समाचार ब्यूरो
10/02/2018  :  10:41 HH:MM
भाजपा की जींद रैली से विरोधियों की बढ़ी चिंता
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चंडीगढ भारतीय जनता पार्टी द्वारा आगामी 15 फरवरी को जींद में आयोजित की जा रही रैली राजनीतिक मायनों में काफी महत्वपूर्ण बनती जा रही है। इस रैली को लेकर जिस तरह से सरकार द्वारा सत्ता व संगठनात्मक रूप से तैयारियां की जा रही हैं उससे यह साफ है कि भाजपा की प्रतिष्ठा पूरी तरह से दांव पर लग चुकी है।

सत्तारूढ़ भाजपा के अलावा विपक्षी दलों की भी इस रैली पर पूरी तरह से नजर है।रैली का आयोजन भले ही भाजपा द्वारा किया जा रहा है लेकिन यह रैली सत्तारूढ़ भाजपा के मुकाबले विपक्षी नेताओं के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है। जींद का इलाका शुरू से ही विपक्षी दल इनेलो का गढ़ रहा है। जींद जिले में जींद, नरवाना, 
जुलाना विधानसभा क्षेत्रों पर इस समय जहां इनेलो के विधायक हैं वहीं सफीदों में निर्दलीय तो उचाना में भाजपा का कब्जा है। वर्ष 2009 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान भी जींद जिले में इनेलो के पास ही बहुमत था।ऐसे में यह रैली इनेलो के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। भाजपा इस रैली के माध्यम से जींद क्षेत्र के लोगों अपने साथ जोडऩे का प्रयास करेगी। इस रैली के बाद इनेलो को इस क्षेत्र के लोगों को अपने साथ जोडऩे के लिए बड़ा मुद्दा देना होगा। जींद के इलाके में शुरू से ही अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला कांग्रेस का झंडा बुलंद करते रहे हैं। सुरजेवाला भले ही कैथल से विधायक हैं लेकिन उन्होंने खुद को समूचे क्षेत्र के जाट प्रतिनिधि के रूप में पेश किया है। राष्ट्रीय राजनीति में व्यस्त होने के बाद सुरजेवाला की हरियाणा में सक्रियता बहुत कम हो गई है। ऐसे में हरियाणा तथा राष्ट्रीय परिपेक्ष में यह रैली रणदीप सुरजेवाला के लिए भी खासा महत्व रखती है। कांग्रेस में दिल्ली दरबार की राजनीति करने वाले रणदीप सुरजेवाला को भी भाजपा की रैली के बाद अपने तरीके से इसका जवाब देना पड़ेगा।कई दशक तक कांग्रेस में रहने के बाद भाजपा में शामिल हुए वर्तमान केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह डूमरखां का भविष्य इस रैली पर टिका हुआ है। जींद जिले में इस समय भाजपा के पास केवल एक सीट है। जिस पर बीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता विधायक हैं। भाजपा के पास जींद अथवा जाट बाहुल क्षेत्र में बीरेंद्र सिंह डूमरखां के अलावा कोई बड़ा चेहरा नहीं है। डूमरखां की छवि जनता के नेता की बजाए दिल्ली दरबार के नेता की रही है। ऐसे में डूमरखां भले ही इस रैली की कामयाबी का श्रेय लेने का प्रयास करें लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव में इसका परिणाम पता चलेगा। उक्त सभी
नेताओं से अलग पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा इस रैली को लेकर अभी ज्यादा सक्रियता नहीं दिखा रहे हैं। इस रैली के तुरंत बाद हुड्डा अपनी रथ यात्रा निकालने वाले हैं। जिसके माध्यम से वह रैली आयोजकों को भी जवाब देने का प्रयास करेंगे।






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