समाचार ब्यूरो
29/03/2018  :  12:27 HH:MM
सनशाइन बस देगी बच्चों को स्कूल बस में पूरी सुरक्षा
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नई दिल्ली अशोक लीलैंड ने स्कूली बच्चों के लिए जो सनशाइन बस डिजाइन की है वो अभी तक की सबसे आधुनिक सुरक्षा उपायों से सुसज्जित बस है। इस विशेष तरह की बस में सरकार द्वारा निर्धारित सुरक्षा के सभी मापदंडों का पालन किया गया है।

बस का दरवाजा सुरक्षित है, सीटों की ऊंचाई छोटे बच्चों के मुताबिक डिजाइन की गई है और खिड़कियों की ऊंचाई भी ऐसी है कि बच्चों को बाहर का दृश्य देखने में परेशानी नहीं होती। देखा गया है कि दुर्घटना की स्थिति में बस के सामने का हिस्सा सबसे ज्यादा क्षतिग्रस्त होता है, जिससे बड़ी जनहानि होती है। लेकिन, सनशाइन बस का बंपर बेहद मजबूत होता है, जो सामने से टक्कर की स्थिति में बस के अंदरूनी हिस्से में नुकसान नहीं होने देता। सनशाइन बस की विशेषता है कि बस का आपातकाल दरवाजा बाहर की और खुलता है। इस बस में आग बुझाने वाले 10 किलोग्राम के तीन सिलेंडर हैं। बस में एक प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स भी है, जो आपातकालीन स्थिति में मददगार होता है। बस बाहर निकलते समय दरवाजे से बच्चों के सिर न टकराएं इसलिए दरवाजे पर सुरक्षा के उपाए हैं। बस में फ्री-फ्लो फ्यूल सिस्टम लगा है। हवा के झोंकों को रोकने के लिए सनशाइन बस में पुश-टू-फिट कनेक्टर लगा है। स्वचालित एयर-लॉक हटाने के लिए इंकांक फीड पंप भी
बस में लगा है। सनशाइन बस में धातु के बम्पर लगे हैं जो बेहद मजबूत हैं और सामने से बस की टक्कर होने पर उसका पभ्र ाव अदं र बैठे बच्चों पर नहीं आता। ये बंपर मरम्मत में भी आसान हैं। सनशाइन बस के सुरक्षा उपायों के संबंध में किए गए सख्त परीक्षणों में मानक 90 प्रतिशत विश्वसनीयता और अपटाइम पाए गए हैं।
बस में बच्चों के लिए सीट की ऊंचाई कम है और खिड़कियां ऐसी है, जहाँ से बैठे हुए बच्चों को बाहर का दृश्य स्पष्ट दिखाई देता है। इसे बेस्ट-इन-क्लास विजिबिलिटी एंड वेंटिलेशन कहा जाता है। बस की हर सीट से बाहर का दृश्य दिखाई देता है। सुरक्षा मानकों के मुताबिक खिडक़ी पर गार्ड रेल लगी है। हर सीट के पीछे टूथ गार्ड लगे हैं, जो बच्चों को बस झटकों के समय चोट लगने से बचाते हैं। हर सीट पर हेंडल भी लगे हैं। आपातकालीन स्थिति में अलार्म की सुविधा भी बस में है। बच्चों के लिए सनशाइन जैसी आधुनिक और सुरक्षा मानकों वाली बस बनाने वाली अशोक लीलैंड कंपनी देश में वाणिज्यिक वाहनों के दूसरे सबसे बड़े निर्माता हैं। ये दुनिया में बसों की चौथी सबसे बड़ी निर्माता और दुनिया में 12वीं सबसे बड़े ट्रक निर्माता हैं। इस वहाँ निर्माता कंपनी का टर्नओवर 3.3 बिलियन यूएस डॉलर (2016-17) से अधिक का है। अशोक लीलैंड की बसें 50 से अधिक देशों में संचालित होती हैं। 70 मिलियन से अधिक यात्री हर दिन अपने गंतव्य तक जाने में अशोक लीलैंड की बसों का उपयोग करते हैं। जबकि, 700,000 से अधिक ट्रकों के पहिए रोज सडकों पर घूमते हैं। भारतीय सेना में तैनात रसद वाहनों और दुनियाभर में सशस्त्र बलों के साथ महत्वपूर्ण भागीदारी के साथ अशोक लीलैंड देश की सीमाओं को सुरक्षित रखने में भी मददगार हैं। चेन्नई में अशोक लीलैंड का मुख्यालय
है और इसकी निर्माण संयंत्र दुनियाभर में 9 स्थानों पर फैले हैं। ग्रेट ब्रिटेन और रास अल खैमाह (संयुक्त अरब अमीरात) में कंपनी के एक-एक संयुक्त उद्यम हैं। विश्व-स्तरीय प्रौद्योगिकी और सुरक्षा प्रदान करने के लिए अशोक लीलैंड की आर एंड डी (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) टीम हमेशा काम करती रहती है। यही कंपनी का मुख्य फोकस भी रहा है। रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा देने वाले वातावरण में 1000 से ज्यादा लोगों की डेवलपमेंट टीम उन नई तकनीकों की खोज में लगी रहती है जो खरीददार को उसके द्वारा दिए गए मूल्य की सुविधा प्रदान करती है। साथ ही सुरक्षा और पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान भी ये टीम करती है।






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