समाचार ब्यूरो
08/04/2018  :  12:13 HH:MM
भारी गड़बडिय़ों का खुलासा
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सीएजी की रिपोर्ट ने दिल्ली में सामाजिक कल्याण योजनाओं में भ्रष्टाचार और गड़बडिय़ो का खुलासा किया है। इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। लाजिमी है कि इससे अरविंद केजरीवाल को केंद्र और भाजपा पर निशाना साधने का मौका मिला है। मगर असली मुद्दा यह है कि गड़बडिय़ां कैसे रोकी जाएं? ये समस्याएं यहां सामने आई हैं, वैसा कई राज्यों में होता रहा है।

दर्भाग्यपूर्ण है कि इनका आज तक कोई हल नहीं निकला। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा है कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में पाई गईं गड़बडिय़ों के लिए दोषी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। सूत्रों के मुताबिक दिल्ली सरकार ने रिपोर्ट से जुड़े 50 मामलों को सीबीआई जांच के हवाले करने का फैसला किया है। केजरीवाल ने सामाजिक कल्याण योजनाओं के बारे में सीएजी की टिह्रश्वपणी को लेकर उप-राज्यपाल (एलजी) पर निशाना साधा। कहा कि दिल्ली में आज राशन माफिया पूरी तरह हावी है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट से सबक लेते हुए राशन की होम डिलीवरी के प्रस्ताव पर दोबारा विचार करना चाहिए। सीएजी की ओर से
वित्त वर्ष 2016-17 के लिए दिल्ली के वित्त, राजस्व, सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों पर तीन रिपोर्टें जारी की हैं, जिनकी चर्चा दिल्ली विधानसभा में केजरीवाल ने की। इससे पहले रिपोर्ट के एक हिस्से की फोटो पोस्ट करते हुए केजरीवाल ने कहा- दिल्ली में पूरा राशन सिस्टम माफिया की चपेट में है। यही वो चीज है, जिसे एलजी होम डिलीवरी को खारिज कर बचाना चाहते हैं। अगर होम डिलीवरी हो, तो ये माफिया राज खत्म हो सकता है। सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में एफसीआई के गोदामों से वितरण केंद्र तक कई गड़बडिय़ों का जिक्र किया है। आम आदमी पार्टी सरकार को सबसे ज्यादा यह बात चुभ रही है कि उसके वोट बैंक वाले तबकों खासकर  एससी/एसटी और पिछड़ों से जुड़ी सोशल वेलफेयर स्कीमों, पेंशन स्कीम और कई विकास योजनाओं के अमल में भी गड़बड़ी की गई है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाले तथ्य के तौर पर यह सामने आया है कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत दिल्ली में अब तक एक भी शौचालय नहीं बना है। सीएजी की रिपोर्ट में डीटीसी में प्रबंधन
की कमी और लापरवाही के चलते राजस्व को करीब पौने तीन करोड़ रुपये के नुकसान की बात कही गई है। नगर निगमों के कामकाज पर भी सवाल उठाए गए है। कहा है कि सडक़ों के निर्माण में ठेकेदारों की लापरवाही और नजरअंदाजी के चलते काम नहीं हुए।






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