समाचार ब्यूरो
07/04/2018  :  11:26 HH:MM
नक्सलवाद : गलतफहमियां न पाले
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केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले दिनों दावा किया है कि देश में नक्सलवाद की गंभीर चुनौती अब खत्म होने की कगार पर है। यह इससे स्पष्ट है कि अब माओवादी सुरक्षाबलों के खिलाफ कायराना हमलों का सहारा ले रहे हैं, क्योंकि वे सीधे-सीधे मुकाबला करने में सक्षम नहीं हैं।

पिछले दिनों देश में नक्सल विरोधी अभियानों का नेतृत्व करने वाले केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 79 वें स्थापना दिवस पर गृहमंत्री ने कहा कि नक्सलियों के खिलाफ इन बलों के अभियानों के कारण हाल के दिनों में माओवादियों की घटनाओं में भारी कमी आई है और नक्सलियों के हताहत होने की संख्या बढ़ी है।
लेकिन हम कहना चाहेंगे कि यह बात सच होने के बावजूद आश्वस्तिदायक नहीं है। यह सच है कि नक्सलियों द्वारा आत्मसमर्पण की घटनाएं भी बढ़ी हैं। लेकिन यह भी सच है कि नक्सली अब भी हिंसक वारदातें कर रहे हैं और सुरक्षा बलों के लोग मारे जा रहे हैं।

यह कैसे भुलाया जा सकता है कि छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों ने सुरक्षा बल के नौ जवानों को शहीद कर दिया था। जवानों की माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल नक्सलियों के बिछाए बारूदी सुरंग की चपेट में आ गई थी, जिसमें विस्फोट होने से ये जवान शहीद हो गए थे। माओवाद अब गंभीर चुनौती बना हुआ है। नक्सल प्रभावित इलाकों में सडक़ निर्माण कार्य के दौरान सीआरपीएफ जवानों की मौत का हवाला देते हुए गृहमंत्री का कहना है कि देश में नक्सलवाद की समस्या अपने आखिरी चरण में पहुंच चुकी है और लोग अच्छी तरह यह समझने लगे हैं कि नक्सली गरीब विरोधी, आदिवासी विरोधी और विकास विरोधी हैं। सरकार के दावों के बावजूद छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में एक बार फिर एक आइइडी में हुए विस्फोट में जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) के चार जवान घायल हो गए। विस्फोट फुलबागड़ी पुलिस थाना क्षेत्र में सिरसेत्ती गांव के पास एक जंगल में हुआ, जब सुरक्षाकर्मी एक नक्सलरोधी अभियान चला रहे थे। डीआरजी प्रदेश पुलिस बल का हिस्सा है। नक्सलवादियों को अब भी यह विश्वास है कि वे हिंसा के बूते देश में क्रान्ति ला सकते हैं। लेकिन हम मानते हैं कि ऐसी हिंसा से कुछ समय के लिए कुछ विशिष्ट प्रभावित क्षेत्रों उत्तेजना, तनाव अव्यवस्था, आतंक और अराजकता जैसी स्थिति बन सकती है। लेकिन इससे देश का निजाम बदलना मुमकिन नहीं है। फिर नक्सलियों ने जिस तरह धनसंग्रह के लिए वसूली का जो सिलसिला चला रखा है उससे उनके भटकाव का पता चलता है। हमारा मानना है कि सरकार और नक्सली दोनों ही गलतफमियाँ पाले हुए हैं। और, गलतफहमियों का शिकार कोई समूह निर्णय नहीं ले सकता। इसलिए हम कहना चाहते हैं कि सरकार और नक्सलियों को गलतफमियों को दूर
कर वास्तविकताओं को समझें और मिलकर स्थायी शांति स्थापित करने की राह निकालें।






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