समाचार ब्यूरो
17/04/2019  :  10:09 HH:MM
वयस्क और बच्चें हो रहे एनीमिया के शिकार
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नई दिल्ली एसआरएल डायग्नॉस्टिक्स द्वारा किए गए इन-हाउस सर्वेक्षण के आधार पर जारी एक रिपोर्ट के अनुसार पाया गया है कि एनिमिया न केवल वयस्कों में बल्कि बच्चों में भी आमतौर पर पाया जाता है। अध्ययन में यह भी पाया गया कि उम्र के साथ एनिमिया की संभावना बढ़ती है। सर्वेक्षण के परिणाम जनवरी 2016 से मार्च 2019 के बीच देश भर की एसआरएल लैबोरेटरीज में हीमोग्लोबिन जांचों की रिपोर्ट्स पर आधारित है।

एसआरएल की रिपोर्ट के अनुसार
80 साल से अधिक उम्र के 91 फीसदी
लोग, 61 से 85 साल से 81 फीसदी
लोग, 46 से 60 साल से 69 फीसदी
लोग, 31 से 45 साल के 59 फीसदी
लोग, 16 से 30 साल के 57 फीसदी
लोग तथा 0-15 साल के 53 फीसदी
बच्चे और किशोर एनिमिया से ग्रस्त हैं। 45 साल से अधिक उम्र के मरीजों में एनिमिया के सबसे गंभीर मामले पाए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं या हीमोग्लोबिन की कम मात्रा होने पर शरीर के ओर्गेन सिस्टम को स्थायी नुकसान पहुंचता है। लाल रक्त कोशिकाओं की कमी से शरीर में खून के जरिए ऑक्सीजन का प्रवाह कम मात्रा में हो पाता है जिससे मरीज में कई लक्षण नजर आते हैं जैसे थकान, त्वचा का पीला पडऩा, सिर में दर्द, दिल की धडक़नों का अनियमित होना और सांस फूलना। अन्य लक्षणों में शामिल हैं मूड में बदलाव और चिड़चिड़ापन, कमजोरी। एनिमिया का सबसे आम कारण है आयरन की कमी, जिसका इलाज करना आसान है। ज्यादातर बीमारियों के मामले में जागरूकता बहुत महत्वपूर्ण होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एनिमिया को तीन स्तरों में श्रेणीबद्ध किया है। माइल्ड (हल्का), मॉडरेट (मध्यम) और सीवियर (गंभीर)। अध्ययन में लिए सैम्पल्स के अनुसार भारत के अन्य जोनों (64 फीसदी) की तुलना में उत्तरी जोन में एनिमिया के सबसे ज्यादा (69 फीसदी) मरीज पाए गए हैं।






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