हरियाणा मेल ब्यूरो
16/12/2017  :  11:09 HH:MM
बैंकों की मजबूती अगला बड़ा सुधार: जेटली
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मुंबई नरेंद्र मोदी सरकार ने नोटबंदी, दिवालिया संहिता और वस्तु एवं सेवाकर के बाद अगले बड़े आर्थिक सुधार के रूप में सरकारी बैंकों को मजबूती प्रदान करने और उनके बही खाते को दुरुस्त करने का लक्ष्य बनाया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज यह जानकारी दी।

उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार को भरोसा है कि विनिवेश का बजटीय लक्ष्य इस साल आसानी से पार कर लिया जाएगा। जेतली ने कहा, बैंकों की स्थिति में सुधार और सरकारी बैंकों को मजबूती प्रदान करना बेशक आज का सबसे महत्त्वपूर्ण एजेंडा है। हमने पहले ही पुनर्पूंजीकरण की विस्तृत योजना की घोषणा की है और इसके पीछे यह विचार है कि वृद्धि दर में बैंकों की भूमिका सुनिश्चित हो सके। वह नई दिल्ली में उद्योग संगठन फेडरेशन आफ इंडियन चैंबर आप कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री (फिक्की) की सालाना आम बैठक को संबोधित कर रहे थे।वित्त मंत्री ने कहा, हम चाहते हैं कि सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्योग को मजबूती मिले। यह क्षेत्र पिछले कुछ सालों से उपेक्षा का शिकार रहा है। खासकर बैंकों से इन्हें कर्ज मिलने में समस्या हो रही है, क्योंकि बैंकों के गैर निष्पादित संपत्तियों (एनपीए) के कारण कर्ज देने की क्षमता घटी है। अगर बैंकों की कर्ज देने की क्षमता दुरुस्त की जाती है तो पूंजी की उपलब्धता में सुधार होगा।

जीएसटी के तहत पंजीकृत 35 फीसदी व्यापारी नहीं देते कर

नई दिल्ली (ईएमएस)। करीब चार लाख लोग जीएसटी संग्रहण में 95 फीसदी का योगदान कर रहे हैं, जबकि इसके तहत पंजीकृत 35 फीसदी लोग रिटर्न तो फाइल कर रहे हैं, लेकिन वे कर नहीं देते हैं। यह बात वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उद्योग मंडल फिक्की की 90वीं आम सभा में एक प्रश्न के जवाब में कही। उनसे पूछा यह गया था कि क्या जीएसटी से छोटे व्यापारियों पर बोझ बढ़ा है? उन्होंने कहा, जीएसटी संग्रहण को लेकर किए गए अध्ययन के मुताबिक, नई कर प्रणाली के तहत जितने लोग पंजीकृत हैं, उनमें से चार लाख लोगों से 95 फीसदी कर प्राप्त होता है, जबकि 35 फीसदी लोग बहुत कम कर का भुगतान करते हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि रिटर्न का बोझ एक वाजिब समस्या है और जीएसटी परिषद इसकी जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि परिषद महज 3-4 महीनों में ही कई वस्तुओं पर कर की दरों को तर्कसंगत बनाने में सफल रही है। यह जरुरी है कि हम अर्थव्यवस्था को अधिक औपचारिक बनाने की दिशा में संरचनात्मक परिवर्तन जारी रखें और वैश्विक कर दरों को देखते हुए जीएसटी को अधिक तर्कसंगत बनाएं। उन्होंने बुनियादी संरचना के निर्माण की गति को जारी रखने और रेलवे क्षेत्र में निवेश को तेज रखने की आवश्यकता पर बल दिया।






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