समाचार ब्यूरो
09/06/2018  :  14:59 HH:MM
अमज्योत के माता पिता ने बैन हटाने के लिएकी बीएफआई से अपील
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चंडीगढ़ अमज्योत के माता पिता मोहिंदर गिल ने बास्केटबॉल फेडरेशन आफ इंडिया पर एकतरफा फैसला लेने पर तानाशाही का आरोप लगाया , उन्होंने ने कहा कि भारत में प्रजातंत्र है व सभी को अपना पक्ष रखने का अधिकार है तो हमार े बटे े अमज्योत को क्यों नहीं जबकि वह इस वक्त बास्केटबॉल में उभरता हुआ खिलाड़ी है और अपने समकक्ष खिलाडय़ों में सबसे अच्छा परफॉर्म कर रहा है।

उन्होंने बताया कि मैच के या अभयास के दौरान यदि किसी बात पर कहासुनी हो भी जाये तो आपस में ही सुलझा ली जाती है और इसकी कोई बड़ी सजा न आज तक दी गयी है न ही दी जाती है , में आपको एक वाकया बताता हूँ अर्शदीप व अक्लीन परी का ईरान में शाही का कई बार काफी बड़ा झगड़ा हुआ था जिसे मिल
बैठ कर सुलझा लिया गया , और इन मामलों में कोई करवाई नहीं हुई थी और अर्शप्रीत ने ऐसी कोई शिकायत भी दर्ज नहीं कराई है ,अर्शदीप के पिता एस एसपी पंजाब भुल्लर ने भी यही कहा कि बच्चों का आपसी मतभेद चलता रहता है और व आसानी से निपट भी जाता है , जहाँ तक कैम्प न अटेंड करने की बात है तो अमज्योत को कैम्प में भाग लेने को कोई आदेश नहीं मिला वो तो अमेरिका से सीधा कॉमन वेल्थ गेम्स खेलने पहुंच गया था।

भारत खेलों में इसीलिए पिछड़ रहा है की यहां अक्सर खिलाडिय़ों पर कोच द्वारा टीमवर्क की बजाय सेल्फिश गेम के इल्जाम लगते रहते हैं , हालांकि बास्केट बॉल में अगर कोई ऐसी बात थी तो इसमें 11 ह्रश्वलेयर और थे तो अमज्योत को एक मैच खेलने के बाद जिसमें उसे पूरा समय 40 मिनट खिलाया गया और उसके बाद अगले
दो मैचों में अमज्योत को बाहर बैठा कर रिज़र्व ह्रश्वलेयर में से किसी को क्यों नहीं लिया गया , कोच का यह फैसला बैन की साजिश की ओर इशारा करता है हमारी सरकार से पुरजोर मांग है कि एकतरफा बैन लगाने से पहले हमें नोटिस देकर अपना पक्ष तो रखने दिया जाना चाहिए था । क्या हमें अपने राष्ट्र में अपने मौलिक अधिकारों का भी हक़ नहीं है अमज्योत के पिता ने बताया कि हमें बैन का पता एक अखबार की खबर से पता चला। अमज्योत ने चंद्रमुखी जी से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन न तो उन्होंने फ़ोन उठाया न ही मिल पाए और उन्होंने किसी और के द्वारा संदेश दिया कि मैं 24 मई को चंडीगढ़ अपने घर पर मिलूंगा लेकिन फिर
अमज्योत 24 को पूरा दिन उनके घर के बाहर इंतजार करता रहा लेकिन चंद्रमुखी न तो आये न ही कोई बात की योत को एशियाई खेलों 2014 में खेलने के लिए अपने बालों की भी कुर्बानी देनी पड़ी , यदि अमज्योत का व्यवहार खराब होता तो वह 15 साल कैसे शांति से खेल पाता , फेडरेशन से अपील है कि अमज्योत की कोई
छोटी से छोटी शिकायत पहले से भी हो तो बताएं।






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