समाचार ब्यूरो
13/12/2017  :  10:26 HH:MM
सियांग नदी के प्रदूषण से उभरा चीन का चेहरा!
Total View  377

अरुणाचल प्रदेश के लिए सदियों से पानी का मुख्य माध्यम रही सियांग नदी अचानक काली पड़ गई है। पानी में सीमेंट जैसा कुछ मिला है। इसलिए वह पानी इस्तेमाल करने लायक नहीं रहा। हालांकि अभी इस मामले में सच्चाई सामने नहीं आयी है, फिर भी प्रथम दृष्ट्या परिस्थितियां यह आशंका निर्मित कर रही हैं कि इसके पीछे चीन की कोई ओछी हरकत हो सकती है।
अधिकृत रूप से अभी भारत ने इस मामले में चीन को जिम्मेदार नहीं ठहराया है, लेकिन अरुणाचल प्रदेश से कांग्रेस सांसद निनोंग एरिंग ने सियांग नदी के पानी का मुआयना करने के बाद कहा है कि इस हरकत के लिए चीन जिम्मेदार हो सकता है। एरिंग के मुताबिक, भारत की तरफ बह कर आने वाली नदियों का रुख मोडऩे की चीन साजिश कर रहा है। एरिंग ने बताया कि हो सकता है कि सियांग नदी के जरिए चीन ने ऐसी शुरुआत की हो। सासं द एरिगं न े कहा,सियागं नदी के रुख को चीन की ओर स े सभं ावित तौर पर मोड ़े जाने को लेकर मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चि_ी लिख रहा हूं। सांसद ने कहा कि पानी का रंग बदलने के पीछे जरूर कोई कारण है, हो सकता है कि बांध बनाए जा रहे हों और जमीन की खुदाई से निकली मिट्टी नदी के पानी के साथ बह कर आ रही हो। जो भी हो, ये बहुत गंभीर मामला है। ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि पूर्व सियांग जिले के प्रशासन ने नदी के पानी को लेकर चेतावनी जारी कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मानसून में यह नदी काली पड़ गई और सभी को लगा कि मिट्टी की वजह से ऐसा हो रहा है। बारिश का मौसम खत्म हो चुका है लेकिन अब भी नदी का पानी काला है। अधिकारियों के अनुसार आमतौर पर नवंबर से फरवरी तक नदी का पानी एकदम साफ रहता है और ऐसा रंग पहले कभी नहीं हुआ। पूर्व सियांग जिला प्रशासन ने सियांग नदी के पानी के सैंपल लेकर केंद्रीय जल आयोग को भेज दिए है। सियांग को ब्रह्मपुत्र की अहम सहयोगी नदी माना जाता है। दक्षिणी तिब्बत में 1600 किलोमीटर रास्ता तय करते वक्त सियांग नदी को यारलुंग सांगपो या यारलुंग जांग्बो के नाम से जाना जाता है। भारत में दाखिल होने के बाद इस नदी को सियांग या दिहांग नाम से जाना जाता है। हमारा मानना है कि अब समय आ गया है कि जब हिमालय और उसके पीछे तिब्बती क्षेत्र में चीन की हलचलों और हरकतों की निगरानी हम उपग्रहों के जरिये करें। क्योंकि चीन भारत को परेशान करने के लिए किसी भी सीमा तक जा सकता है।






Enter the following fields. All fields are mandatory:-
Name :  
  
Email :  
  
Comments  
  
Security Key :  
   5783864
 
     
Related Links :-
हर्ष और उल्लास का प्रतीक है दशहरा
सजा और सबक
शहादत में भेदभाव नहीं तो फिर नौकरी देने में भेदभाव क्यों ?
जो सवाल छोड़ गए अग्रवाल
लश्कर का खतरनाक एजेंडा
पारदर्शिता के पक्षधर जस्टिस रंजन गोगोइ
धार्मिक मामलों को आपसी सहमति से सुलझाना बेहतर होगा
भारतीयों के और कितने विभाजन?
आग में पड़ा घी
आज लोहिया होते तो गैर भाजपावाद का आह्वान करते