समाचार ब्यूरो
05/08/2018  :  10:28 HH:MM
तिब्बत के पहाड़ी क्षेत्रों के लिए इलेक्ट्रोमैगनेटिक रॉकेट लॉन्चर बना रहा है चीन
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पेइचिंग भारत-चीन सीमा से सटे तिब्बत के हिस्से को लेकर दोनों देश काफी संवेदनशील रहे हैं। बीते दिनों डोकलाम के मुद्दे पर भी दोनों देश एक-दूसरे के सामने आ चुके हैं। चीन द्वारा विकसित की जा रही आर्टिलरी पहाड़ी इलाकों में कई किलोमीटर दूर से ही दुश्मन को निशाना बना सकती है।

तिब्बत में अब तक के ज्यादातर परांपरागत हथियारों के मुकाबले चीन का अभूतपूर्व इलेक्ट्रोमैगनेटिक रॉकेट लॉन्चर ज्यादा ताकतवर साबित होगा। यह कहना है चीनी विशेषज्ञों का। उल्लेखनीय है कि चीन द्वारा कब्जा किए गए तिब्बत से भारत की लंबी सीमा लगी हुई है। यह पूरा इलाका पहाड़ी और दुर्गम है। ऐसे में चीन द्वारा ऐसे हथियार को विकसित करना भारत के लिए चिंता की बात हो सकती है। चीन के मीडिया के मुताबिक पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के तहत पेइचिंग स्थित एक रिसर्च सेंटर के फेलो हान जुनी इलेक्ट्रॉनिक रॉकेट लॉन्चर के विकास का नेतृत्व कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि जुनी मा वेमिंग नाम के एक चाइनीज एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग के शिक्षाविद् से इसकी प्रेरणा ले रहे हैं। मा को चीइनीज इलेक्ट्रॉमैगनेटिक टेक्नॉलजी का जनक भी माना जाता है।

हान जुनी ने बताया गया है कि एक सैन्य घटना के बाद उसे इस तरह का विचार आया। हान ने तिब्बत-चिनघाई पठार में रॉकेट आर्टिलरी की आवश्यक्ता महसूस की। ग्लोबल टाइम्स की मानें तो हान ने कहा, चीन में बड़े पठार और पहाड़ी इलाके हैं, जहां रॉकेट आर्टलरी से सैकड़ों किलोमीटर दूर के दुश्मन को निशाना बनाया जा सकता है। इसके लिए सैनिकों को पहाड़ी इलाकों को पार करने की भी जरूरत नहीं है। एक मिलिटरी एक्सपर्ट ने स्थानीय मीडिया से बातचीत में कहा कि परंपरागत आर्टिलरी, जिसमें पाउडर का इस्तेमाल होता है,
पठारी इलाकों में ऑक्सीजन की कमी से प्रभावित हो सकती हैं। इलेक्ट्रॉमैगनेटिक ऑर्टिलरी में इस तरह की दिक्कत का सामना नहीं करना होगा। जानकारों का मानना है कि चीन को ऐसे हथियार विकसित करने की जरूरत नहीं है, जिनका इस्तेमाल दुनिया भर में पहले से हो रहा है, बल्कि ऐसे हथियार बनाने की जरूरत है, जो दुनिया को आश्चर्य में डाल दें।






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