समाचार ब्यूरो
19/08/2018  :  15:02 HH:MM
कीटजनित रोगों के खतरों से बचने के लिए बताया तरीक
Total View  440

कीट प्रबंधन पर दो दिनों के राष्ट्रीय सम्मेलन ’इंडियापेस्ट 2018’ में हिस्सा ले रहे कीट प्रबंधन पेशेवरों ने इस बात पर जोर दिया है कि देश में मलेरिया और डेंगू समेत बढ़ती कीटजनित या वेक्टर जनित बीमारियों पर काबू पाने के लिए अब भी रोकथाम, नियंत्रण और शिक्षा ही सबसे अच्छा उपाय है।

देश में कीट नियंत्रण (पेस्ट कंट्रोल) पेशेवरों की शीर्ष संस्था इंडियन पेस्ट कंट्रोल एसोसिएशन (आईपीसीए) के अध्यक्ष श्री जलधि त्रिवेदी ने कहा, मच्छरों और कीड़ों से होने वाली बीमारियों से निपटने की नई और अनूठी तकनीकों का विकास होने के बाद भी पहचान करना, उपचार करना और बचाव के तरीके ढूंढना ही देश में बढ़ती कीटजनित बीमारियों पर नियंत्रण करने का सबसे अच्छा उपाय है। चूंकि अधिकतर लोगों के पास रोकथाम की नई तकनीकों और महंगे इलाज का लाभ उठाने लायक संसाधन नहीं हैं, इसलिए ऐसे जन स्वास्थ्य कार्यक्रम बनाना और चलाना ही सर्वश्रेष्ठ उपाय है, जिनमें कीटजनित रोगों की जांच हो और उनका पता लगाया जाए, कीट नियंत्रण कर्मचारियों को समुचित प्रशिक्षण दिया जाए और जनता को बताया जाए कि अपने इलाकों में मच्छरों और पिस्सुओं के काटने से बचने और उनसे कीटाणुओं का फैलना रोकने के लिए क्या करना चाहिए।

श्री त्रिवेदी ने बताया, देश भर से करीब 350 पेस्ट कंट्रोल पेशेवर कीट प्रबंधन पर दो दिनों के राष्ट्रीय सम्मेलन ‘इंडियापेस्ट 2018 ’ में हिस्सा ले रहे हैं, जहां वे इस उद्योग में नए घटनाक्रम, उत्पादों, सेवाओं, तकनीकों एवं नियमों पर चर्चा करेंगे और उनके बारे में सीखेंगे। वे जैव और जैविक कीटनाशक समेत नवीनतम गैर रसायन कीटनाशकों एवं एकीकृत कीट प्रबंधन के बारे में भी चर्चा करेंगे। राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के निदेशक डॉ. पीके सेन ने इस मौके पर आगाह करते हुए कहा, देश में कुछ वर्पा में मलेरिया के केसो में कमी आ रही है और उससे होन वाली मोतेा में भी कमी आई है लेकिन डेगू के केसो मे ंअहुत बढावा हो रहा है वर्प 2017 में देश में 1.8 लाख केस पाये गये जाकि वर्प 2016 में 1.3 लाख थे । डेंगू का अभी तक कोइ पक्का इलाज और अच्छा टीका उनलबध
नही है। सबसे अच्छा इलाज इसका बचाव और रख रखाव ही है। आईपीसीए के महासचिव प्रकाश शशिधरन ने कहा, अगर आप मॉनसून को खुशनुमा बनाना चाहते हैं तो सुनिश्चित करें कि आपके घर और दफ्तर में कीड़ें नहीं हों क्योंकि बरसाती कीड़ों से गंभीर स्वास्थ्य
समस्याएं हो जाती हैं। दुखदायी बरसाती कीड़े, चूहे, कॉकरोच, दीमक, खटमल और मच्छर स्वास्थ्य को कई तरह के कष्ट दे सकते हैं। इसलिए एहतियात बरतने होंगे और ऐसे स्थान कम करने होंगे, जहां बरसात के दौरान वे पनपते हैं। उन्होंने कहा, इसके अलावा लंबी पतलून
और पूरी बांह के कपड़े पहनने से, जलजनित रोगों से बचकर रहने से मदद मिलती है। ताजा पका भोजन करें और सलाद एवं पत्तेदार सब्जियों को कीटाणुओं से मुक्त रखने के लिए अच्छी तरह धोकर साफ करें। शनिवार को यहां संपन्न हुए दो दिन के ‘इंडियापेस्ट’ में पूरे भारत से लगभग 350 पेशेवरों ने हिस्सा लिया।






Enter the following fields. All fields are mandatory:-
Name :  
  
Email :  
  
Comments  
  
Security Key :  
   3342107
 
     
Related Links :-
लोग नशे जैसी कुरितियों को छोडक़र बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित करे : सत्यदेव आर्य
जीवन के लिए वरदान है इलैक्ट्रोहोमयोपैथी: जीएल शर्मा
हील टोक्यो भारत में नि:शुल्क हीलिंग केंद्र खोलेगा
4 जनवरी से चालू है स्वच्छ सर्वेक्षण-2019 अन्य शहर की तरह गुरूग्राम शहर भी स्वच्छ सर्वेक्षण में ले रहा है हिस्सा
जन आरोग्य योजना : आयुष्मान भारत के तहत निर्धन परिवारों को 5 लाख तक का नि:शुल्क इलाज लाभार्थियों को मिला पीएम का संदेश पत्र
मेयर मधु आजाद ने नागरिकों को भेंट किए डस्टबिन
प्राइवेट अस्पतालों में भी मिल रहा है 5 लाख का मुफ्त इलाज
खुशी और मस्ती के रंग कैंसर पीडि़त फाईटर्स एवं सरवाईवर्स के संग..
द योगा इंस्टीट्यूट, मुंबई’ के 100 साल पूरे होने के जश्न का उद्घाटन योग में राष्ट्रों को एकजुट करने की क्षमता : राष्ट्रपति
हरियाणा में स्वाइन फ्लू पर सांसद दुष्यंत गम्भीर