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समाचार ब्यूरो
01/02/2019  :  09:29 HH:MM
जनता ईमानदार राज-नीति चाहती है
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जींद उपचुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत से साफ हो गया है कि जनता ईमानदारी से काम करने वाली सरकार ही चाहिए। ऐसी सरकार, जो नौजवानों को रोजगार मुहैया करा सके और प्रदेश को विकास का रास्ता दिखाए। लोक-लुभावने नारे और जातिवाद की राजनीति से जनता अब वोट नहीं देगी।

हरियाणा के लिए जींद उपचुनाव एक तरह से सेमीफाइनल ही है। इससे जहां भाजपा के लिए सत्ता वापिस की उम्मीद मजबूत हुई है, तो कांग्रेस, आईएनएलडी के लिए खतरे की घंटी बज गई है। क्योंकि जींद विधानसभा सीट पर बीजेपी का कभी ज्यादा मजबूत जनाधार नहीं रहा। आईएनएलडी और कांग्रेस का ही सदा इस सीट पर कब्जा रहा। 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी की आंधी को छोड़ दिया जाए तो बीजेपी कभी जींद विधानसभा सीट के चुनाव में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज नहीं करवा पाई। इस लिहाज से जींद का उपचुनाव में भारी मतों से जीत बीजेपी सरकार की जनकल्याकारी नीतियों की जीत है। प्रदेश में मनोहर सराकर के काम से लोग खुश हैं। भाजपा को जिन उम्मीदों के साथ लोगों ने भारी बहुमत से सत्ता सौंपी थी, वह उन पर खरी उतरी है। हम जानते है कि 2014 का विधानसभा चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर लड़ा गया। खुद प्रधानमंत्री मोदी ने चुनाव के दौरान अपनी रैलियों में प्रदेश की जिन ज्वलंत समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए समाधान का वायदा किया था, उनमें व्यवस्था में पारदर्शिता और तंत्र को चुस्त-दुरुस्त करना शामिल रहा है। प्रदेश के मतदाताओं ने भाजपा के वायदों पर विश्वास जताया और पहली बार स्पष्ट बहुमत से पार्टी को सत्ता पर पहुंचाया। ऐसे में जन अपेक्षाओं का भारी दबाव मनोहर सरकार पर हमेशा रहा। क्योंकि इससे पहले तमाम सरकारों ने भ्रष्टाचार और सुशासन को लेकर सब्जबाग तो दिखाए, लेकिन हकीकत में उन्हें अमलीजामा पहनाने में कदम डगमगाते रहे। प्रदेश के गठन के 50 साल बाद भी सुशासन सिर्फ नारों तक सीमित रहा है। जिलों से लेकर शासन के गलियारों तक में सुशासन देखने को आम जनता तरसती रही। यही वजह थी कि सुशासन जैसी महत्वपूर्ण पहल पर अमल के लिए प्रदेश सरकार ने शुरूआत से मजबूत इच्छाशक्ति दिखाई। हालांकि, विषम भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों में तंत्र को स्वच्छ और मजबूत बनाना कतई आसान नहीं था। लेकिन, सरकार ने ई-गवर्नेंस के जरिए इस चुनौती से काबू पाया गया। सरकार ने सुनिश्चित किया कि सरकारी योजनाओं का लाभ हर हाल में आम लोगों तक पहुंचे। बीते चार साल हरियाणा सरकार ने निरंतर इन्हीं मापदंडों को आधार बनाकर कार्य किया, जिससे प्रदेश के कोने-कोने तक समाज का प्रत्येक वर्ग लाभान्वित हुआ और प्रदेश में सुशासन को एक नया स्वरूप मिला। 62,347 शिक्षकों का ऑनलाइन ट्रांसफर, एक करोड़ 11 लाख उपभोक्ताओं को ईपीडीएस सिस्टम के माध्यम से राशन, सीएम विंडो के माध्यम से 4 लाख से ज्यादा शिकायतों का समाधान और बिना भेदभाव, योग्यता के आधार पर 54 हजार से ज्यादा युवाओं को नौकरी देकर सरकार ने अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को सुशासन का आभास कराया। साथ ही ‘‘प्रधानमंत्री आवास योजना’’ के तहत प्रदेश में 1,33761 परिवारों को आशियाना, 5 लाख गरीब परिवारों को  मुफ्त में रसोई गैस का सिलेन्डर, आयुष्मान भारत के अंतर्गत करीब 10 लाख लोगों की स्वास्थ्य चिंता और बेमौसम बारिश में किसानों को उचित मुआवजा देकर सरकार यह संदेश देने में सफल रही कि वह आम जनता की तकलीफों से अच्छी तरह वाकिफ हैं एवं उसे दूर करने के लिए कृतसंकल्पित हैं। इन्हीं नीतियों का सीधा फायदा भाजपा को मिला। शहरी पार्टी का तमगे से अब भाजपा दूर हो गई है। जींद के गांवों से 10 हजार वोट देकर दूसरे नंबर पर रहना, भाजपा की नई उपलब्धि है। बाईपास रोड, 18 घंटे बिजली, नई सडकें, मेडिकल कॉलेज, महिला पुलिस स्टेशन, सिविल अस्पताल, ग्राम सचिवालय, सभी 42 टेलों तक पानी और 263 करोड़ रूपये का मुआवजा जैसे विकास कार्यों से पार्टी ने ग्रामीण क्षेत्रों में पहली बार बढ़त पाई। इस जीत में बड़ा हाथ खुद मुख्यमंत्री मनोहर लाल है।

जिनकी ईमानदार कार्यशैली की छवि ने आम जनमानस को प्रभावित किया है। उनके ऊपर भ्रष्टाचार या पक्षपात के असरकारी आरोप नहीं लगते। शायद वे पहले ऐसे मुख्यमंत्री है, उन्होंने सत्ता चलाने के लिए ऐसी कोई कोटरी नहीं बनाई जो उनके नाम का दुरुपयोग कर सके। 
इसके साथ ही उन्होंने आम आदमी तक यह संदेश पहुंचाने में कामयाबी हासिल की है कि वे सप्ताह के सातों दिन सिर्फ काम करते रहते हैं। मुख्यमंत्री की बेदाग और कर्मठ छवि इसी की उपज है और आम आदमी के भरोसा की नींव भी कि वे गरीबों के हितचिंतक हैं। मुख्यमंत्री की ईमानदार कार्यशैली से न सिर्फ जनता, बल्कि उनकी पार्टी के नेता-कार्यकर्ता भी खुश हैं। मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने जनता की नब्ज को पकड लिया है। इसलिए चुनाव में इसबार मोदी ब्रांड के साथ मनोहर ब्रांड भी खूब चला। पारदर्शी और मेरिट के आधार पर नौकरी देकर उन्होंने गरीब तबके के बीच अपनी नई पहचान खड़ी की है। चुनाव के दौरान 18 हजार नौकरियों के पारदर्शी परिणाम ने इस विश्वास को और मजबूत किया। देखा जाएं तो मुख्यमंत्री मनोहरलाल ठहराव के खिलाफ हैं। बीते सालों में उनकी छवि लगातार नया रूप
ले रही है। इसकी बानगी बीते विधानसभा सत्र में देखने को मिली। जब जींद विधायक डॉ. हरीशचंद मिड्ढा का निधन हुआ। उन्होंने सभी पक्ष-विपक्षी विधायकों को रजामंद कर स्वर्गीय विधायक के सभी विकास कार्यों के लिए फंड जारी किया। मुख्यमंत्री की यह सादगी चुनाव
में सहायक बनी। जीत का श्रेय भाजपा चुनाव प्रबंधन की टीम और बूथ कार्यकर्ताओं को भी देना जरूरी है। क्योंकि पहली बार ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा का बूथ प्रबंधन देखने लायक था। अन्य प्रदेशों की भांति मतदाताओं को साधने के लिए ‘पन्ना प्रमुख’ अभियान यहां भी सफल रहा। विपक्ष की संभावित रणनीति, हर नई चाल की काट और किसी भी अप्रत्याशित हमले से निपटने के लिए पार्टी पहले से समक्ष है। मतलब साफ है- मुख्यमंत्री की ईमानदार छवि, विकास और, आम आदमी का विश्वास का जवाब फिलहाल विपक्ष के पास नही है। इसलिए जींद उपचुनाव के नतीजों से कांग्रेस और आईएनएलडी को सबक लेने की जरूरत है। उन्हें अब पूरानी परंपरागत रणनीति को छोड़ नई रणनीति पर काम करना पड़ेगा। क्योंकि आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव में इन पार्टियों को मनोहर ब्रांड का भी सामना करना पड़ेगा। (ये लेखक के निजी विचार हैं)






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