समाचार ब्यूरो
10/02/2018  :  10:39 HH:MM
हरियाणा व पंजाब ने एफआईआर में जाति व धर्म का कॉलम हटाया
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चंडीगढ़ हरियाणा और पंजाब की सरकारों ने अपने यहां दर्ज होने वाली सभी एफआईआर में आरोपी की जाति व धर्म के कॉलम को हटा दिया है लेकिन, कुछ मामलों में केंद्रीय कानून की वजह से इस नीति को पूरी तरह लागू करने में राज्य सक्षम नहीं हैं। दोनों राज्यों की इस जानकारी के बाद पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने मामले में केंद्र को प्रतिवादी बनाते हुए नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है।

उल्लेखनीय है कि पड़ोसी हिमाचल प्रदेश की शिमला हाईकोर्ट भी इसी तरह का कदम उठा चुकी है। जेल में भी कैदियों की जाति व धर्म से जुड़ा रिकार्ड रखे जाने पर एतराज जाहिर करती हुई एक याचिका पंजाव-हरियाणा हाईकोर्ट में विचाराधीन है। शुक्रवार को इस पर सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि राज्य सरकार पंजाब पुलिस रूल्ज 1934 में संशोधन कर रही हैं। इस सिलसिले में यह भी बताया गया कि अतीत में एफआईआर में जाति व धर्म का उल्लेख करना सही था लेकिन, मौजूदा युग में यह प्रासंगिक नहीं रह गया है। अदालत के ध्यान में यह बात भी लाई गई कि नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो सभी राज्यों से एफआईआर में जाति व धर्म की जानकारी मांगता हैं लेकिन, पंजाब सरकार ने 18 अक्टूबर को एक पत्र के जरिए नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो को इस तरह की जानकारी मुहैया करवाने में असमर्थता जाहिर कर दी है। सुनवाई के दौरान चंडीगढ़ प्रशासन की तरफ से भी मत जाहिर किया गया कि वह भी एफआईआर में आरोपी की जाति व धर्म का कॉलम हटाने के पक्ष में है और इस संबंध में हलफनामा दाखिल करने के लिए उसे कुछ समय दिया जाना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि हरियाणा सरकार पहले ही अदालत में स्पष्ट कर चुकी है कि वह पुलिस रूल्स में आवश्यक संशोधन करने जा रही है। हालांकि सरकार ने यह भी बताया कि एससी/एसटी से संबंधित केसों में इनका लिखा जाना जरूरी होगा। याचिका दाखिल करने वाले वकील एचसीएस अरोड़ा के मुताबिक पंजाब पुलिस रूल्स-1934 में एफआईआर में अभियुक्त और पीडि़त की जाति लिखे जाने का प्रावधान है जो कि मौजूदा संदर्भों में गलत है। अपराधी का कोई धर्म नहीं होता और न ही उसकी कोई जाति होती है। वह केवल अपराधी होता है। अभियुक्त व शिकायतकर्ता की पहचान अन्य तरीके से भी दर्ज की जा सकती है। इसके लिए आधार कार्ड, पिता के साथ दादा का नाम, गली, वार्ड आदि जैसे उपयुक्त विकल्प मौजूद हैं। याचिकादाता के मुताबिक पिछले साल सितंबर में शिमला हाईकोर्ट ने भी पुलिस रूल्स के तहत विभिन्न फार्म में से जाति के कॉलम को खत्म करने के निर्देश दिए थे। इस लिए पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ को भी ऐसा करने के लिए निर्देशित किया जाना चाहिए।






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