समाचार ब्यूरो
22/05/2018  :  12:44 HH:MM
मुलेठी है कई रोगों की दवा
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स्वाद में मीठी मुलेठी कैल्शियम, ग्लिसराइजिक एसिड, एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटीबायोटिक, प्रोटीन और वसा के गुणों से भरपूर होती है। इसका इस्तेमाल नेत्र रोग, मुख रोग, गले रोग, पेट, सांस विकार, हृदय रोग, घाव के उपचार के लिए सदियों से किया जा रहा है। यह वात, कफ, पित्त तीनों दोषों को शांत करके कई रोगों के उपचार में रामबाण का काम करती है।
मुलेठी के क्वाथ से नेत्रों को धोने से नेत्रों के रोग दूर होते हैं। मुलेठी की मूल चूर्ण में बराबर मात्रा में सौंफ का चूर्ण मिलाकर एक चम्मच प्रात: सायं खाने से आंखों की जलन मिटती है तथा नेत्र ज्योति बढ़ती है। मुलेठी को पानी में पीसकर उसमें रूई का फाहा भिगोकर नेत्रों पर बांधने से नेत्रों की लालिमा मिटती है। मुलेठी कान और नाक के रोग में भी लाभकारी है! मुलेठी और द्राक्षा से पकाए हुए दूध को कान में डालने से कर्ण रोग में लाभ होता है! 3-3 ग्राम मुलेठी तथा शुंडी में छह छोटी इलायची तथा 25 ग्राम मिश्री मिलाकर, क्वाथ बनाकर 1-2 बूंद नाक में डालने से नासा रोगों का शमन होता है। मुंह के छाले मुलेठी मूल के टुकड़े में शहद लगाकर चूसते रहने से लाभ होता है। मुलेठी से खांसी और गले के रोग भी दूर होते है। सूखी खांसी में कफ पैदा करने के लिए इसकी एक चम्मच मात्रा को शहद के साथ दिन में 3 बार चटाना चाहिए। इसका 20-25 मिली क्वाथ प्रात: सायं पीने से सांस नलिका साफ हो जाती है। मुलेठी से हिचकी भी दूर होती है। मुलेठी हृदय रोग में भी लाभकारी है। 3-5 ग्राम मुलेठी को 15-20 ग्राम मिश्री युक्त जल के साथ प्रतिदिन नियमित रूप से सेवन करने से हृदय रोगों में लाभ होता है। इसके सेवन से पेट के रोग में भी आराम मिलता है। मुलेठी का क्वाथ बनाकर 10-15 मिली मात्रा में पीने से पेट का दर्द ठीक होता है। त्वचा रोग भी यह लाभकारी है। पफोड़ों पर मुलेठी का लेप लगाने से वे जल्दी पककर फूट जाते हैं। मुलेठी और तिल को पीसकर उससे घृत मिलाकर घाव पर लेप करने से घाव भर जाता है।






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