समाचार ब्यूरो
13/12/2017  :  10:42 HH:MM
‘हरे कृष्णा’ भारत में रिलीज होगी
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नई दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित फिल्म ‘हरे कृष्णाग जिसने कई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में हिस्सा लिया और पुरस्कार जीते, को अब भारत में रिलीज किया जा रहा है। इसे अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं में रिलीज किया जायेगा।

फिल्म 15 दिसंबर को सभी पीवीआर थिएटर्स और दूसरे मल्टीह्रश्वलेक्सेस में ओरस अवतार एन्टरटेनमेंट के रोहित शेट्टी द्वारा लाई जा रही है। यह फिल्म इंटरनेशनल सोसायटी फॉर कृष्णा कांशसनेस; इस्कॉन के संस्थापक श्री ए.सी. भक्तिवेदांता स्वामी श्रीला प्रभुपाद की जिंदगी एवं कार्यों पर आधारित है। 70 की उम्र में, भारतीय स्वामी श्रीला प्रभुपदा कृष्ण के प्रेम को फैलाने के लिए अमेरिका गये। उन्हें किसी का सहयोग नहीं था और उनकी जेब में धन भी नहीं था। सभी कठिनाईयों और बाधाओं के बावजूद, उनके अटल दृढ़-इच्छाशक्ति और भरोसे ने दुनिया भर में आध्यात्म की लौ जलाई जिसे अब ‘‘हरे कृष्णा अभियानग के तौर पर जाना जाता है। रोहित शेट्टी ने कहा, ‘इस फिल्म में इस महान असाधारण संत, विद्वान और धार्मिक गुरू के 1970 के दशक में भ्रमित युवाओं को सही राह पर लाने के लिए उनके प्रयासों के लिए अलग परिदृश्य में दिखाया गया है। हॉलीवुड के जॉन ग्रीसर द्वारा निर्देशित ‘‘हरे कृष्णाग किसी की धारणा या निजी धर्म से इतर एक बेहतरीन आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है।

माननीय राधानाथ स्वामी, इस्कॉन के आध्यात्मिक गुरू ने कहा, ‘एक सामाजिक, दार्शनिक अथवा धार्मिक अध्ययन के अनुसार, श्रीला प्रभुपदा की जिंदगी लाखों लोगों की जिंदगी और समूचे विश्व के लिए बेमिसाल योगदान करने के लिए जानी जाती है। वे ड्रग के लती हिह्रश्वपीज के लिए वरदान थे जोकि बाद में उनके अनुयायी
बन गये और कृष्ण के बताये रास्ते पर चलने लगे। श्रीला प्रभुपदा बिना किसी निजी इच्छा के उनके साथ हमेशा रहे। प्रभुपदा और उनकी जिंदगी की अद्भुत कहानी को देखकर दर्शक आश्चर्य करेंगे कि दुनिया ने इस संत को आखिर कितना याद किया होगा जो हाल में हमारे पास आया है।

राधानाथ स्वामी ने कहा, ‘श्रीला प्रभुपदा का सपना ऐसा घर बनाने का था, जहां दुनिया रह सके और उन्होंने ऐसा किया। आज, उनके लाखों भक्त हैं और 700 इस्कॉन मंदिर दुनिया भर में मौजूद हैं। फिल्म ‘हरे कृष्णा’ में दिखाया गया है कि प्रभुपदा के अनुयाई समूचे विश्व में मानवीयता की भाषा बोलते हैं और उनमें इस संसार के प्रत्येक जीवित के प्रति अत्यंत सहानुभूति है। वे उसी जीवनशैली एवं धारणा का अनुसरण करते हैं। वे वास्तव में अथाह बुद्धिमत्ता एवं आध्यात्मिक दयालुता के आचार्य थे। उन्हें समाज को लेकर बेहद चिंता एवं करूणा थी जहां आध्यात्मिक समझ का वास्तविक अभाव था।






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