समाचार ब्यूरो
28/04/2018  :  10:02 HH:MM
सहिष्णु देशों में भारत चौथे पायदान पर क्यों और कैसे?
Total View  374

देश में पिछले कुछ सालों से खासतौर पर जब से मोदी सरकार आई है सहिष्णुता बनाम असहिष्णुता पर गर्मा-गरम बहस जारी है। बहस भी इसलिए हो रही है क्योंकि लंबे समय तक असहिष्णुता को लेकर देश के अधिकांश बुद्धिजीवियों, कलाकारों, साइंसदानों, इतिहासकारों समेत सम्मानित व्यक्तियों ने जोरदार विरोध किया, जिसका असर विश्वस्तर पर दिखाई दिया था।

इसी बीच सहिष्णुता के पैमाने तय करने और वैश्विक सर्वे व अध्ययन करने की बात भी सामने आई। इस अध्ययन में भारत को सहिष्णु देशों में चौथे पायदान में खड़ा बताया जा रहा है, इसलिए राजनीतिक तौर पर हमारी बांछें खिली-खिली नजर आ रही हैं। इसके साथ ही कहा जा रहा है कि अब सहिष्णुता और असहिष्णुता को लेकर सिर्फ देश में ही नहीं बल्‍कि विश्‍वभर में चर्चा तेज हो गई है। ऐसे समय में जबकि अनेक देशों में गृहयुद्ध के हालात बने हुए हैं, लोग एक-दूसरे को शंका की नजरों से देखने का काम ज्यादातर कर रहे हैं। बात साफ है कि जहां विश्वास नहीं होगा वहां हिंसा अवश्य ही होगी। इसलिए शरणार्थियों को लेकर भी अनेक देशों
की सीमाओं पर स्थिति संकटमय है। इस बात को लेकर भी बहस जारी है कि धर्म, संप्रदाय, जाति और उच्च व निम्न वर्ग को पीछे छोड़ते हुए क्षेत्रियता वाली समस्या ने अब अजदहे की शक्ल में शांति और सहअस्तित्व को निगलने की भरसक कोशिश की है। इसे लेकर जो हिंसा शुरु हुई है वह जातिगत और सांप्रदायिक हिंसा से
भी ज्यादा खतरनाक साबित हो रही है। यहां आपको बतलाते चलें कि हम किसी भी प्रकार की हिंसा का समर्थन नहीं करते हैं, इसलिए किंचित हिंसा भी बर्दाश्त नहीं कर सकते। ऐसे प्रयास करने की वकालत भी करते हैं, जिससे हिंसा को खत्म किया जा सके। बावजूद इसके भारत में ही उत्तर भारतीय और दक्षिण भारतियों
के बीच होने वाली हिंसा किसी से छुपी नहीं है। इससे हटकर विश्वस्तर पर विकसित देशों में विकासशील देशों के नागरिकों के साथ दोयम दर्जे का बर्ताव और बातबात पर उन्हें प्रताडि़त करने की घटनाएं भी अब आम हो चली हैं। इसे देखते हुए अध्ययनकर्ताओं ने यह सर्वे किया है। दरअसल 27 देशों में इह्रश्वसोस मोरी द्वारा किए
गए एक अध्ययन का हवाला देते हुए बताया जा रहा है कि सहिष्णु देशों के मामले में कनाडा पहले पायदान पर है। इसके बाद इस सूची में दूसरे पायदान पर चीन और उसके बाद तीसरा स्थान मलेशिया का आता है, जबकि हम चौथे स्थान से खुश हो रहे हैं। इस सर्वे के मुताबिक हंगरी के लोग अपने देश को सबसे कम सहिष्णु मानते हैं। इसके बाद साउथ कोरिया और ब्राजील का स्थान है। इन देशों की अपनी समस्याएं हैं, जिनमें सबसे ज्यादा समस्याग्रस्त देश हंगरी ही रहा है, जहां जीवन जीना सबसे दूभर काम माना जाता रहा है, वहीं दूसरी तरफ कनाडा है जहां का वातावरण किसी बीमार इंसान को भी स्वस्थ बनाने और बेहतर से बेहतर काम करने को प्रेरित करता है। जहां तक चीन और भारत की बात है तो यह सभी जानते हैं कि इन देशों में बढ़ती जनसंख्या सबसे बड़ी समस्या के तौर पर सामने आती है। जनसंख्या विस्फोट से निजात पाने के लिहाज से अनेक कार्य किए गए, कानून भी बनाए गए, लेकिन सार्थक परिणाम जो कि आने चाहिए थे वो नहीं आए। इस वजह से शिक्षा, स्वास्थ्य और बेरोजगारी की समस्या बहुतायत में देखने को मिलती है। बावजूद इसके चीन ने मानवशक्ति का सदुपयोग बखूबी किया है, जिस कारण आज वह दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक देश बनने की दौड़ में आगे नजर आ रहा है।






Enter the following fields. All fields are mandatory:-
Name :  
  
Email :  
  
Comments  
  
Security Key :  
   8506377
 
     
Related Links :-
सिंधिया की सीख होगी कितनी कारगर !
मुसीबत में दूध किसान
भारत माता के महान और समर्पित सपूत
अरबों रुपए किसानों को बांटने के बाद भी किसानों में नाराजगी क्यो
आतंकवादियों का अपना कोई धर्म नही
योग दिवस पर वीआईपी कलचर रहा हावी
फीफा विश्व कप की अद्भुत चमक
भाजपा-पीडीपी गठबंधन से देश को क्या मिला.....?
अधिकारी भयभीत हैं तो जनता का क्या होगा
जज्बे से भरेगा नापाक हरकतों का जख्म