समाचार ब्यूरो
11/04/2019  :  10:38 HH:MM
स्तन कैंसर जागरूकता पहल ‘थैंक्स-ए-डॉट’
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सोनीपत विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर, देश की सबसे विश्वसनीय जीवन बीमा कंपनियों में से एक - एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस ने थैंक्स ए डॉट, स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता पैदा करने वाली एक पहल है जो सोनीपत, हरियाणा में आयोजित की गई। शोध से पता चलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों की 3 में से 1 महिला ने इस भयानक बीमारी के बारे में सुना भी नहीं है और उनमें से लगभग 90 प्रतिशत स्वयं के स्तन की जांच कराने की संभावना से भी अनजान हैं।

इस उद्देश्य से, एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस ने ग्रामीण महिलाओं को स्तन कैंसर के खतरे, स्वयं की जांच कराने के फायदों के बारे में बताने और स्वयं को तैयार रखने में सशक्त बनाने हेतु एक कार्यशाला आयोजित की। यह कार्यशाला स्तन कैंसर से जीतने वाली और  प्रेरणादायक वक्ता, सुजाया वालिया द्वारा चलाई गई है। गांव के कुछ पुरूषों सहित वहां की 60 से अधिक महिलाओं में ने कार्यशाला में भाग लिया और उनमें से सभी को ‘थैंक्स-ए-डॉट’’ किट नि:शुल्क दिया गया। अध्ययनों से संकेत मिलता है कि भारत में स्तन कैंसर की औसत आयु पश्चिम की तुलना में लगभग एक दशक कम है। स्तन कैंसर से पीडि़त हर 2 में से एक महिला को भारत में जीवित नहीं रखा जाता है। इसके अलावा, कैंसर से पीडि़त 2,000 महिलाओं में से 1,200 का निदान एक देर से किया गया था। इसका मतलब
है कि यह स्तन और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के लिए प्रथम वर्ष के जीवित रहने की दर को 3 से 17 गुना कम कर देता है। एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस के ब्रांड एंड कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस के प्रमुख रवींद्र शर्मा ने ग्रामीण अंदरूनी क्षेत्रों में पहल करते हुए कहा, महिलाओं में स्तन कैंसर सबसे आम है और अगर शुरूआती अवस्था में पता चल जाए तो इसे ठीक किया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश महिलाएं अपने स्वास्थ्य की उपेक्षा करती हैं और अनैतिकता, अशिक्षा, मिथक या अंधविश्वास और कई बार आर्थिक बाधाओं के कारण जल्दी से जल्दी चिकित्सा सलाह लेने में देरी करती हैं। इन महिलाओं में इस बीमारी के लक्षणों के बारे में गहरी समझ और जागरूकता होना अनिवार्य है। इसलिए, हमने जागरुकता पैदा करने और प्रत्येक महिला को एक-दूसरे के बीच स्व-स्तन परीक्षण के बारे में सकारात्मक बातचीत करने और संकोच की भावना से दूर होने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए थैंक्स-ए-डॉट ’की पहल की। उन्होंने आगे कहा, ’महिलाएं परिवार के स्वास्थ्य की संरक्षक होती हैं, जो अपने समुदायों के स्वास्थ्य और भलाई को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। दूसरे शब्दों में, स्वस्थ महिलाएं स्वस्थ परिवार, स्वस्थ समुदाय और एक स्वस्थ राष्ट्र सुनिश्चित करेंगी। एक जि़म्मेदार जीवन बीमाकर्ता के रूप में, हम मानते हैं कि बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाकर महिलाओं को शिक्षित और सशक्त बनाने में हमारी महत्वपूर्ण भूमिका है और हमें उम्मीद है कि ‘थैंक्स-ए-डॉट’ महिलाओं के रवैये में आवश्यक बदलाव ला सकती है, उनके स्वास्थ्य के लिए। नीलम, सरपंच, सरसा गाँव, हरियाणा ने कहा, हमारे समाज में, कोई भी महिलाओं के स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं देता है और इसके अलावा, हमारे समुदाय की महिलाएँ अपनी स्वास्थ्य समस्याओं को अनदेखा करती हैं।






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