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समाचार ब्यूरो
17/10/2018  :  10:34 HH:MM
जो सवाल छोड़ गए अग्रवाल
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गंगा मुद्दे को लेकर जीडी अग्रवाल ने कई चि_ियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत तमाम मंत्रालयों को लिखीं। अग्रवाल ने गंगा और इसकी सहायक नदियों पर बनने वाली पनबिजली परियोजनाओं को रोकने की अपील की थी।

साथ ही गंगा संरक्षण अधिनियम को अमल में लाने की बात कही थी। अपनी चि_ी में उन्होंने कहा था कि अगर इस मसौदे को कानून बना कर लागू कर दिया जाता है, तो गंगाजी से जुड़ी कई समस्याएं खत्म हो जाएंगी। सरकार संसद में अपने बहुमत का इस्तेमाल करते हुए इस मसौदे को कानून का रूप दे सकती है। अब समय आ गया है कि हम भविष्य में आने वाली पीढिय़ों के लिए इस पवित्र नदी की जिम्मेदारी लें। लेकिन उनकी इन बातों पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। इसीलिए उनकी मृत्यु पर नेताओं के बीच श्रद्धांजलि देने की होड़ लगी तो उसे देख कर हैरत हुई और आक्रोश भी व्यक्त किया गया। जीडी अग्रवाल को लोग स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के नाम से भी जाना जाता था। अग्रवाल केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में सदस्य भी रह चुके थे।

बीते कई सालों से वे संन्यासी का जीवन जी रहे थे। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक 87 साल के जीडी अग्रवाल अनशन के दौरान वह सिर्फ पानी और शहद का उपयोग कर रहे थे। वे इसके पहले भी तीन बार नदियों को बचाने के लिए अनशन कर चुके थे। 2009 में उनके अनशन के चलते भागीरथी पर बन रहे बांध को रोक दिया गया था। जीडी अग्रवाल की मौत गंगा बचाओ आंदोलन के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है। इसलिए सोशल मीडिया पर भी लोगों ने उनकी मौत पर दुख जताया। ध्यान दिलाया कि अनशन के बाद पर्यावरणविद
अग्रवाल को पुलिस ने जबरन उन्हें उठाया और अस्पताल भेज दिया। गंगा को बचाने की उनकी अपील मोदी सरकार के कानों में नहीं पहुंची। सवाल उठाया गया कि क्या ये दुनिया पवित्र आत्माओं के लिए नहीं है। मोदी सरकार की खास आलोचना हुई। कहा गया कि यह बहुत दुखभरा है। जीवनदायिनी मां गंगा को बचाने के लिये 114 दिन तक उपवास रखने वाले गांधीवादी अग्रवाल मां गंगा के असली बेटे थे। मां गंगा आज भी कराह रहीं है। पूछा गया है कि आखिर कब तक मां गंगा सियासी पार्टियों की राजनीतिक अवसरवादिता की शिकार होती
रहेंगी? सवाल है कि ऐसे सवालों के जवाब आखिर कौन देगा?






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