समाचार ब्यूरो
15/11/2018  :  12:03 HH:MM
संघ के खिलाफ और हिन्दुत्व के करीब जाती कांग्रेस के निहितार्थ
Total View  52

सुनने में यह बात भले ही अजीब लगती हो लेकिन हकीकत यही है कि कांग्रेस नेता यदि मंदिर और मस्जिद समेत अन्य धार्मिक स्थलों का रुख न करें तो भाजपा और उसके सहयोगी संगठन कहते देखे जाते हैं कि ये अधर्मी लोग धर्म प्रधान देश की जनता के साथ क्या न्याय कर पाएंगे?

वहीं दूसरी तरफ यदि कांग्रेस नेता मंदिर में पूजा करने चले जाएं, जनेऊ संस्कार करते देखे जाएं या अन्य धार्मिक स्थलों में नतमस्तक होते दिख जाएं तो वही लोग कहते दिखेंगे कि क्या ढोंग करते हैं, क्या इन ढोंगियों को जनता माफ करेगी? मतलब राजनीतिक तौर पर धर्म
का ठेका भाजपा और उनके चंद  सहयोगियों और समर्थकों के हाथों में आ गया है जो कि पूरे देश के धर्मावलंबियों को अपने लिहाज से चलाना चाहते हैं और वही तय करना चाहते हैं कि उनके अनुसार धर्म का कब सवेरा होगा और कब अंधेरे के गर्त में डूबते हुए धर्म को बचाने की गुहार लगाकर अपना उल्लू सीधा किया जाएगा। अगर यही काम कोई राजनीतिक दल या संगठन करने की चेष्टा करता है तो वो सबसे बड़ा पाखंडी, अधर्मी और धोखेबाज साबित कर दिया जाता है। इस भूमिका पर यदि यकीन नहीं हो रहा हो तो मौजूदा पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के दौरे कार्यक्रमों को देख लें, जिनकी ज्यादातर शुरुआत किसी न किसी धार्मिक स्थल से शुरु होती दिखती है। वहीं दूसरी तरफ उन पर निशाना साधने वाले, उन्हें अधर्मी और ढोंगी साबित करने में कोई कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखने वाले लोगों पर भी गौर फरमा लें जो भाजपा के होते हैं या फिर उनके सहयोगी संगठनों से होते हैं। बहरहाल इस पूरी कवायद का सबसे ज्यादा असर इस समय मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में देखने को मिल रहा है। हमने देखा है कि जब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी उज्जैन पहुंचते हैं तो महाकाल के दर्शन कर पूजा-अर्चना को पहली प्राथमिकता देते हैं। इसके बाद राहुल और कांग्रेस पर भाजपा समेत संघ और अन्य हिंदुत्ववादी संगठन के नेता व कार्यकर्ता निशाना साधते नजर आ जाते हैं। कांग्रेस के नेता इसके जवाब में सवाल करते हुए दिखते हैं कि क्या भाजपा ने धर्म का ठेका ले रखा है कि कौन धार्मिक है और कौन नहीं क्या इसका प्रमाण पत्र उनसे लेना होगा?

चूंकि कांग्रेस ने इस बार सॉफ्ट हिंदुत्व को केंद्र में रखकर अपने चुनावी कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने की कोशिश की है अत: वह कट्टरवादियों के निशाने पर आ गई है। यही वजह है कि कांग्रेस ने भी सबसे पहले कट्टरवादियों पर हमला करना उचित समझा है। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिहाज से तैयार किए गए ‘वचनपत्र’ में इसकी झलक देखी जा सकती है। दरअसल कांग्रेस ने अपने वचनपत्र में शासकीय भवनों पर संघ की शाखा लगाने पर रोक लगाने का वादा प्रदेशवासियों से किया है। इसे लेकर अब मध्य प्रदेश की राजनीति गरमाई हुई है। इस मामले को निराराजनीतिक चश्में से देखा जाए तो एक तीर से कांग्रेस ने अनेक लक्ष्यों को साधने की कोशिश की है। दरअसल कांग्रेस द्वारा राज्य की सरकारी इमारतों और परिसरों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं पर पाबंदी लगाने की घोषणा बताती है कि इससे पहले भी प्रदेश में कांग्रेस की सरकारें रही हैं, लेकिन कभी भी संघ को ऐसा करने से रोकने या उन्हें अन्यत्र शाखाएं लगाने के लिए नहीं कहा गया। इसका कारण यही है कि सीधे तौर पर संघ ने कभी भी कांग्रेस पर हमला नहीं बोला था, लेकिन अब जबकि उसने
सीधे कांग्रेस को निशाने पर लिया है तो कांग्रेस भी इसके जवाब में उन्हें उनकी सीमा बताने की कोशिश कर रही है। इसी के साथ कांग्रेस अब यह बता रही है कि संघ भी एक राजनीतिक संगठन है, जिस पर वही नियम-कायदे लागू होने चाहिए जो कि एक राजनीतिक दल पर होते हैं। इसके साथ ही इस घोषणा पत्र से पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के उन दावों को और मजबूती प्रदान कर दी गई है जिसमें वो आरएसएस पर नफरत फैलाने के आरोप लगाते रहे हैं। कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में कहा है कि यदि कांग्रेस सत्ता में आती है तो सरकारी इमारतों और परिसरों में आरएसएस की शाखा लगाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। सरकारी कर्मचारियों के शाखा में हिस्सा लेने की अनुमति देने के आदेश को भी रद्द कर दिया जाएगा। इसलिए इस वचनपत्र पर भाजपा ने जोरदार तरीके से आपत्ति दर्ज कराने का काम किया है।

यही नहीं कांग्रेस ने तो इस बार के घोषणा पत्र में सॉफ्ट हिंदुत्व के नाम पर भगवान राम, नर्मदा, गौवंश और गौमूत्र का उल्लेख किया मानों उसने भाजपा को उसके अपने ही अंदाज में पुरजोर तरीके से घेरने का काम कर दिखाया है। आखिर यह कैसे भुलाया जा सकता है कि राम और मंदिर निर्माण को लेकर ही भाजपा दो सीटों से पूर्ण बहुमत की स्थिति में आ गई। उसने धर्म और आस्था के नाम पर वोटरों को इस कदर मथा कि कांग्रेस मुक्त भारत की बात तक कह डाली, जबकि सभी जानते हैं कि लोकतंत्र में इस तरह की बातों का कोई औचित्य नहीं होता है, क्योंकि फैसला करने वाली असली जनता ही होती है और वह जिसे चाहती है कुर्सी पर बैठाती है और जिसे चाहती है विपक्ष के लायक भी नहीं छोड़ती है। ऐसे में ये तमाम दंभकारी बयान और उसके तहत किए जाने वाले उपक्रम सही मायने में भोली-भाली जनता को भ्रमित करने वाले ही होते हैं, जिसकी काट के तौर पर कांग्रेस ने अब सॉफ्ट हिंदुत्व का दामन थाम लिया है और इसका असर इन पांच राज्यों में देखने के बाद आगे बढ़ाने का काम और जोर-शोर से होगा, ऐसी उम्मीद न सिर्फ कांग्रेसजनों को है बल्कि भाजपा भी इसे भलिभांति जान चुकी है, इसलिए इसका विरोध तो होना तय है।






Enter the following fields. All fields are mandatory:-
Name :  
  
Email :  
  
Comments  
  
Security Key :  
   3529096
 
     
Related Links :-
कांग्रेसमुक्त या मोदीमुक्त भारत?
अब ‘मिनी मैर्केल’ का दौर!
भारत की सबसे बड़ी दुश्मन
लोकसभा की राह तय करेंगे नतीजे
मिशेल रामबाण है, भाजपा का
कुंभ मेले के भव्य आयोजन की तैयारी
इमरान मानें राजनाथ की बात
देश का पैसा लूटने वाले बख्शे न जाए
कानून का मंदिर खंडित मत करना
क्या यह दबी चिंगारी को हवा देने की कोशिश है?