हरियाणा मेल ब्यूरो
13/12/2017  :  10:32 HH:MM
स्मिता पाटिल : भुला ना पाएंगे तुमको 13 दिसंबर : पुण्यतिथि पर विशेष
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भारतीय फिल्मों को विश्व में एक उच्च स्थान प्राप्त है। बॉलीवुड की फिल्में और अभिनेता पूरे फिल्म जगत में छाए हैं। फिल्मों की चर्चा हो और बॉलीवुड की अभिनेत्रियों का जिक्र न आए ऐसा हो नहीं सकता। ऐसा ही एक चिरपरि िचत नाम है-स्मिता पाटिल का।

70 और 80 के दशक में अपनी अभिनय कला से धूम मचाने वाली इस अदाकारा को आज भी फिल्म जगत उसी आदर से याद करता है। कला और कलाकार का मनोरंजन की दुनिया में ऐसा स्थान है जो कलम और क़ागज का लेखन में हैं। जब मन बहुत उदास, खिन्न या थका हो उसे अदाकारी का जलवा देखने मिले तो थकान 
का एहसास नहीं होता। 1960 के दशक से आज तक फिल्मी दुनिया का असर हर उम्र हर क्षेत्र पर देखा जा रहा है। मनोरंजन के अनेक साधन उपलब्ध हैं, फिर भी फिल्मी हस्तियों और फिल्मों के प्रभाव और आकर्षण से बचना मुश्किल हैं थकान और व्यवस्तता के बावजूद हम फिल्मों का मोह नहीं छोड़ सकते। फिल्में हमारा मनोरंजन भी करती हैं और मुश्किल आने पर मार्गदर्शन भी करती हैं। भारतीय सिनेमा बंगाल, मुद्रास, पंजाब के साथ ही महाराष्ट्र का भी ऋणी है। सिने सुंदरियाँ मद्रास, बंगाल और महाराष्ट्र से सबसे ज्यादा आई हैं। जिनका जादू आज भी बढ़-चढ़ कर बोल रहा है। महाराष्ट्र की अभिनेत्रियों में संध्या, दुर्गा खोटे, लीना चंद्रावकर,   ललिता पवार, नंदा, राजश्री, ममता कुलकर्णी रीमा लागू, स्मिता पाटिल काफी चर्चित रही। आज भी उनकी अभिनीत फिल्में अधिक से अधिक दर्शकों द्वारा देखी जाती हैं। महाराष्ट्र की सिने अभिनेत्रियों में स्मिता पाटिल खूबसूरत स्मार्ट, वाकपटु एवं अभिनय में परिपक्व थीं। वे 17 अक्टूबर 1955 को एक राजनीति से जुड़े परिवार में जन्मीं। बचपन से उनका लगाव कला और अभिनय की तरफ रहा। उन्होंने न्यूज रीडर तथा फोटोग्राफर के रूप में अपना व्यावसायिक जीवन आरंभ किया। स्मिता पाटिल सुहासिनी मुले तथा शबाना आजमी से प्रभावित रहीं। वह भारतीय महिलाओं की वास्तविक परेशानियों को उजागर कर उन्हें दूर करना चाहती थीं। ग्रामीण महिलाओं से उन्हें विशेष सहानुभूति थी। उन्होंने फिल्म एवं दूरदर्शन विभाग पूना से स्नातक किया। वे भारतीय कला फिल्मों तथा स्टेज से जुड़ी रहीं। बॉलीवुड की सफल अदाकारा स्मिता के पिता मंत्री एवं माता समाज सेविका थीं। पूना, महाराष्ट्र में जन्मी स्मिता ने प्रारंभिक पढ़ाई मराठी भाषा में की। व्यवसाय में उनकी सफजता का
एक कारण मीठी आवाज रही।उनकी आंखें बहुत सुंदर थी तथा साड़ी में उनकी खूबसूरती और भी बढ़ जाती थीं। वे महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती थी। उन्होंने फिल्मों में भी इसी प्रकार की भूमिका का चयन किया। फिल्म निर्माता श्याम बेनेगल ने उन्हें दूरदर्शन पर समाचार वाचक के रूप में देखा और अपनी फिल्म के लिए उनका चयन कर लिया। हिंदी यथार्थवादी सिनेमा में एक नया नाम स्मिता पाटिल के रूप में जुड़ा। स्मिता ने गोविन्द निहलानी, मृणालसेन की फिल्मों में भी अभिनय किया। शीघ्र ही उनके अभिनय कला की प्रशंसा होने लगी। ‘भूमिका‘ में अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया। एक के बाद एक उन्होंने अर्थ, मंथन, मंडी, बाजार जैसी सफल फिल्में की। आरंभिक दौर में वे कला फिल्मों से जुड़ी रहीं। धीरे-धीरे उन्होंने रोमेन्टिक रोल भी करना आरंभ किया। 80 के दषक की नमक-हलाल, शक्ति, मिर्च-मसाला, आखिर क्यों में उनके रोमांटिक रोल भी सराहे गए। हिंदी फिल्मों के अलावा स्मिता पाटिल ने मराठी, गुजराती, तेलगू, बंगला, कन्नड़ और मलयालम फिल्मों में भी अपनी कला का जौहर दिखाया। स्मिता पाटिल को महान फिल्मकार सत्यजीत रे के साथ काम करने का मौका मिला।

जया केतकी






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