समाचार ब्यूरो
03/05/2019  :  09:58 HH:MM
वायु प्रदूषण है राजधानी दिल्ली में अस्थमा की मुख्य वजह
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नई दिल्ली अस्थमा पर जागरूकता फैलाने के लिए आयोजित प्रेस कॉन्फ्रें स में डॉ. अनंत मोहन, विभागाध्यक्ष-चेस्ट (पल्मनरी मेडिसिन), एमस और डॉ. गौरव सेठी, बाल रोग विशेषज्ञ, गुड हैंड्स क्लिनिक, दिल्ली में इस रोग से जीतने के लिए बहुमूल्य सुझाव दिए। अस्थमा गंभीर बीमारी है जों बड़ी आबादी को प्रभावित करती है। हर साल इसकी संख्या बढ़ रही है।

डब्ल्यूएचओ फैक्ट शीट के अनुसार 100 से 150 मिलियन लोग अस्थमा से पीडि़त हैं। भारत में इसकी संख्या बढ़ते हुए 15-20 मिलियन तक पहुंच गई है। डॉ. अनंत मोहन ने कहा अस्थमा और इनहेलेशन थेरेपी के प्रति धारणा को बदलना बहुत महत्वपूर्ण है। इनहेलेशन थेरेपी लोगों के जीवन पर अस्थमा के प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, पर इनहेलेशन थेरेपी से दवाओं को सीधे फेफड़ों तक पहुंचाने में मदद मिलती है। जहां उनकी आवश्यकता होती है, इसलिए वे तेज, बेहतर ढंग से और किसी साइड इफेक्ट के बिना काम करती हैं। रोगियों को इनहेलर स्वीकार करने और पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए निर्धारित उपचार का पालन करने के लिए मनाना चुनौतीपूर्ण है। इनहेलेशन थेरेपी लक्षणों को रोकने और राहत देने और अटैक की तीव्रता कम करके अस्थमा को नियंत्रित करने के लिए काम करती है। ये तभी काम करेंगी, अगर मरीज अपने चिकित्सकों के साथ मिलकर काम करें। डॉ. सेठी ने कहा अस्थमा जैसी गंभीर बीमारियों में जानकारी का अत्यधिक महत्व है। यह बिल्कुल सही है जहां अस्थमा के खिलाफ जीत को बढ़ावा देगा और रोगियों को भाग
लेने और अपने स्वयं के उपचार में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने में सक्षम करेगा। हम विश्व अस्थमा दिवस को अपने दैनिक जीवन में ज्यादा से ज्यादा सफलता हासिल करने में लोगों को सक्षम करने के अपने प्रयासों को सीधे प्रदर्शित करने की कोशिश करते हैं। इन बाधाओं/वर्जनाओं को दूर करना और इनहेलर थेरेपी के महत्व को समझना और उसका पालन करना समय की मांग है। विशेषज्ञों के अनुसार, अस्थमा के खिलाफ एक निश्चित जीत के लिए, इनहेलेशन थेरेपी जैसे प्रभावी उपचार की आवश्यकता होती है। डॉ. मोहन ने कहा इनहेल्ड कॉर्टिकोस्टेरॉइड थेरेपी अस्थमा प्रबंधन की आधारशिला है। किसी भी उपचार के तरीके की प्रभावशीलता और सुरक्षा के लिए, सबसे अच्छी दवा का वितरण महत्वपूर्ण है। आईसीटी के मामले में, दवा छोटी खुराक में सीधे वायुमार्ग तक पहुंच जाती है, जिससे संभावित साइड इफेक्ट्स सीमित हो जाते हैं। मौखिक दवा के मामले में, दवा की खुराक आईसीटी की तुलना में कई गुना अधिक होती है। यह अतिरिक्त खुराक फिर शरीर के अन्य हिस्सों में भी पहुंचती है, जहां इसकी आवश्यकता नहीं होती है और प्रणालीगत दुष्प्रभाव बढ़ते हैं।






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