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समाचार ब्यूरो
11/05/2018  :  09:41 HH:MM
गुरूग्राम के 1732 स्कूलों में टीकाकरण
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गुरुग्राम खसरा-रूबेला टीकाकरण अभियान के तहत जिला में अब तक 3 लाख 63 हज़ार 322 बच्चों का टीकाकरण किया जा चुका है जोकि निर्धारित लक्ष्य का 79 प्रतिशत है। यह जानकारी आज गुरुग्राम की उप-सिविल सर्जन डा. नीलम थापर ने दी।

डा. नीलम ने बताया कि जिला में अब तक 1732 स्कूलों में टीकाकरण अभियान चलाया गया है जिनमें से 419 राजकीय विद्यालय तथा 1313 निजी विद्यालय शामिल हैं। टीकाकरण अभियान के तहत लोग बढ़चढ़ कर अपने बच्चों का टीकाकरण करवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि टीका लगवाने के बाद कहीं भी किसी बच्चे को कोई
दिक्कत नही आई, जो यह साबित करता है कि यह टीका पूर्ण रूप से सुरक्षित है ।

डा. थापर ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि वे अपने 9 महीने से 15 वर्ष तक के बीच की आयु के बच्चों को यह टीका जरूर लगवाएं ताकि बच्चे इन दो बिमारियों से बचे रहें। उन्होंने कहा कि इस अभियान में जिला के सभी स्कूलों से पूरा समर्थन मिल रहा है और 15 मई तक संभवत सभी स्कूलों को को कवर कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस अभियान को विश्व स्वास्थ्य संगठन तथा युनैस्को भी अपना पूरा समर्थन दे रहा है और प्रत्येक जिला में उनके प्रतिनिधि टीकाकरण कार्य पर नजर रखे हुए हैं। किसी बच्चे को यह टीका खाली पेट नहीं लगवाना है। उन्होंने यह भी बताया कि टीका लगाने के बाद आधे घंटे तक चिकित्सक उसे अपनी निगरानी में रखते हैं। यह टीका ऑटो डिस्पोजेबल सिरिंज से लगाया जा रहा है, जिसका प्रयोग दोबारा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यह एक राष्ट्रव्यापी अभियान है। रूबेला के उपचार के लिए कोई निश्चित ईलाज नही है और इस रोग से बचाव के लिए टीकाकरण ही एकमात्र उपाय है। इसी प्रकार खसरा बीमारी के लिए
भी कोई निश्चित इलाज नहीं है और टीका लगवाकर इस बीमारी से बचाव किया जा सकता है।

खसरा बीमारी के लक्षणो के बारे में उप सिविल सर्जन ने बताया कि 5 वर्ष से कम आयु के छोटे बच्चों तथा 20 वर्ष से बड़े व्यस्कों के लिए खसरा जानलेवा सिद्ध हो सकता है क्योंकि इसके कारण होने वाले डायरिया, निमोनिया और मस्तिष्क के सक्रमण की वजह से मृत्यु हो सकती है। रूबेला के लक्षणों के बारे में उन्होंने कहा कि बच्चों में यह रोग आमतौर पर हल्का होता है जिसमें खारिश, कम डिग्री का बुखार, मिचली और हल्के नेत्र शोध के लक्षण दिखाई पड़ते हैं। कान के पीछे और गर्दन में सूजी हुई ग्रंथियां हो सकती है। संक्रमित व्यस्क, ज्यादात्तर महिलाओं में जोड़ो में दर्द हो सकता है। गर्भवस्था में आरंभ में रूबेला वायरस होने से जन्मजात रूबेला
सिंड्रोम विकसित हो सकता है जिसके कारण नवजात शिशु जीवनभर के लिए विकलांग बन सकते हैं। यही नहीं, इससे गर्भपात या मृत शिशु का जन्म आदि भी हो सकता है।






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