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समाचार ब्यूरो
29/04/2018  :  15:30 HH:MM
फिर शान बनी हमारी लाडो
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हरियाणा की बेटी ने एक बार फिर हमारा मान बढ़ाया है। शान बनी है हमारी 22 साल की लाडो नेहा मित्तल इस बार सबसे कमउम्र में आईएएस की परीक्षा में सफल हुई हैं। उन्होंने तमाम बाधाओं को मात देते हुए देश की शीर्ष प्रशासनिक परीक्षा में न सिर्फ कामयाबी हासिल की बल्कि वे दूसरों के लिए नजीर बनी हैं।
मेरा हरियाणा सरकार से अनुरोध है कि नेहा जैसी बेटियों को राज्य में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का ब्रांड अम्बेसडर बनाया जाए। खेल की सरजमी से लेकर पढ़ाई लिखाई प्रशासन या अन्य कोई भी क्षेत्र बेटियों ने साबित कर दिया है कि वे अब पुरुष वर्ग के मिथक को तोड़ चुकी हैं। वे किसी से कम नहीं के बजाए सबसे  आगे रहने के सूत्र में यकीन रखती हैं। एक्का-दुक्का अपवाद नहीं बल्कि सफलता बड़े पैमाने पर बेटियों के कदम चूम रही है। हरियाणा के लिए इससे खुशी की बात क्या हो सकती है कि जिस राज्य की छवि महिलाओं के शोषण,बेटियों को कोख में मारने, रूढिय़ों की जकडऩ और अन्य तमाम नकारात्मक चीजों की वजह से विकृत रूप में पेश की जाती थी। अब वही राज्य नए पैमाने गढ़ रहा है। और इस कहानी में सबसे ज्यादा दमखम खुद बेटियों का है। हालांकि समाज भी बदलाव की राह पर है। अगर हम समाज की अच्छाइयों को उजागर नहीं करेंगे तो ये भी बेइमानी होगी। महिलाओं के खिलाफ अपराध, रेप, यौन उत्पीडऩ जैसी घटनाओं से हमें दुख और आक्रोश होता है तो स्वाभाविक रूप से हमें कुछ भी नहीं सुहाता। हम पूरे समाज, सरकार और संस्थाओं के साथ हर व्यक्ति को कोसते हैं। कोसना भी चाहिए लेकिन जहां उम्मीद की किरण नजर वहां प्रकाश को चहुंओर फैला देना भी हमारी जिम्मेदारी है। गुरुग्राम शहर दिल्ली से सटा हुआ है। इसकी अपनी पहचान है। राजधानी से करीबी के नाते कई बार यहां सुदूरवर्ती इलाकों जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव नहीं खटकता। नेहा गुरुग्राम की हैं। उन्होंने शहर की शान में भी इजाफा किया है। लेकिन हमें इस रोशनी को प्रदेश के हर कोने तक पहुंचाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। नेहा ने दिल्ली के मैत्री कॉलेज से बोटनी (ऑनर्स) में बीएससी करने के बाद यूपीएससी की तैयारी आरम्भ की और कल शाम घोषित हुए परिणाम में 985वां स्थान प्राप्त किया। सुनने में दिक्कत होने के बावजूद नेहा मित्तल ने हमेशा से ही पढ़ाई में अपनी सभी कक्षाओं में उच्च स्थान प्राप्त किया। उन्होंने पढ़ाई से सम्बन्धित अनेक राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी सफलता पाई। शारीरिक कमजोरी को जज्बे से मात देने वाली नेहा को बार-बार बधाई। मेरी शुभकामनाएं है कि हमारी शान नेहा अगले प्रयास में आईएएस की परीक्षा टॉप करें। उनकी उम्र बहुत कम है मंजिल बहुत लंबी है। नेहा एक उदाहरण है। मुझे लगता है हर बेटी में एक उम्मीद की ज्योति है। सरकार, समाज और संस्थाओं को मिलकर ऐसा ब्लूप्रिंट तैयार करना चाहिए कि हमारी बच्चियां देशभर में अवसरों को भुनाने में कामयाब हों। ज्यादा से ज्यादा संख्या में कॅरियर काउंसिलिंग सेंटर खोलकर उन्हें अवसरों और विकल्पों के बारे में बताया जाए। पैसे की कमी उनकी राह में रोड़ा न बने सरकार इसकी व्यवस्था कर। लड़कियों की अलग स्ट्रीम के लिए कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरी की पूरे राज्य में व्यवस्था हो। आइए साथ दें। लाडो देश समाज बदलने को तैयार हैं। -जय हिंद।






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