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समाचार ब्यूरो
19/05/2019  :  09:22 HH:MM
राष्ट्रीय कार्यशाला का न्यायाधीश ने किया शुभारंभ शोषित और दिव्यांगजनों को सामाजिक न्याय तथा आगे बढऩे के मिलें अवसर : अत्री
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करनाल समेकित शिक्षा आज के वैज्ञानिक युग में कितनी आवश्यक है लेकिन इसे क्रियान्वित करने में आने वाले अवरोधों को मिटाने के लिए क्या-क्या कदम उठाने चाहिएं एवं उठाए जा रहे हैं, इन्ही विषयों को चर्चा का माध्यम बनाए जाने के उद्देश्य से तपन पुर्नवास संस्थान करनाल द्वारा स्थानीय कर्ण लेक दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इसका शुभारम्भ पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के न्यायाधीश राज शेखर अत्री द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता मानवाधिकार आयोग हरियाणा की सचिव रेनु एस. फुलिया ने की। इस मौके पर भारतीय पुर्नवास परिषद के सदस्य सचिव डॉ. सुबोध कुमार, डॉ. एस.पी. ऑबरोय, ए.के. यादव, उपनिगमायुक्त धीरज कुमार तथा तपन संस्थान की निदेशिका डॉ. सुजाता अरोड़ा ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर सीजेएम हितेश गर्ग व एसडीएम करनाल नरेन्द्र पाल मलिक भी उपस्थित रहे। कार्यशाला में न्यायाधीश राज शेखर अत्री ने
तपन पुर्नवास संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि विशेष शिक्षक समाज को बहुत बड़ा योगदान दे रहे हैं। उन्हें यह कार्य सम्पूर्ण निष्ठा एवं प्रेम से करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ग के लोगों को ऐसी संस्थाओं का सहयोग करना चाहिए, जो सरकार के साथ
मिलकर समाज हित में कार्य करते हैं, ताकि शोषित व दिव्यांगजनों को सामाजिक न्याय तथा उन्हें आगे बढऩे के अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जन्म से और लोग दुर्घटना के कारण दिव्यांग हो जाते हैं, उनकी सहायता करना समाज के हर व्यक्ति का कर्तव्य है, ताकि वह भी समाज की मुख्य धारा में शामिल हो सके। उन्होंने कहा कि आज की कार्यशाला में वक्ताओं द्वारा जो संदेश दिया गया है, उसे घर-घर में पहुंचाएं, यह समाज सेवा के प्रति बहुत बड़ा योगदान होगा। न्यायाधीश ने डॉ. सुजाता निदेशक तपन द्वारा लिखी गई पुस्तक डिप्रेशन का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि डॉ. सुजाता जो एक मनोवैज्ञानिक भी हैं एवं कितने ही मानसिक एवं भावनात्मक पीडि़त लोगों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ कर अहम भूमिका निभा रही है। यह पुस्तक अवश्य ही समाज के लिए लाभप्रद साबित होगी।
इस अवसर पर कार्यशाला की अध्यक्ष एवं मानवाधिकार आयोग हरियाणा की सचिव रेनु एस. फुलिया ने कहा कि दिव्यांग व्यक्ति भी समाज का अभिन्न अंग है, इन्हे दया की नहीं सहयोग की जरूरत है। इसलिए इनके प्रति आमजन को सहयोग के लिए आगे आना चाहिए। इस अवसर पर भारतीय पुर्नवास परिषद के सदस्य सचिव डॉ. सुबोध कुमार ने अपने विशेष भाषण में कार्यशाला के एवं परिषद के उद्देश्यों से अवगत करवाया। उन्होंने ऐसी संस्थाओं को एक स्वच्छ समाज देने का अनुरोध किया।

वह तपन संस्थान के साथ-साथ बहुत सी सामाजिक संस्थाओं को सहयोग दे रहे हैं और ना केवल भारत बल्कि पूरे विदेशों में भी विशेष शिक्षा एवं पुर्नवास को सहयोग दे रहे हैं। उन्होंने परिषद द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमो का ब्यौरा दिया। इस अवसर पर उन्होंने अपने
ऑस्ट्रेलिया दौरे का जिक्र करते हुए बताया कि भारत एंव ऑस्ट्रेलिया के बीच समझौता किया गया है, ताकि विशेष शिक्षा, समेकित शिक्षा एवं पुनर्वास के क्षेत्र में बेहतर परिवर्तन किए जा सकें। डॉ. एस.पी. सिंह ओबराए मैनेजिंग ट्रस्टी सरबत का भला भी इस अवसर पर
उपस्थित थे। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि उपनिगमायुक्त धीरज कुमार ने कार्यशाला में उपस्थित शिक्षकों का आह्वान किया कि वे जीवन में स्वच्छ रहने के लिए बच्चों को प्रेरित करें तथा निष्टावान बने। कार्यशाला में तपन संस्थान की निदेशिका डॉ. सुजाता ने बताया कि राष्ट्रीय स्तरीय कार्यशाला में 100 से अधिक विशेष शिक्षक, पुर्नवास विशेषज्ञ एवं अध्यापक शामिल हुए हैं। हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, उत्तर प्रदेश, दिल्ली एवं चण्डीगढ़ से आए इन शिक्षकों ने अपने-अपने अनुभवों एवं शोध कार्यों को प्रस्तुत किया। जिससे भविष्य में भारतीय पुर्नवास परिषद को पॉलिसी बनाने में सहायता मिलेगी एवं दिव्यांग पुर्नवास में आ रहे अवरोधों को दूर किया जा सकेगा। भारतीय पुर्नवास परिषद, जो देश में पुर्नवास के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं एवं विशेषज्ञों के लिए मानक निर्धारित करती है, इस तरह की कार्यशालाओं का आयोजन करवाती है, ताकि विशेष शिक्षा एवं पुर्नवास से सम्बंधित पद्धतियां लागू की जा सकें। इस अवसर पर तपन संस्थान के अशोक कुमार यादव सेवानिवृत्त आई.ए.एस. कमिश्रर ने ऐसी संस्थाओं को आगे आने का आह्वान किया, ताकि भारत पुर्नवास के क्षेत्र में एक नया
इतिहास बना सके। प्रो. एस.सी. गांधी ने आए हुए अतिथियों का धन्यवाद किया।






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