समाचार ब्यूरो
07/03/2018  :  13:09 HH:MM
सीने में घाव के बावजूद माओवादियों से निहत्था भिड़ा जवान
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नागपुर सी-60 कमांडो पुलिस के 33 वर्षीय जवान गोमजी मत्तामी अपनी उम्र से ज्यादा मुठभेड़ों में हिस्सा ले चुके हैं। गढ़चिरौली हेडक्वार्टर्स में तैनात गोमजी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अगर हिम्मत हो तो खाली हाथ भी दुश्मन को धूल चटाई जा सकती है।
2006 से जिला पुलिस का हिस्सा रहे गोमजी ने सीने में घाव होने के बावजूद हथियारबंद माओवादियों से खाली हाथ लोहा लिया और उन्हें खदेडऩे में सफल रहे। चार माओवादियों से उनका सामना गढ़चिरौली के इटापल्ली तालुका के जांबिया गट्टा में हुआ। गोमजी की हिम्मत की न सिर्फ पुलिस विभाग में तारीफ हो रही है, बल्कि इसके लिए अगले साल उन्हें वीरता पुरस्कार भी मिल सकता है। गोमजी माओवादी हमलावरों से न केवल अपनी एक- 47 राइफल छीनने में कामयाब रहे, बल्कि उन्हें भी अपने हथियार छोडक़र भागने पर मजबूर करने में सफल रहे। घायल होने और सीने में घाव होने के बावजूद वह व्यस्त बाजार में भाग रहे हमलावरों का पीछा करते रहे। बता दें कि माओवादी अचानक टुकडिय़ों में हमला करते हैं और जवानों पर हमला कर उनके हथियार छीन लेते हैं। लेकिन इस बार वे अपने हथियार और दस कारतूस छोडक़र भागने पर मजबूर हो गए। इस बात पर यकीन करना मुश्किल ही है कि ओसीएचआरआई अस्पताल में भर्ती हंसमुख गोमजी मौत का सामना करके आए हैं। अगर उन पर करीब से हमला करने जा रहे एक हमलावर की पिस्टल अटकी न होती तो कहानी कुछ और हो सकती थी। सादे कपड़ों में माओवादियों की एक टीम ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया था, जब वह साप्ताहिक बाजार से अपनी पुलिस पोस्ट पर वापस लौट रहे थे। उनकी बाकी टीम आगे निकल गई थी और वह अपने एक साथी से मिलने के लिए बाजार में रुक गए थे।






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