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समाचार ब्यूरो
10/05/2018  :  15:51 HH:MM
फिर से वही चिंता
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ताज महल की रंगत को लेकर फिर वही चिंता उठी है, जो हम पिछले कई दशकों से सुनते आ रहे हैं। बताया गया है कि ताज महल पर धीरे धीरे कहीं हरे रंग तो कहीं पीले और काले रंगे के साए उभर रहे है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने फिर से चिंता जताई है। पिछले हफ्ते अदालत में जज ने अधिकारियों से कहा कि आप सब लोग बेबस नजर आ रहे है।

अदालत में सुनवाई के दौरान पर्यावरण वकील एमसी मेहता ने दलील दी कि प्रदूषण और कीटों के मल की वजह से 17वीं सदी की यह इमारत अपनी रंगत खो रही है। तब कोर्ट ने कहा- पैसे की कोई बात नहीं है। हम भारत के या विदेश के विशेषज्ञों को भी काम पर लगाने का आदेश दे सकते हैं। हमें इसे बचाना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और उत्तर प्रदेश की सरकार के अधिकारियों से इस बारे में योजना तैयार कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। देश में स्मारकों के रखरखाव का जिम्मा संभालने वाले पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने इसके कुछ हिस्सों पर एक खास तरह की मिट्टी का लेप लगाया है। मिट्टी जब हटाई जाती है, तो यह अपने साथ पत्थरों पर लगे मैल को भी अपने साथ हटा देती है। लेकिन मामले को अदालत लेकर जाने वाले वकील मेहता का कहना है कि इसे बचाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सफेद चमक लुप्त हो रही है। उसकी जगह हरे, भूरे और दूसरे रंग नजर आ रहे हैं। इसकी वजह है कि प्रदूषण का खतरनाक स्तर तक पहुंच जाना। दुनिया भर के सैलानी ताजमहल को देखने आते हैं। मशहूर हस्तियों में भी इसके सामने खड़े हो कर तस्वीर खिंचवाने की ललक रहती है। इसके बावजूद इसकी चमक पर बीते कई दशकों से प्रदूषण की छाया पडऩे लगी है। आगरा औद्योगिक शहर है। यह भारी प्रदूषण की चपेट में है। हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया के सबसे अधिक प्रदूषित 15 शहरों की जो सूची जारी की, उनमें आगरा भारत के उन 14 शहरों में जिन्हें सबसे ज्यादा प्रदूषित बताया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने ताज महल की सुरक्षा के लिए आसपास के इलाकों से फैक्टरियों को बंद करने का आदेश दिया था। एमसी मेहता का कहना है कि इस दिशा में हुई कार्रवाई की कोई रिपोर्ट कोर्ट को नहीं सौंपी गई। इस हाल में ताजमहल आखिर कब तक अपनी चमक बचाए रखेगा?






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