समाचार ब्यूरो
09/03/2018  :  11:43 HH:MM
जनाधार खोती जा रही है भारतीय जनता पार्टी
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देश में हो रहे उपचुनाव में भाजपा शासित राज्यों में कांग्रेस की जीत इस बात को दर्शा रही है कि भाजपा धीरे - धीरे जनमत से दूर होती जा रही है।

अभी हाल ही में राजस्थान में हुये उपचुनाव के तहत दो लोकसभा की सीट एवं एक विधानसभा की सीट पर भारी बहुमत से कांग्रेस ने अपनी जीत ही केवल दर्ज नहीं कराई बल्कि दोनों लोकसभा के तहत आने वाले 16 विधानसभा क्षेत्रों में भी भाजपा प्रत्याशी को बहुत पीछे छोड़ दिया। इस तरह राजस्थान की 17 विधानसभा सीट कांग्रेस ने भाजपा से छीन ली। मघ्यप्रदेश में भाजपा की अच्छी स्थिति मानी जा रही थी जहां के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान का कार्यकाल अन्य राज्यों की अपेक्षा बेहतर माना जा रहा था, जहां भाजपा ने शिवराज सिंह चैहान के नेतृत्व में तीन दशक का कार्य काल पूरा किया, इस तरह के हालात में अभी मध्यप्रदेश में हुये
उपचुनाव में दोनों सीट पर कांग्रेस की जीत ने साबित कर दिया कि भाजपा के प्रति आमजनमानस का विश्वास पूर्व की भॉति नहीं रहा । इस तरह के उभरते परिवेश में जहां भाजपा केन्द्र में फिर से 2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी के नेतृत्व में पूर्व की भॉति बहुमत पा लेने की अभिलाषा मन में पाल रखी है, निराधार ही दिखाई दे रहा है। इस तारह के हालात में इस वर्ष के अंतराल में होने वाले भाजपा शासित तीनों राज्य राजस्थान ,मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ भापजा के हाथ से निकल सकते है। उप चुनावों एवं अभी हाल में हुये भाजपा अध्यक्ष अमित शाह एवं भाजपा प्रमुख केन्द्र में भाजपा शासित सरकार के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गृहप्रदेश गुजरात राज्य में हुये विधानसभा के परिणाम इस बात के द्योतक रहे है कि भाजपा की वर्तमान कार्यशैली को देश की जनता नकार चुकी है। जिसके कारण इन चुनावों में भापजा को वह जनाधार नहीं मिला जो शुरू - शुरू में मिला था जिसके वजह से देश भर में एकबार मोदी की तूती बोलने लगी थी । जिसका प्रभाव केन्द्र के लोकसभा चुनाव के साथ - साथ विधानसभा चुनावों में भी देखने को मिला। जिसके वजह से राजस्थान में बेहतर कार्य करने के उपरान्त भी कांग्रेस अल्पमत में आ गई एवं भाजपा सर्वाधिक सीट पर जीत हासिल कर राजस्थान की नं. एक पार्टी बन गई। वर्तमान में उसी भाजपा की हालत दयनीय लगने लगी है। जिससे साफ जाहिर हो रहा है कि भाजपा के प्रति विश्वास आमजन का घीरे - धीरे कम होता जा रहा है। राजस्थान में हुये उपचुनाव के परिणाम इस बात के संकेत दे रहे है। इस बात को भाजपा भी समझने लगी है पर उपरी मन से अपने आप को अब भी जनमत के पास जता रही है।

भाजपा के इस तरह के उभरते हालात के लिये उसकी आर्थिक नीतियां एवं कार्यशैली है जिसे देश की आम जनता नकार चुकी है। जिस तरीके से देश की आमजनता पूरे देश में भाजपा से विगत 4 वर्ष पूर्व से जुड़ती गई, जहां भाजपा नेता नरेन्द्र मोदी में एक नया विश्वास जागृत हुआ और देशभर में मोदी की आंधी चल पड़ी, जिसके कारण भाजपा लोकसभा की अपने इतिहास में सर्वाधिक सीट पाकर देश की एक नं. की पार्टी ही केवल नही बनी बल्कि देश के अन्य राज्यों में हुये विधानसभा चुनाव में भी अपना विजय पताका लहरा दिया । देश की आमजनता ने तकलीफ सहकर नरेन्द्र मोदी सरकार के हर निर्णय का स्वागत इस विश्वास के साथ किया कि देश से भ्रष्टाचार मिटेगा, महंगाई कम होगी, बंद पड़े उद्योग चलेंगे, नये उद्योग खुलेंगे, बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलेगा पर आज तक कुछ हाथ नहीं लगा । बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने की केन्द्र एवं भाजपा शासित राज्य सराकर की सारी की सारी घोषणाएं थोती साबित हुई। बेरोजगार युवाओं को न तो केन्द्र सरकार रोजगार
दे पाई न भापजा शासित राज्य सरकारें । नोटबंदी एवं जीएसटी से आमजन की परेशानियां ही बढ़ी। केवल छलावे की राजनीति होती रही जिसे बदलने के लिये आम जनता ने सत्ता परिवर्तन किया था। यहां बैंक लूट कर लूटेरे देश छोड़ भागते रहे। केन्द्र सरकार इस तरह के हालात का दोष पूर्व कांग्रेस सरकार के मथ्थें मढ़ अपनी
जबाबदेही से पीछ़े भाग रही है । इस तरह के हालत ने देश की अस्मिता पर चोट किया है। जिसके कारण आज उसी नेतृत्व के प्रति देश की आमजनता उदासीन नजर आने लगी है। इस तरह के बदलते परिवेश आगामी चुनावों को प्रभावित करेंगे ।

भाजपा नेता एवं देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्रमोदी कुशल नेतृत्व के धनी होने के साथ - साथ अच्छे वक्ता भी है जिनकी अभिव्यक्ति ने पूरे देश को ही नहीं विश्व के अनेक देशों को भी आकर्षित कर लिया । अपनी इसी अभिव्यक्ति के चलते विदेशों में भी आज ये चर्चित बने हुये है। विदेशों में आज तक के इतिहास में वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सर्वाधिक यात्राएं हुई है जहां आतंकवाद के मसले पर विश्व के अनेक देशों को अपने साथ लेने का प्रयास किया और कुछ हद तक सफल भी रहे । देश में गांधी जयन्ती पर घोषित सफाई अभियान का सपना धीरे - धीरे साकार नजर आने लगा है जहां देश का हर नागरिक इस पहलू को समझने लगा है। इस दिशा में ये सफल तो रहे है पर केवल इसी से तो देश नहीं चलता । देश में रोजगार देने वाले उद्योग रहे नहीं, इस दिशा में सरकार बिल्कुल मौन है। अन्नदाता किसान मुनाफाखोरों के चंगुल में फंसे है जिसे केवल झांसा ही सरकार की ओर से मिलता दिखाई दे रहा है। बाजार पर अभी भी मुनाफाखोरों का वर्चस्व है। शिक्षा एवं चिकित्सा सेवाएं आमजन से देर होती जा रही है। देश के उद्योगपति विदेशों में उद्योग लगाते जा रहे है और बेईमान बैंक को लूट कर विदेश में पनाह ले रहे है। सीमा पर निर्दोष लहू बह रहा है। इस तरह के अनेक सवाल सामने है जिनका आमजनता समाधान सरकार से चाहती है। समाधान न मिलने पर जनाक्रोश उभरता है जो सत्ता परिवर्तन का कारण होता है। वर्तमान की भाजपा सरकारें आमजन के इस पैमाने पर खरा नहीं उतर पाने के कारण जनाधार धीरे - धीरे खोती जा रही है।






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