25/12/2018  :  09:50 HH:MM
बड़ी आंत के कैंसर में कारगर उपचार है टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेप
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पानीपत टारगेटेड थेरेपी यानी लक्षित चिकित्सा और इम्यूनोथेरेपी यानी प्रतिरोधी चिकित्सा बड़ी आंत के कैंसर (कोलोरेक्टल कैंसर) में उपचार के नए तरीके हैं। राजीव गांधी कैंसर संस्थान एवं अनुसंधान केंद्र नई दिल्ली में मेडिकल ऑन्कोलॉजी के निदेशक डॉ. विनीत तलवार ने कहा कि टारगेटेड थेरेपी में दवाएं कैंसर वाली जगह को लक्ष्य बनाती हैं और पारंपरिक कीमोथेरेपी की दवाओं के साथ दी जाती हैं ताकि कैंसर की अधिक कोशिकाएं मर जाएं और रोगी के बचने की संभावना बढ़ जाए।
वह इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), पानीपत तथा आरजीसीआईएंडआरसी के संयुक्त तत्वावधान में कैंसर विज्ञान (ऑन्कोलॉजी) पर आयोजित कॉन्टिन्यूइंग मेडिकल एजूकेशन (सीएमई) कार्यक्रम पर जानकारी साझा करने वाले सत्र में बोल रहे थे। प्रतिरक्षा चिकित्सा (इम्यूनोथेरेपी) की दवाएं शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को ताकत देती हैं और प्रतिरक्षा तंत्र स्वयं ही कैंसर की कोशिकाओं से लड़ता है, जिससे दुष्प्रभाव लगभग खत्म हो जाते हैं। डॉ. तलवार ने बताया कि केवल कीमोथेरेपी से रोगियों के बचने की दर कम थी, लेकिन टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी के साथ बचने की दर बढ़ गई है। कोलोरेक्टल कैंसर के उपचार में विकिरण यानी रेडिएशन की भूमिका पर आरजीसीआई एंड आरसी के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी निदेशक डॉ. मुनीश गैरोला ने कहा, निस्संदेह बड़ी आंत के कैंसर में उपचार के लिए सर्जरी ही चुनी जाती है, लेकिन रेडिएशन ट्यूमर के आकार को कम करने में मदद करता है, जिससे सर्जन को ऑपरेशन करने में आसानी होती है और बीमारी फैलने की आशंका कम हो जाती है। इससे बचने की संभावना बहुत बढ़ जाती है। कीमोथेरेपी रेडियो सेंसिटाइजर की तरह काम कर रेडिएशन के प्रभाव को बढ़ा देती है, जिससे रेडिएशन ऊतकों में गहराई तक पहुंच जाता है। रेडिएशन में काफी प्रगति हो चुकी है।


पहले रेडिएशन के बहुत दुष्प्रभाव होते थे, लेकिन अब रेडिएशन की ज्यादा केंद्रित तकनीकें ‘कन्फॉर्मल रेडिएशन’ हैं, जिनके जरिये हम रेडिएशन को ट्यूमर की आकृति के मुताबिक सीमित कर सकते हैं।भारत में बड़ी आंत का कैंसर सबसे ज्यादा होने वाले 10 प्रकार के कैंसर में शामिल है। मोटापे और कम मोटे अनाज वाली खुराक को इस प्रकार के कैंसर का कारण माना जाता है। कुछ मामलों में यह आनुवंशिक भी होता है। लोगों को रेशे की अधिक मात्रा वाला भोजन लेना चाहिए और अल्कोहल तथा धूम्रपान से दूर रहना चाहिए। चिकित्सकों ने कहा कि सुस्त और गतिहीन जीवनशैली भी बड़ी आंत के कैंसर का कारण है। आम तौर पर कोलोरेक्टल कैंसर होने की आशंका 50 या 60 वर्ष की उम्र होने पर अधित रहती है। आनुवांशिक मामलों में युवाओं को भी यह कैंसर हो जाता है। परिवार में कैंसर के
इतिहास जैसे जोखिम वाले लोगों को वर्ष में एक बार फीकल अकल्ट ब्लड टेस्ट (एफओबीटी) कराना चाहिए तथा चिकित्सक से बड़ी आंत की जांच भी करानी चाहिए।दुर्भाग्य से इस कैंसर के स्पष्ट लक्षण नहीं होते, लेकिन लोगों को शौच में होने वाले परिवर्तन (पहले कब्ज फि र दस्त फि र कब्ज और फि र दस्त) पर तथा वजन में अकारण कमी तथा खून की कमी पर ध्यान देना चाहिए।आईएमए, पानीपत के अध्यक्ष डॉ. गौरव श्रीवास्तव ने आगंतुकों का स्वागत किया और आशा जताई कि नई जानकारी साझा करने वाले सत्र से वहां मौजूद सभी चिकित्सकों को फ ायदा होगा।






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