समाचार ब्यूरो
27/03/2018  :  11:15 HH:MM
भड़ास निकलने दो- इससे सरकार को फायदा होगा
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बजट सत्र के द्वितीय चरण में लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही नहीं चल पा रही है। पिछले 15 दिनों से सदन की कार्यवाही 5 मिनट के अंदर ही स्थगित हो रही है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तल्खी बनी हुई है। इसका कोई अच्छा संदेश जनता के बीच में नहीं जा रहा है। वहीं इसमें सबसे ज्यादा नुकसान आगे चलकर सरकार की विश्वसनीयता पर होगा।

पंजाब नेशनल बैंक घोटाले को लेकर विपक्ष के आक्रामक रुख से सत्ता पक्ष ने भी इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाकर, सदन की कार्यवाही चलाने के लिए, कोई ऐसे प्रयास नहीं किए, जिससे यह गतिरोध खत्म हो। कांग्रेस, पंजाब नैशनल बैंक वाले मामले में झुक भी गई थी। किंतु सत्ता पक्ष उसके बाद अड़ा रहा। जिसके कारण यह गतिरोध खत्म होने की स्थान पर और बढ़ गया है। पर्याप्त सदस्य संख्या के नहीं होने के बाद भी कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देने और उसका साथ अन्य दलों द्वारा देने से सरकार के सामने एक बड़ी राजनीतिक चुनौती सामने आ गई है। अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से विपक्ष को हर मसले पर अब सरकार को घेरने
और अपनी बात रखने का मौका मिल गया है। वहीं सदन में मतदान कराने का भी मौका कांग्रेस को मिल गया है। पिछले 15 दिनों से जिस तरह से आसंदी के सामने गर्भ गृह में प्रदर्शन हो रहा है। कार्यवाही शुरू होते ही राजद के सहयोगी दल गर्भ गृह में हंगामा करते हैं, और सदन की कार्यवाही तुरंत स्थगित हो जाती है। सत्ता पक्ष और विपक्ष आपस में बात करके सदन की कार्यवाही संचालित करने के लिए कोई रास्ता नहीं निकाल पा रहे हैं। संसदीय कार्य मंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, राज्यसभा के सभापति और प्रधानमंत्री मोदी यदि इस मामले में थोड़ा सा लचर रवैया अपनाते, तो यह स्थिति निर्मित नहीं होती। अभी तक के संसदीय इतिहास में इस तरह की स्थिति कभी देखने को नहीं मिली। इतने लंबे समय तक संसद की कार्यवाही विशेष रूप से संसद का बजट सत्र बाधित हुआ हो। बजट भी बिना चर्चा के पास कराए जाने से सरकार की छवि पर विपरीत असर पडा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसे मोदी सरकार की कमजोरी के रूप में देखा जा रहा है। केंद्र सरकार के पास पूर्ण बहुमत है। चर्चा कराने से विपक्ष की भड़ास निकलती। आम जनता के एक बड़े वर्ग को भी यह लगता है कि उनकी बात सरकार के सामने आ गई है। सरकार भी विपक्ष के आरोपों पर सदन में जवाब देती है। सरकार, अपने जबाब में जनता को भरोसा देती, कि वह जनहित में ही काम कर रही है। इससे विपक्ष के आरोपों की हवा भी निकलती।

लगातार 2 सप्ताह लोकसभा और राज्यसभा में सदन की कार्यवाही संचालित नहीं होने से सबसे ज्यादा नुकसान सरकार की छबि को हो रहा है। सरकार का सदन में बहुमत होता है। सदन चलाने की जिम्मेदारी भी सरकार की होती है। लोकसभा अध्यक्ष, ऐसी स्थिति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच समन्वय बनाने के लिए अपने
विशेषाधिकार का उपयोग करते हैं। संसदीय कार्य मंत्री विपक्ष के साथ हमेशा चर्चा करके मामले को सुलझाने का काम करते हैं। पक्ष और विपक्ष के बीच तकरार हमेशा होती रही है, और चर्चाओं से सुलझती भी है। पहली बार केंद्र सरकार के बारे में यह संदेश जा रहा है, कि वह संसदीय फ्लोर मैनेजमेंट में फेल हो गई है। यह बात अब भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ सांसद और सहयोगी दलों के बीच भी होने लगी है।

कांग्रेस जो आरोप लगा रही है। संसद में उनकी चर्चा नहीं होती है इससे आरोपों पर जनता भी, विस्वास भी करने लगती है। संसद में सदस्य अपनी बात निर्भीकता के साथ रख सकते हैं। जब सरकार इन सब आरोपों का जवाब देती है, तो सरकार का पक्ष सामने आता है। सरकार का पक्ष आने के बाद आम जनता को यह विश्वास
होता, कि उसने जिसे बहुमत के साथ चुना है, वह सही तरीके से अपना काम कर रहे हैं। विपक्ष आरोप लगाकर सरकार के काम में व्यवधान पैदा कर रहा है। 1975 से 77 के बीच लगभग ढाई वर्ष आपातकाल के दौर में अखबारों में सेंसरशिप लगी थी।

विपक्ष के नेता जेलों में बंद थे। वह अपनी बात नहीं कह पा रहे थे। जैसे ही आपातकाल समाप्त हुआ, अटकलों का जो बाजार चुनाव के दौरान चला। उसमें कांग्रेस का बुरी तरह सफाया हो गया। विपक्ष के आरोप और उसकी भड़ास यदि निरन्तर बाहर निकलती, तो जनता की सोच सरकार को लेकर कुछ और ही बनती है। इस तथ्य को सरकार को ध्यान में रखना चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष है, तो सरकार है। विपक्ष नहीं है ,तो फिर सरकार भी नहीं है। उल्लेखनीय है कि जब तक रावण से राम लड़ रहे थे, तब तक राम की कीर्ति सारे जग में फैल रही थी। रावण की मृत्यु होने के बाद राम की कीर्ति में कुछ नया नहीं जुड़ा। उनकी मुसीबतें ही बढ़ती रही। रूस जब तक अस्तित्व में था। तब तक अमेरिका एक ताकतवर देश बना हुआ था। रूस का विघटन हुआ तो अमेरिका भी उसके बाद तेजी से कमजोर हो गया। सत्ता पक्ष तभी मजबूत रह सकता है। जब विपक्ष भी अपनी उपस्थिति मजबूती से दर्ज करा रहा हो यह बात सरकार के कर्णधारों को ध्यान में रखना चाहिए।






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