समाचार ब्यूरो
18/03/2018  :  13:42 HH:MM
आतंकी जगतार सिंह तारा को आजीवन कारावास और जुर्माना
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चंडीगढ़ पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड मामले में आतंकी जगतार सिंह तारा को चंडीगढ़ की बुड़ैल जेल में लगी सीबीआई की अदालत ने आजीवन कारावास की सजा और ३5000 रुपये जुर्माना लगाया। तारा के वकीलों ने बताया कि सजा के विरुद्ध कोई अपील नहीं की जाएगी। चंडीगढ़ की बुडै़ल जेल में बंद जगतार सिंह तारा ने 25 जनवरी को अपना गुनाह कबूल किया था।

जगतार सिंह तारा रोपड़ के गांव डेकवाला का रहने वाला है और आतंकवादी संगठन खालिस्तानी टाइगर फोर्स का प्रमुख भी है। सजा सुनाये जाने के पश्चात तारा के परिवार के सदस्य व अकाली दल अमृतसर के अध्यक्ष सिमरनजीत सिंह मान अपने समर्थकों के साथ उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि उन्हें हिंदुस्तान की हुकुमत और कानूनों में विश्वास नहीं है। उनके समर्थकों ने खालिस्तान के पक्ष में नारेबाजी भी की।मामले की स्थानीय बुड़ैल जेल में सीबीआई की विशेष अदालत में 9 मार्च को सुनवाई के दौरान तारा को अपने बचाव में गवाह पेश करने को कहा था। तारा ने कहा था कि वह 25 जनवरी 2018 को दिए गए अपने कबूलनामे पर ही कायम है और इसे ही अंतिम समझा जाए। बुड़ैल जेल में सीबीआई की विशेष अदालत में तारा ने जज को इस बाबत 6 पन्ने का लिखित कबूलनामा दिया जिसमें कहा गया कि हां मैंने ही बेअंत सिंह को मारा लेकिन मुझे इस कत्ल पर किसी भी तरह का कोई पछतावा नहीं है।

३1 अगस्त 1995 को पंजाब सिविल सचिवालय की इमारत के पास हुए मानव बम ब्लास्ट करवाकर पंजाब के तत्कालीन मु यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या कर दी थी। इस ब्लास्ट में 17 अन्य लोगों की भी मौत हो गई थी जिसमें जगतार सिंह तारा को मु य आरोपी बनाया गया है। सरदार बेअंत सिंह कांग्रेस के नेता और पंजाब के 1992 से 1995 तक मु यमंत्री थे। मु यमंत्री के रूप में सरदार बेअंत सिंह को पंजाब आतंक के दौर दौरान सामान्य स्थिति बहाली का श्रेय दिया जाता है। इसलिए 18 दिस बर 201३ को डाक विभाग ने सरदार बेअंत सिंह जी के स मान में एक डाक टिकट जारी किया।

21 जनवरी 2004 को चंडीगढ़ की बुड़ैल जेल से अपने साथियों समेत जगतार सिंह तारा 94 फुट लंबी सुरंग तैयार कर नाटकीय ढंग से फरार हो गया था। करीब 10 साल बाद दिसंबर 2014 में इंटरपोल की मदद से जगतार सिंह तारा को भारतीय एजेंसियां और थाईलैंड की एजेंसी के साथ जॉइंट ऑपरेशन से गिर तार किया गया। भारत लाने के बाद उसे फिर से चंडीगढ़ की बुड़ैल जेल में रखा गया है। बेअंत सिंह की हत्या मामले में दायर आरोप पत्र में कुल 15 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इस केस में जुलाई 2007 में 6 दोषियों में से 2 को मौत की सजा, ३ को उम्रकैद और एक अन्य को 10 साल कैद की सजा सुनाई गई थी। जगतार सिंह हवारा और बलवंत सिंह को फांसी और हत्याकांड के ३ अन्य दोषियों शमशेर सिंह, लखविंदर सिंह और गुरमीत सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। नसीब सिंह को इस मामले में 10 साल की सजा सुनाई गई, हालांकि पिछले 11 साल से चल रहे मुकदमे के दौरान वह पहले ही यह सजा काट चुका था। जगतार सिंह हवारा, बलवंत सिंह, शमशेर सिंह, लखविंदर सिंह और गुरमीत सिंह को आईपीसी की धारा ३02, ३07 और 120 बी के तहत दोषी पाया गया था। जबकि नसीब सिंह को विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत दोषी करार दिया गया था। विशेष अदालत ने इस मामले में 7 वें अभियुक्त नवजोत सिंह को पहले ही बरी कर दिया था।






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