Breaking News
मिर्जापुर: विकास हकीकत से कोसो दूर- प्रियंका गांधी  |  गाजीपुर: पत्रकार प्रेस परिषद के जिलाध्यक्ष बने केके  |  चंदौली: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय की बहू अमृता पांडेय कांग्रेस में होंगी शामिल, कहा बीजेपी ने ब्राह्मण समाज को ठगा  |  फिरोजाबाद लोकसभा सीट पर चाचा शिवपाल व भतीजा अक्षय में होगा दिलचस्प मुकाबला, शिवपाल यादव ने जारी की 31 प्रत्याशियों की सूची  |  हम किसी को परेशान नहीं करना चाहते, सपाबसपा का जो मकसद, वही हमारा है : प्रियंका  |  लोकसभा चुनाव : अंतिम तैयारियों में जुटी भाजपा पीएम मोदी 28 मार्च से शुरू करेंगे तूफानी चुनावी दौरा  |  ग्लैमरस लुक में धमाल मचा रही हैं सपना चौधरी  |  होली को बनाएं खुशनुमा  |  
 
 
समाचार ब्यूरो
11/05/2018  :  09:41 HH:MM
गुरूग्राम के 1732 स्कूलों में टीकाकरण
Total View  523

गुरुग्राम खसरा-रूबेला टीकाकरण अभियान के तहत जिला में अब तक 3 लाख 63 हज़ार 322 बच्चों का टीकाकरण किया जा चुका है जोकि निर्धारित लक्ष्य का 79 प्रतिशत है। यह जानकारी आज गुरुग्राम की उप-सिविल सर्जन डा. नीलम थापर ने दी।

डा. नीलम ने बताया कि जिला में अब तक 1732 स्कूलों में टीकाकरण अभियान चलाया गया है जिनमें से 419 राजकीय विद्यालय तथा 1313 निजी विद्यालय शामिल हैं। टीकाकरण अभियान के तहत लोग बढ़चढ़ कर अपने बच्चों का टीकाकरण करवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि टीका लगवाने के बाद कहीं भी किसी बच्चे को कोई
दिक्कत नही आई, जो यह साबित करता है कि यह टीका पूर्ण रूप से सुरक्षित है ।

डा. थापर ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि वे अपने 9 महीने से 15 वर्ष तक के बीच की आयु के बच्चों को यह टीका जरूर लगवाएं ताकि बच्चे इन दो बिमारियों से बचे रहें। उन्होंने कहा कि इस अभियान में जिला के सभी स्कूलों से पूरा समर्थन मिल रहा है और 15 मई तक संभवत सभी स्कूलों को को कवर कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस अभियान को विश्व स्वास्थ्य संगठन तथा युनैस्को भी अपना पूरा समर्थन दे रहा है और प्रत्येक जिला में उनके प्रतिनिधि टीकाकरण कार्य पर नजर रखे हुए हैं। किसी बच्चे को यह टीका खाली पेट नहीं लगवाना है। उन्होंने यह भी बताया कि टीका लगाने के बाद आधे घंटे तक चिकित्सक उसे अपनी निगरानी में रखते हैं। यह टीका ऑटो डिस्पोजेबल सिरिंज से लगाया जा रहा है, जिसका प्रयोग दोबारा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यह एक राष्ट्रव्यापी अभियान है। रूबेला के उपचार के लिए कोई निश्चित ईलाज नही है और इस रोग से बचाव के लिए टीकाकरण ही एकमात्र उपाय है। इसी प्रकार खसरा बीमारी के लिए
भी कोई निश्चित इलाज नहीं है और टीका लगवाकर इस बीमारी से बचाव किया जा सकता है।

खसरा बीमारी के लक्षणो के बारे में उप सिविल सर्जन ने बताया कि 5 वर्ष से कम आयु के छोटे बच्चों तथा 20 वर्ष से बड़े व्यस्कों के लिए खसरा जानलेवा सिद्ध हो सकता है क्योंकि इसके कारण होने वाले डायरिया, निमोनिया और मस्तिष्क के सक्रमण की वजह से मृत्यु हो सकती है। रूबेला के लक्षणों के बारे में उन्होंने कहा कि बच्चों में यह रोग आमतौर पर हल्का होता है जिसमें खारिश, कम डिग्री का बुखार, मिचली और हल्के नेत्र शोध के लक्षण दिखाई पड़ते हैं। कान के पीछे और गर्दन में सूजी हुई ग्रंथियां हो सकती है। संक्रमित व्यस्क, ज्यादात्तर महिलाओं में जोड़ो में दर्द हो सकता है। गर्भवस्था में आरंभ में रूबेला वायरस होने से जन्मजात रूबेला
सिंड्रोम विकसित हो सकता है जिसके कारण नवजात शिशु जीवनभर के लिए विकलांग बन सकते हैं। यही नहीं, इससे गर्भपात या मृत शिशु का जन्म आदि भी हो सकता है।






Enter the following fields. All fields are mandatory:-
Name :  
  
Email :  
  
Comments  
  
Security Key :  
   370603
 
     
Related Links :-
कार्यालयों में कोई तंबाकू और धूम्रपान करता है तो चालान करें
गुरुग्राम में रेडक्रॉस भवन में रक्तदान शिविर
देश में कुपोषण की मार झेल रहे हैं 4.66 करोड़ नौनिहाल
प्राणियों के लिए स्वच्छ पर्यावरण का होना जरूरी : सुमेध
आर्ट ऑफ लिविंग से बदलती है मानसिक सोच
यूएनओ रिपोर्ट बढ़ते उत्सर्जन से दुनिया में एक चौथाई लोगों की जान को खतरा
पंजाब के 40 फीसदी लोगों को दिल की बीमारियों और स्ट्रोक का खतरा
प्रभावित किडनी आमंत्रित करती है बीमारियों को
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सोसाइटी के सदस्यों की बैठक उपायुक्त ने दिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश
सभी रोगों की एक दवाई शहर में रखो साफ सफाई : अवनीत