समाचार ब्यूरो
18/08/2018  :  17:08 HH:MM
वैजयंती माला ने नृत्य को दिलाई ख़ास पहचान
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गुजरे जमाने में ह‍िंदी स‍िनेमा की यादगार अभिनेत्रियों में शामिल वैजयंती माला कमाल की क्लासिकल डांसर थीं। 50 और 60 के दशक में उन्होंने फिल्मों में अपने डांस से कइयों को दीवाना बनाया था।

वैजयंती माला ही वह अभिनेत्री थीं, जिन्होंने हिंदी सिनेमा में नृत्य को ख़ास पहचान दिलाई थी। . वैजयंती का जन्म 13 अगस्त 1936 को मद्रास (चेन्नई) में एक तमिल ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम एम.डी. रमन और मां का नाम वसुंधरा देवी था। उनकी मां 1940 के दशक की लोकप्रियातमिल अभिनेत्री थीं।

वैजयंती माला ने 13 साल की उम्र में ही एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा था। उन्होंने साल 1949 में आई तमिल फिल्म ‘वडक़ई’ से एक्टिंग की शुरुआत की। हिंदी सिनेमा में उन्होंने 1951 में आई फिल्म ‘बहार’ से कदम रखा था। वैजयंती माला की कामयाब फिल्मों में ‘नई दिल्ली‘, ‘नया दौर और ‘आशा‘ शामिल हैं। 1964 में आई फिल्म ‘संगम‘ में निभाया राधा का उनका बोल्ड किरदार और उन पर फिल्माया गाना ‘मैं क्या करूं राम मुझे बुड्ढा मिल गया‘ काफी प्रसिद्ध हुआ। फिल्म ‘ज्वेल थीफ‘ में उन पर फिल्माया गया गाना ‘होठों पे ऐसी बात’ अब भी लोगों की जुबां पर है। वैजयंती माला ने 1957 में आई फिल्म ‘देवदास’ में चंद्रमुखी की भूमिका निभाई थी, जिसके लिए उन्हें उसी साल फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके बाद उन्हें 1959 में फिल्म ‘मधुमती’, 1962 में ‘गंगा जमुना’ और 1965 में ‘संगम’ के लिए फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार दिया गया। सालों तक दर्शकों के दिलों पर राज करने वाली एक मंझी हुई अभिनेत्री के अलावा वैजयंती बेहतरीन डांसर भी थीं। वह भरतनाट्यम की डांसर, कर्नाटक शैली की सिंगर और डांस टीचर भी रही हैं। दिलीप कुमार के साथ उनकी जोड़ी काफी हिट थी। फिल्म लीडर, मधुमती, नया दौर, गंगा जमुना और संघर्ष जैसी सुपरहिट फिल्मों में दोनों ने साथ काम किया। ‘संगम’ के बाद वैजयंती माला और राज कपूर की लोकप्रिय जोड़ी टूट गई। उन्हें भी अपने जीवन में नाकामयाबी की मार झेलनी पड़ी. लेकिन फिर उन्होंने देव आनंद के साथ 1967 में आई सफल फिल्म ‘ज्वेल थीफ’ से एक नई शुरुआत की। इस दौरान उनके जीवन में आए डॉ. चमनलाल बाली। एक बार वैजयंती को निमोनिया हो गया था, जिसका इलाज डॉ. बाली कर रहे थे। बाली भी उनके प्रशंसकों में से एक थे। वैजयंती का इलाज करते-करते दोनों में ह्रश्वयार हो गया और 10 मार्च, 1968 को वे शादी के बंधन में बंध गए। उनका एक बेटा है। उनका जीवन कई अभिनेत्रियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी रहा। उनमें से एक रहीं हेमा मालिनी। हेमा खुद वैजयंती की बहुत बड़ी प्रशंसक हैं। वह राज्यसभा में सांसद भी रह चुकी हैं।






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