समाचार ब्यूरो
07/04/2018  :  11:32 HH:MM
हिंदी सिनेमा की प्रथम महिला रहीं हैं देविका रानी
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सि नेमा के आरम्भ से ही हर विभाग में महिलाएं अहम भूमिकाएं निभाती रही हैं। उस दौर में भी, जब समाज का संभ्रांत तबका सिनेमा को महिलाओं के लिए अच्छा क्षेत्र नहीं मानता था और पर्दे पर अदाकारी का हुनर दिखाने वाली महिलाओं को लेकर तमाम तरह के पूर्वाग्रहों से ग्रसित होता था, सिनेमा के विकास में महिलाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण रही है।

ऐसी ही एक हस्ती रही हैं देविका रानी। 30 और 40 के दशक में देविका रानी की प्रतिभा और उपलब्धियों ने उन्हें हिंदी सिनेमा की प्रथम महिला यानि फ़र्स्ट लेडी का ख़िताब दिलाया था। देविका रानी का योगदान सिनेमा के क्षेत्र में इसलिए भी अहम माना जाता है, क्योंकि फि़ल्मों में काम करने वाली महिलाओं को लेकर समाज की पूर्वाग्रही सोच को बदलने में उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया। एक प्रभावशाली बंगाली परिवार से संबंध रखने वाली देविका के सिनेमा में आने से ऐसी महिलाओं को प्रेरणा मिली, जिनके सपने समाज की रूढि़वादी सोच से टकराकर ध्वस्त हो जाते थे। देविका रानी ने ख़ुद सिनेमा को रूढि़वादी सोच से आज़ाद किया। कि देविका रानी की ये पहली फि़ल्म थी। कर्म अंग्रेज़ी और हिंदी भाषाओं में बनायी गयी थी। देविका रानी ने, पति हिमांशु रॉय के साथ मिलकर बॉम्बे टाकीज़ की स्थापना की, जो अपने दौर का तकनीकी रूप से सबसे उन्नत फि़ल्म स्टूडियो माना जाता था। बॉम्बे टाकीज़ ने हिंदी सिनेमा को अशोक कुमार, दिलीप कुमार, राज कपूर, मधुबाला, मुमताज़ और लीला चिटनिस जैसे अभिनेता दिये। सिनेमा को शुरुआती दशकों में अच्छी नजऱ से नहीं देखा जाता था। उस चुनौतीभरे दौर में फ़ातिमा बेगम ने 1926 में अपनी प्रोडक्शन कंपनी फ़ातिमा फि़ल्म्स की नींव रखी थी। अपने बैनर तले उन्होंने बुलबुल-ए- परिस्तान, चंद्रावल, हीर रांझा और कनकतारा जैसी फि़ल्मों का निर्माण किया। स्क्रीनह्रश्वले लिखने और निर्देशन की जि़म्मेदारी भी ख़ुद ही उठायी।1916 में कोलकाता में जन्मी एस्थर विक्टोरिया अब्राहम को हिंदी फि़ल्म इंडस्ट्री की पहली महिला प्रोड्यूसर माना जाता है। विक्टोरिया पर्दे पर प्रमिला के नाम से मशहूर थीं। उन्होंने 1947 में पहली मिस इंडिया प्रतियोगिता भी जीती थी। उस वक़्त
उनकी उम्र 31 साल थी। उस दौर में फि़ल्म के प्रदर्शन के दौरान रील प्रोजेक्टर बदलने में 15 मिनट का वक़्त लगता था। प्रमिला थिएटर कंपनी में इस दौरान अपने नृत्य से दर्शकों का मनोरंजन करती थी। एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में ये उनकी शुरुआत थी। प्रमिला ने लगभग 30 फि़ल्मों में स्टंट स्टार के तौर पर भी काम किया। अपने बैनर सिल्वर प्रोडक्शंस के तहत प्रमिला ने लगभग 16 फि़ल्मों का निर्माण किया। पाकिस्तान की लगातार यात्रा करने की वजह से प्रमिला पर पाकिस्तानी जासूस होने का आरोप भी लगा था हालांकि बाद में साबित हुआ कि प्रमिला अपनी फि़ल्मों के प्रमोशन के लिए पाक की यात्राएं करती हैं। प्रमिला का 2006 में 89 वर्ष की आयु में देहांत हुआ। हिंदी सिनेमा की बेहतरीन अदाकारा नर्गिस की मां जद्दन बाई 30 और 40 के दशक की जानी-मानी फि़ल्मी हस्ती रहीं। जद्दन बाई ने अदाकारी, गीत-संगीत और नृत्य के अलावा फि़ल्म प्रोडक्शन में भी अपना हुनर दिखाया था। जद्दन बाई ने संगीत फि़ल्म्स के नाम से अपनी प्रोडक्शन कंपनी शुरू की थी, जिसके बैनर तले उन्होंने 1935 में तलाशे-हक़ बनायी। इस फि़ल्म में उन्होंने अभिनय करने के साथ इसका संगीत भी दिया। बेटी नर्गिस को बतौर बाल कलाकार उन्होंने ही लांच किया। 1936 में उन्होंने ‘मैडम फ़ैशन’ शीर्षक से फि़ल्म का निर्माण किया, जिसमें अभिनय करने के साथ इसे लिखा और संगीत तैयार किया।






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