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समाचार ब्यूरो
14/10/2018  :  13:14 HH:MM
दूध-दही का खाणा! ...अब मुल्क की खेल राजधानी भी है आपका हरियाणा
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चंडीगढ़ हरियाणा में प्रवेश करने पर हाईवे पर लगे साइनेज आने वालों का स्वागत दहीं-दूध से भरपूर भोजन वाले प्रदेश के रूप में करते हैं। यह सही है कि भारतीय सेना को हरियाणा ने न जाने कितने सपूत दिए हैं और कई परिवारों में पुलिस की सेवा पुश्तों से चली आ रही है। लेकिन इस सब ने हरियाणा की पहचान बनाने में ज्यादा मदद नहीं की। इस सब के बीच हमेशा राजनीति से गर्म रहने वाला यह राज्य गुपचुप से अपनी एक ऐसी पहचान बना गया कि बाकी का मुल्क उसे एक उदहारण की तरह देख रहा है।

हरियाणा भारतीय खेलों का सिरमौर 

दिल्ली के पड़ौसी हरियाणा के देश की खेल राजधानी बनने के शांत सफर ने उसे बिलकुल नई पहचान से नवाजा है। ओलंपिक में पहलवान सुशील कुमार व साक्षी मलिक और बॉक्सिंग में विजेंदर के पदक इस रुतबे पर मुहर की तरह हैं। सितंबर में इंडोनिशिया में एशियाई खेल खत्म हुए. जब सारे पदक बंट गए और गिनती हुई तो भारत के 69 में से हरियाणा के खिलाडिय़ों के गले में सबसे अधिक 18 पदक थे। छह महीनों के भीतर दूसरा मौका था जब हरियाणा देश के लिए पदक जीतने में टॉप पर था। इसी साल अप्रैल में आस्ट्रेलियाई शहर
गोल्डकोस्ट में राष्ट्रमंडल खेल हुए. भारत ने उसमें 66 पदक जीते थे और उनमें से 22 से साथ हरियाणा नंबर एक पर रहा। जैसा कि हरियाणा के नारे से अंदाजा होता है, यहां के पहलवानों और बॉक्सरों ने केंद्र और राज्य सरकार की ओर से मिल रही सुविधाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल में बदल कर सरकारों की कोशिशों के साथ न्याय किया है। रोहतक जिले के मयाना गांव में पैदा हुए नायब सूबेदार अमित पंघाल ने 2018 के एशियाई खेलों के बॉक्सिंग फाइनल में ओलंपिक व एशियाई चैंपियन उज्बेकिस्तान के हसनवाय दस्मातोवल को हरा कर सभी को हैरानी में डाल दिया। वहीं झझर जिले के खुदान गांव के पहलवाल बजरंग पुनिया एशियाड का गोल्ड मेडल यह बताता है कि हरियाणा ने खेलों के लिए जो सिस्टम तैयार किया है, उसके बेहतर परिणाम आने लगे हैं।

अन्य खेलों में भी पदक

पानीपत के गांव खंदारा से निकल कर जेवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा भी 2018 के एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीत कर लाए हैं। फिर जींद के 19 साल के शूटर लक्ष्य शेरॉन का ट्रैप इवेंट में सिल्वर मेडल भी तो है।जींद जिले के उझाना गांव के मंजीत सिंह की 800 मीटर
को गोल्ड सालों तक भुलाए न भुलेगा। कुश्ती और बॉक्सिंग के अलावा यह सारे मेडल साबित करते हैं कि हरियाणा बाकी खेलों में भी चैंपियन तैयार करने में कामयाब हो रहा है और इसी कामयाबी उसे खेलों में भारत का सिरमौर बना दिया है।






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