दिया गया जिससे वह सत्ता सुख भोग सके। मणिशंकर अय्यर की छवि एक पूर्व राजनयिक के अलावा पत्रकार, उम्दा लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में रही है। वह लगभग पौने तीन दशक से राजनीति में हैं लेकिन उन्हें एक अच्छा राजनेता कहना सरासर गलत ही होगा। उन्हें नाकाम और दूसरे शब्दों में कुंठित इंसान कहना ही सही हो सकता है। उन्हें एक ऐसा बुजुर्ग कहा जा सकता है जो जीवन की वास्तविकताओं को स्वीकार करने और समझने के लिए तैयार ही नहीं है। जो अपने अनर्गल प्रलाप से अपनों के लिए मुसीबत खड़ी करते रहता है। अपनी बुद्धि, ज्ञान और समझ को लेकर जिसे कई तरह के भ्रम हैं। उनकी की स्थिति उस बूढ़े व्यक्ति की तरह है जो अपनी अनावश्यक बातों से स्वयं ही अपमान को न्यौता देता हो। मोदी के लिए नीच शब्द का प्रयोग करने पर अय्यर अब सफाई दे रहे हैं कि वह हिन्दी भाषी नहीं हैं इसलिए अंग्रेजी शब्द लो का गलत अनुवाद कर बैठे। यह स्पष्टीकरण विशुद्ध झूठ है।






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