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समाचार ब्यूरो
27/03/2019  :  10:39 HH:MM
लांग ड्राइव और कंह्रश्वयूटर के आगे बैठने से कमजोर हो रही रीढ़ की हड्डी
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पानीपत लंबी दूरी तक बगैर रूके गाड़ी चलाना और ज्यादा समय तक कंह्रश्वयूटर के आगे बैठने के कारण बीस से तीस वर्ष आयु वर्ग में हर पांचवा भारतीय रीढ़ की समस्याओं से ग्रस्त हो रहा है। जबकि एक दशक पहले यह समस्या केवल बुजुर्गों में देखी जाती थी।

जीवनशैली में बदलाव, लोगों का वजन बढऩे तथा पर्याप्त आहार और प्रोटीन के सेवन में कमी युवाओं में गंभीर गर्दन और पीठ दर्द को बढ़ाने वाले प्रमुख कारण हैं। यह जानकारी मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, शालीमार बाग में न्यूरो सर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता, न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख सलाहकार एवं विभाग के प्रमुख डॉ. मनोज खनाल ने स्थानीय रवींद्र अस्पताल में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम के दौरान मरीजों व प्रबुद्ध नागरिकों को संबोधित करते हुए दी। डॉ. गुप्ता ने बताया कि पीठ दर्द सबसे आम स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है जिससे दुनिया भर में काफी संख्या में लोग प्रभावित हैं। लगातार होने वाला पीठ दर्द काफी असहज हो सकता है और परेशानी पैदा कर सकता है और किसी भी व्यक्ति की दैनिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। दो साल पहले प्रकाशित हुई एक रिपोर्ट के अनुसार सोलह से 34 आयु वर्ग के 20 प्रतिशत युवा लोगों का पीठ और रीढ़ की बीमारियों का इलाज किया जाता है। न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख कंसल्टेंट और यूनिट के प्रमुख डॉ.मनोज खनाल ने कहा कि हमारी रीढ़ अनेक छोटी-छोटी हड्डियों और इंटरवेर्टेब्ररल
डिस्क से बनी होती है। ये डिस्क शॉक आब्जर्वर का काम करती हैं। अगर लगातार इनका गलत तरीके से इस्तेमाल हो तो भार उठाने वाले निचले हिस्से की डिस्क सूखने लगती हैं और इसके कारण पीठ वाला हिस्सा कमजोर हो जाता है। उन्होंने बताया कि एक ही आसन में बैठे रहने से पीठ की मांसपेशियों एवं स्पाइनल डिस्क पर काफी अधिक दवाब पड़ता है। इसके अलावा गलत आसन में बैठने से स्पाइन के लिगामेंट में बहुत अधिक खिंचाव होता है और स्पाइनल डिस्क पर दवाब पड़ता है जिसके कारण पीठ एवं गर्दन में काफी दर्द होता है। पहले रीढ़ की सर्जरी के बाद मरीज को तीन महीने तक बेड रेस्ट करना पड़ता था लेकिन आज रीढ़ की सर्जरी ‘डे केयर’ में बदल चुकी है। मौजूद समय में उन मरीजों के लिए मिनिमली इनवैसिव स्पाइन सर्जरी की नवीनतम तकनीक बेहतरीन विकल्प है जिन्हें गंभीर पीठ दर्द है, उपरी या निचले हिस्से में कमजोरी या सुन्नपन है और जिन्हें नॉन-स्टेरायडल एंटी- इंफ्लामेट्री दवाइयों (दर्द निवारक दवाइयों) तथा फिजियोथेरेपी जैसे गैरसर्जि कल उपचारों से कोई फायदा नहीं पहुंच रहा है।






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